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ज्योतिष
हरतालिका तीज 2025 के लिए पूजा मुहूर्त:
प्रातःकाल हरितालिका पूजा मुहूर्त - 06:07 ए एम से 08:40 ए एम
तृतीया तिथि प्रारम्भ - अगस्त 25, 2025 को 12:34 पी एम बजे
तृतीया तिथि समाप्त - अगस्त 26, 2025 को 01:54 पी एम बजे
पूजन विधि
– सुबह उठ कर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें।
– पूजा से पहले रेत और मिट्टी से भगवान शिव-पार्वती और श्रीगणेश की मूर्ति बनाएं।
– इसके बाद एक थाली में सुहाग सामग्री सजा कर माता पार्वती को अर्पित करें।
– भगवान शंकर को भी वस्त्र अर्पित करें।
– इसके बाद तीज की कथा पढ़ें या सुनें।
हरितालिका तीज व्रत कथा
हरितालिका व्रत की कथा माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह से जुड़ी है। दरअसल एक बार की बात है गिरीराज हिमावन पार्वती के लिए अच्छे वर की तलाश कर रहे थे। तभी नारदजी ने भगवान विष्णु का रिश्ता उन्हें सुझाया। जब पार्वती को यह बात पता चली, तो वे बेहद दु:खी हुईं। वे भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी। तब उनकी एक सहेली उन्हें घनघोर जंगल में ले गईं। जहां पार्वती ने रेत का शिवलिंग बनाया और तपस्या की। वे निराहर रहकर शिव आराधना में लगी रहीं। इस तपस्या से शिव प्रसन्न हुए और उनके पास आकर मनचाहा आशीर्वाद दिया। जब पार्वती के पिता को भी यह बात पता चली, तो उन्होंने पूरे विधान से शिव पार्वती का विवाह करवाया। जिस दिन शिव ने पार्वती को दर्शन दिया था, वह तिथि भाद्रपद की तृतीया तिथि थी। तब शिव ने घोषणा की कि जो भी महिला इस दिन व्रत रखकर पूजा करेगी, उसे अखंड सुहाग की प्राप्ति होगी।
हरियाली और हरितालिका तीज में है अंतर
दरअसल सावन की तीज को हरियाली तीज कहते हैं और भाद्रपद की तीज को हरितालिका तीज। सावन तीज पर महिलाएं श्रृंगार करतीं हैं और व्रत रखती हैं, लेकिन हरितालिका तीज एक कठिन व्रत है। इस दिन महिलाएं निराहार रहती हैं। हालांकि दोनों व्रत में सामान्य नियम एक तरह के ही हैं, लेकिन हरियाली तीज राजस्थान में ज्यादा मनाई जाती है, जबकि हरितालिका तीज मप्र, महाराष्ट्र आदि राज्यों में प्रसिद्ध है।