पढ़िए खाटू श्याम के 11 नाम, पढ़ने मात्र से मिलेगा मनचाहा वरदान

पढ़िए खाटू श्याम के 11 नाम, पढ़ने मात्र से मिलेगा मनचाहा वरदान

पढ़िए खाटू श्याम के 11 नाम, पढ़ने मात्र से मिलेगा मनचाहा वरदान

कलियुग में खाटू श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार कहा जाता है। भगवान कृष्ण के ही वरदान से वे श्याम नाम से पूजे जाते हैं। उनके बाल घुंघराले होने के कारण उनके पिता और माता उन्हें बर्बरीक कहते थे। आज हम आपको बताने जा रहे हैं बर्बरीक के कुछ विशेष नाम, जिनका लगातार उच्चारण करके आप बाबा श्याम मनचाही वस्तु प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा अपनी समस्त मनोकामनापूर्ति के लिए आप खाटू श्याम बाबा की विशेष पूजा में भी भाग ले सकते हैं।   Khatu Shyam Special Puja  

खाटू श्याम के 11 नाम

1 बर्बरीक | Barbarik 2 मौर्वी नंदन | Morvi Nandan 3 तीन बाण धारी | Teen Baan Dhari 4 शीश के दानी | Seesh Ke Daani 5 लखदातार | Lakdataar 6 कलियुग के अव​तारी | Kalyug Ke Avtari 7 नीले घोड़े का सवार | Nile Ghode Ka Sawar 8 श्रीश्याम | Shree Shyam 9 हारे का सहारा | Haare Ka Saahara 10 खाटू नरेश | Khatu Naresh 11 मोरछड़ी धारक | Morchadi Dharak

खाटू श्याम के 11 नाम का महत्व

  • बर्बरीक | Barbarik
  • खाटू श्याम का पहले नाम बर्बरीक है। जो कि उनकी माता और पिता द्वारा दिया गया था। बर्बरीक की माता मौर्वी और पिता का नाम घटोत्कच था। वे पांडवों के वंशज हैं। घटोत्कच बेहद शक्तिशाली थे और गदाधारी भीम के पुत्र थे। उनकी दादी हिडंबा एक राक्षसी थी।
 
  • मौर्वी नंदन | Morvi Nandan बर्बरीक की माता का नाम मौर्वी थी। मौर्वी बेहद सुंदर लेकिन राक्षस पुत्री थी। वे माता कामाख्या की बड़ी भक्त थीं। उन्हीं की प्रेरणा से बर्बरीक मां कामाख्या के बड़े भक्त हुए
 
  • तीनबाण धारी | Teen Baan Dhari अर्जुन की तरह बर्बरीक बेहद अच्छे धनुर्धर थे। देवी मां की विशेष कृपा से उन्हें तीन ऐसे बाण प्राप्त किए थे, जो किसी भी शत्रु सेना को तुरंत ही समाप्त कर सकते थे। इन्हीं तीन बाणों की परीक्षा करके श्रीकृष्ण ने ही उन्हें सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर का नाम दिया था।
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खाटू श्याम के 11 नाम का महत्व

  • शीश के दानी | Seesh Ke Daani बर्बरीक ने अपने गुरु श्रीकृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था। दरअसल बर्बरीक युद्ध में भाग लेने की इच्छा से माता मौर्वी के पास पहुंचे। मौर्वी जो पांडवों की कुलवधु थीं, उन्हें लगा कि पांडवों का पक्ष कमजोर है, इसलिए उन्होंने बर्बरीक से वचन मांगा कि जो पक्ष कमजोर होगा, उन्हीं की ओर से युद्ध करेंगे। श्रीकृष्ण युद्ध का परिणाम जानते थे, इसलिए उन्होंने युद्ध शुरू होने से पहले बर्बरीक से उनका शीश मांग लिया। बर्बरीक ने यह शीश बिना किसी संकोच के उन्हें दे दिया।
 
  • लखदातार | Lakdataar हरियाणा और पंजाब के लोग बाबा श्याम को प्रेम से लखदातार कहते हैं। यानी भक्तों की लाखों करोड़ों इच्छाएं भी खाटू श्याम सहजता से पूरी कर देते हैं। कहते हैं बाबा श्याम की पूजा करने वाला व्यक्ति आसानी से धनवान बन जाता है और उसके कार्य सिद्ध होने लगते हैं।
 
  • कलियुग के अव​तारी | Kalyug Ke Avtari महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें अपना नाम दिया और साथ ही यह वरदान भी दिया कि वह आने वाले कलियुग में उनके नाम से पूजा जाएंगे। इस समय कलियुग में बाबा श्याम अपने भक्तों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है, जहां हर दिन लाखों की संख्या में उनके भक्त अपनी इच्छाएं लेकर उनके पास आते हैं।
 
  • नीले घोड़े का सवार | Nile Ghode Ka Sawar खाटू श्याम को नील घोड़े पर सवारी करने वाला वीर भी कहते हैं। उनका घोड़ा नीले रंग का था, जो बेहद अद्भुत था।
 
  • श्रीश्याम | Shree Shyam श्री कृष्ण ने अपनी अद्वितीय शक्ति और अपने प्रति भक्ति से बर्बरीक के दिल में एक नया ज्ञान का प्रकाश डाला। उन्होंने दान की भावना को एक नया आयाम दिया और बर्बरीक को अपने असली रूप में पहचानने का अवसर दिया। उनकी त्याग और बक्ति भावना से प्रसन्न श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना एक नाम दिया।
 
  • हारे का सहारा | Haare Ka Saahara जब व्यक्ति अपनी लाइफ में हर जगह से ठोकर खाने के हताश और निराश हो जाता है और बाबा श्याम की भक्ति में लीन हो जाता है तो उसके सारे दु:ख और पाप खुद नष्ट हो जाते हैं और उनके ऊपर बाबा श्याम की कृपा बरसती है।

खाटू श्याम के 11 नाम का महत्व

  • खाटू नरेश | Khatu Naresh बाबा श्याम को खाटू नरेश के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि वह राजस्थान में सीकर जिले के खाटू नगर में विराजमान है और भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें श्याम नाम की उपाधि मिली हुई है इसी कारण से उन्हें खाटू श्याम या खाटू नरेश के नाम से भी जानते हैं।
 
  • मोरछड़ी धारक | Morchadi Dharak बाबा श्याम को भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद मिला हुआ है और भगवान श्री कृष्ण की प्रिय वस्तु मोर पंख और बांसुरी है बाबा श्याम को मोरछड़ी रखने के कारण उन्हें मोरछड़ी धारक भी कहा जाता है
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लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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