
12 ज्योतिर्लिंग - सावन में जानिए देश में कहां-कहां हैं दिव्य शिवलिंग

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पूजा
12 ज्योतिर्लिंग - सावन में जानिए देश में कहां-कहां हैं दिव्य शिवलिंग
ज्योतिर्लिंग दिव्य स्थान है। जहां भगवान शिव अपनी पूरी ऊर्जा से रहते हैं। पुराणों के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग है। ये सभी ज्योतिर्लिंग हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक फैले हुए हैं। सावन के इस महापर्व पर चलिए करते हैं 12 ज्योतिर्लिंग की विशेष यात्रा
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
जगह:गुजरात
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग,गुजरात प्रभास-क्षेत्र में स्थित है। यह पहला ज्योतिर्लिंग। इस ज्योतिर्लिंग के बनने के पीछे एक कहानी है। भगवान ब्रह्मा के पुत्र प्रजापति दक्ष की 27 बेटियाँ थीं, जिन्होंने चंद्रमा से विवाह किया था। चंद्रमा उन सभी में से सबसे सुंदर पुत्री रोहिणी पर ध्यान दे रहा था। प्रजापति दक्ष ने जब चंद्रमा को अपनी अन्य पुत्रियों के प्रति स्नेहहीन देखा तो क्रोधित होकर उन्हें श्राप दे दिया कि उनका तेज और सौंदर्य, जिस पर उन्हें इतना गर्व है, नष्ट हो जाएगा। इसलिए उस श्राप को दूर करने के लिए चंद्रमा ने इस स्थान पर लंबे समय तक भगवान शिव की पूजा की और उनसे श्राप दूर करने के लिए कहा। भगवान शिव ने श्राप तो दूर नहीं किया, लेकिन जीवन का वरदान जरूर दिया।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
देवता: नागेश्वर
यह ज्योतिर्लिंग द्वारका के पास स्थित है। द्वारका भगवान कृष्ण की कर्मभूमि रही है। यहां भगवान शिव की 25 मीटर ऊंची मूर्ति, बगीचे का नज़ारा देखने आते हैं। यहाँ इस मंदिर में भगवान शिव नागेश्वर के रूप में और माता पार्वती नागेश्वरी के रूप में स्थित है। दारूका नाम के राक्षस को मारने के लिए यहां भगवान प्रकट हुए थे।
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
जगह - पुणे
भगवान शिव का यह मंदिर जहाँ वे भीमाशंकर के रूप में विराजमान हैं। यह भीमा नदी के तट पर स्थित है। कहते हैं इस खूबसूरत मंदिर का निर्माण भीम ने करवाया था जो कुंभकर्ण का पुत्र था। इस जगह की सबसे अच्छी बात यह है कि यह भगवान शिव और माँ पार्वती के बीच के बंधन को दर्शाता है क्योंकि इस मंदिर के पास ही एक पार्वती मंदिर है। हालांकि कुछ मान्यताओं के अनुसार कामरूप कामाख्या के पास भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग है।
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
स्थान: नासिक
यह मंदिर ब्रह्मगिरी पर्वत पर स्थित है जो गोदावरी नदी के उद्गम स्थल पर है। इसे गौतमी गंगा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि गौतमी ऋषि ने भगवान शिव से यहीं रहने की प्रार्थना की थी। उसके बाद भगवान शिव त्र्यंबकेश्वर के रूप में यहीं निवास करते हैं। आप इस दिव्य मंदिर के अंदर तीन पिंडी देख सकते हैं जो ब्रह्मांड के तीन प्रमुख देवता भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के प्रतिरूप है।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग
स्थान: औरंगाबाद
यह दिव्य मंदिर अजंता गुफाओं और एलोरा गुफाओं के पास स्थित है। इस मंदिर में आपको जो सबसे अच्छी चीजें देखने को मिलेंगी, उनमें से एक यह है कि मंदिर की वास्तुकला कितनी विशाल और प्रभावशाली है। लाल पत्थर के इस मंदिर की संरचना में कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हैं। घुष्मा नाम की अपनी भक्त को दर्शन देने के लिए भगवान यहां प्रकट हुए थे।
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
स्थान- देवघर
झारखंड में स्थित इस दिव्य मंदिर के पीछे एक रोचक कहानी है। यहां आत्मलिंग है। कहते हैं भगवान शिव ने यह आत्मलिंग रावण को स्वयं दिया था, लेकिन रास्तें रावण ने इसे यहां रख दिया और यह इसी जगह पर स्थापित हो गया।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
जगह:मध्य प्रदेश
महाकालेश्वर में भगवान शिव काल के देवता है। यह एक मात्र ज्योतिर्लिंग है, जो दक्षिणमुखी है। यहां भगवान की भस्माआरती सबसे प्रसिद्ध है। भगवान यहां समय के देवता के रूप में प्रतिष्ठित है। एक छोटे बच्चे की भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव यहां प्रकट हुए थे।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
जगह:मध्य प्रदेश
ओंकारेश्वर नर्मदा के बीच एक टापू पर स्थित है। कहते हैं इस टापू की आकृति ओंकार के स्वरूप में है। राजा मांधता की भक्ति से प्रसन्न महादेव यहां प्रकट हुए थे। यहां ओंकारेश्वर के साथ ममलेश्वर के दर्शन करने से ही ज्योतिर्लिंग दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है।
काशी विश्वनाथ
जगह - उत्तरप्रदेश।
भक्तों का मानना है कि यह पहला ज्योतिर्लिंग है जहाँ भगवान का प्रभाव अनुभव किया गया था। मान्यता है कि जब भगवान कैलाश में नहीं होते हैं, तो वे काशी में होते हैं। इस विशेष मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहाँ भगवान आपको आशीर्वाद देते हैं, ताकि आपको खुशी और मुक्ति मिल सकें।
केदारनाथ
जगह:उत्तराखंड
हिमालय पर्वतमाला में 12000 फीट की ऊंचाई पर भगवान केदारनाथ का यह अद्भुत मंदिर है। यह तीर्थस्थल भी 4 धामों में से एक है। कहते हैं पांडवों ने भगवान शिव के इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
रामेश्वरम
जगह- तमिलनाड़ु
मान्यता है कि यह मंदिर भगवान राम के समय का है। भगवान राम ने यहां शिवलिंग की स्थापना करके अपने आराध्य भगवान शिव की पूजा की थी। कहते हैं यहां से भगवान का आशीर्वाद लेकर ही राम ने लंका पर युद्ध के लिए चढ़ाई की थी।
मल्लिकार्जुन
स्थान: आंध्र प्रदेश
देवता: शिव, पार्वती, और भ्रामराम्बा
आंध्र प्रदेश राज्य में श्री शैल पर्वत की चोटी पर भगवान शिव का यह दिव्य मंदिर स्थित है। भगवान शिव और माता पार्वती यहां अपने पुत्र कार्तिकेय को मनाने आए थे। यहां शिव अर्जुन और माता पार्वती मल्लिका के रूप में विराजमान है। इसी स्थान पर शक्तिपीठ भ्रमराम्बिका स्थित है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।