12 तरह के होते हैं कुंडली में कालसर्प दोष? जानिए कुछ खास बातें

12 तरह के होते हैं कुंडली में कालसर्प दोष? जानिए कुछ खास बातें

12 तरह के होते हैं कुंडली में कालसर्प दोष? जानिए कुछ खास बातें

क्या आपको लगता है कि आपके जीवन में लगातार मुश्किलें आ रही हैं, जिनका कोई खास कारण नहीं मिल रहा? तो हो सकता है कि आपकी कुंडली में काल सर्प दोष" (Kaal Sarpa Dosha)हों। जिसके बारे आपको पता ही नहीं हो। कुंडली में कालसर्प दोष तब बनता है, जब सभी ग्रह राहु से केतु के बीच आ जाते हैं। इसके प्रभाव से जीवन के विभिन्न पहलुओं में परेशानियां आ सकती हैं। यह परेशानियां कॅरियर, व्यापार में नुकसान, स्वास्थ्य कुछ भी हो सकती है। हालांकि दोष के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। कालसर्प दोष कई प्रकार के होते हैं, जानते हैं इन दोषों के नाम और उनके प्रकार के बारे में -

काल सर्प दोष का प्रकार

1. अनंत कालसर्प दोष

अनंत कालसर्प दोष जातक की कुंडली में तब बनता है, जब कुंडली के प्रथम भाव में राहु और सप्तम भाव में केतु मौजूद होता है। जब जातक की कुंडली में यह दोष होता है, तो उसे सफलता पाने के लिए अधिक समय तक संघर्ष करना पड़ता है। हालांकि आप सफल होने के लिए बहुत मेहनत करोगे। परिणाम आपको देर से ही मिलेगा। अनंत कालसर्प दोष आपको लगातार बाधाओं और चुनौतियों से परिचित कराकर आपके धैर्य की परीक्षा लेगा। इस दोष के कारण व्यक्ति को अपने जीवन के सभी पहलुओं में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

2. कुलिक कालसर्प दोष

जातक की कुंडली के दूसरे भाव में राहु और आठवें भाव में केतु होने पर कुलिक कालसर्प दोष बनता है। ऐसा माना जाता है कि यह दोष जातक के जीवन में आर्थिक नुकसान, कर्ज और कई अन्य बाधाएं लाता है। यदि आप किसी व्यवसाय में हैं, तो उसे पूरी ईमानदारी से करें। जब वैवाहिक जीवन की बात आती है, तो कुलिक दोष जातक के जीवन में परेशानी लाता है। अक्सर इस दोष के कारण ससुराल पक्ष के लोगों से नहीं बनती है।

3. वासुकि कालसर्प दोष

वासुकि कालसर्प दोष तब बनता है, जब जातक की कुंडली में राहु तीसरे भाव में होता है और केतु नवें स्थान पर विराजमान होता है। यह दोष न केवल जातक के जीवन में बाधा डालता है बल्कि उनसे संबंधित लोगों जैसे भाई-बहन, माता-पिता, जीवनसाथी आदि के जीवन में भी बाधा डालता है। इस दोष के कारण परिवार में अशांति का माहौल बन सकता है। हालाँकि, अच्छी बात यह है कि व्यक्ति को आर्थिक सफलता मिलेगी, क्योंकि वह इसके लिए कड़ी मेहनत कर सकता है।

4. शंखपाल कालसर्प दोष

कुंडली के चौथे भाव में राहु और दसवें भाव में केतु के विराजमान होने पर व्यक्ति की कुंडली में शंखपाल कालसर्प दोष बनता है। कुंडली में इस योग का बनना जातक के जीवन में आने वाली आर्थिक तंगी, बीमारी और अव्यवस्था का संकेत है। यह प्यार, बच्चे की शिक्षा आदि जैसे तत्वों को बाधित कर सकता है। यदि आप युवा है, तो आपको को जीवन में सही चीज का चुनाव करने में मुश्किल होगी। इस दोष के कारण जातकों को प्रॉपर्टी से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसलिए इस तरह का कोई भी सौदा उचित जांच-परख कर ही करना चाहिए।

5. पद्म कालसर्प दोष

जब कुंडली के पंचम भाव में राहु और 11वें भाव में केतु हो, तो पद्म कालसर्प दोष बनता है। यह योग छात्रों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है, क्योंकि वे पढ़ाई में एकाग्रता खो सकते हैं और गलत कार्यों में लिप्त हो सकते हैं। इसलिए इस दौरान माता-पिता को अपने बच्चों पर नजर रखनी चाहिए। आपको यह भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि आप अपने बच्चे को शिक्षा के क्षेत्र में सही विकल्प चुनने में मदद करें। साथ ही यह दोष करियर की प्रगति में बाधा डाल सकता है। यदि आप नए अवसरों की तलाश में हैं, तो आपको अपने साथी से सलाह करने के बाद निर्णय लेना चाहिए।

6. महापद्म कालसर्प दोष

महापद्म कालसर्प दोष तब बनता है, जब राहु कुंडली के 6 वें भाव में हो और केतु 12 वें भाव में होता है। कालसर्प दोष के कारण जातक को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जब महापद्म कालसर्प दोष बनता हैं, तो व्यक्ति अपने सभी दुश्मनों पर आसानी से जीत हासिल कर लेता है। ज्ञान में वृद्धि और जीवन में कुछ सार्थक और बड़ा करने के लिए यह अवधि उत्तम है। हालांकि बिजनेस में कई बार धोखे भी मिल जाते हैं।

7. तक्षक कालसर्प दोष

तक्षक कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली के सातवें भाव में राहु और लग्न या पहले भाव में केतु होता है। यदि जातक की कुंडली में यह दोष होता है, तो उसे विवाह में देरी का सामना करना पड़ सकता है। शादी में देरी आपके माता-पिता के लिए भी तनाव का कारण बन सकता है। अगर आप विवाहित हैं, तो ससुराल पक्ष के कारण परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं जब आप तलाक के बारे में सोच सकते हैं। इसके अलावा, तक्षक कालसर्प दोष के कारण प्रेम विवाह पर विचार नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से शादी के बाद प्यार में बाधा आ सकती हैं।

8. कर्कोटक कालसर्प दोष

कर्कोटक कालसर्प दोष तब बनता है जब जातक की कुंडली के दूसरे भाव में केतु और आठवें भाव में राहु होता है। कर्कोटक कालसर्प दोष धन प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी है। इस दोष के कारण करियर की प्रगति में बाधा आ सकती है, क्योंकि आपको नौकरी और पदोन्नति पाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं। कर्कोटक कालसर्प दोष के कारण जातक को सच बोलने की आदत हो जाती है। यह एक अच्छी बात है। लेकिन यह आदत जातक को अपने लिए अच्छे अवसर हासिल करने से रोक सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको सच नहीं बोलना चाहिए। लेकिन किसी से भी बात करने से पहले आपको सोच विचार जरूर करना चाहिए।

9. शंखचूड़ कालसर्प दोष

शंखचूड़ कालसर्प दोष तब बनता है, जब राहु छठे भाव में होता है और केतु कुंडली के बारहवें भाव में होता है। इस दोष की अच्छी बात यह है कि इस दोष के कारण जातक की सभी मनोकामनाएं आमतौर पर पूरी होती हैं। हालाँकि, इच्छाओं की पूर्ति में देरी हो सकती है, जो आपको निराश कर सकती है। शंखचूड़ कालसर्प दोष से जातक के परिवार और घर में अधिक कष्ट हो सकता है।

10. घातक कालसर्प दोष

कुंडली में घातक कालसर्प दोष तब बनता है, जब राहु दसवें भाव में और केतु जातक की कुंडली के चौथे भाव में बैठता है। जब आपकी कुंडली में यह दोष होता है, तो आपको अपनी मां की सेवा और अधिक देखभाल करनी चाहिए। यह आपके जीवन की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करेगा। हालाँकि, इस दौरान आपको अपनी मां से उस प्रकार का स्नेह नहीं मिलेगा, जिसकी आप इच्छा रखते है। घातक कालसर्प दोष के कारण व्यक्ति अभिमानी हो जाता है। आपका अहंकार आपके व्यक्तिगत बल्कि आपके पेशेवर संबंधों में भी बाधा डाल सकता है।

11. विषधर कालसर्प दोष

विषधर कालसर्प दोष तब बनता है, जब राहु ग्रह 11वें भाव में हो और केतु 5वें भाव में बैठा होता है। यह दोष शिक्षा विशेषकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले के लिए घातक हो सकता है। इसके कारण जातक को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में काफी बाधाएं आती हैं। हालांकि, तमाम बाधाओं के बावजूद उनका धैर्य और प्रतिबद्धता उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं। यदि वे अपने देश के बजाय विदेश से अपना करियर बनाते हैं, तो ये लोग अपने पेशेवर जीवन में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

12. शेषनाग कालसर्प दोष

शेषनाग कालसर्प दोष तब बनता है, जब कुंडली के बारहवें भाव में राहु और छठे भाव में केतु ग्रह विराजमान होता है। शेषनाग कालसर्प दोष के कारण लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हालांकि, इसमें थोड़ी देरी हो सकती हैं। इस दोष की उपस्थिति में जातक को अपनी आय से अधिक खर्च करने की आदत हो सकती है। यही कारण है कि जातक पर अधिक ऋण हो सकता है। 42 वर्ष की आयु के बाद जातक के जीवन में एक समय ऐसा आता है, जब वे समाज में स्वयं को प्रतिष्ठित स्थान पर पाता हैं। हालाँकि, इसके लिए आपको निरंतर कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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