बगलामुखी जयंती - आठवीं महाविद्या से पाएं समस्त आशीर्वाद

बगलामुखी जयंती - आठवीं महाविद्या से पाएं समस्त आशीर्वाद

बगलामुखी जयंती - आठवीं महाविद्या से पाएं समस्त आशीर्वाद

माता बगलामुखी आठवीं महाविद्या हैं। वे दस महाविद्याओं में आठवीं हैं। माता को ब्रह्मास्त्र, पीतांबरा, विष्णुविनिता जैसे कई नामों से पुकारा जाता है। वैशाख शुक्ल अष्टमी को माता बगलामुखी की जयंती मनाई जाएगी। साल 2025 में माता बगलामुखी जयंती 5 मई 2025 को मनाई जाएगी। यह दिन माता बगलामुखी के भक्तों के लिए बेहद ही खास है। माता बगलामुखी स्तंभन की देवी हैं। वे शत्रुओं सहित आने वाली विपदा को तुरंत ही रोक देती हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार माता बगलामुखी सबसे पहले गुजरात के सौराष्ट्र में हरिद्रा सरोवर में प्रकट हुई थीं। हरिद्रा सरोवर से इनकी उत्पत्ति होने के कारण माता को पीतांबरा भी कहा गया। एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार पूरी दुनिया में भयानक तूफान आया। इस तफूान से ब्रह्मांड की रक्षा स्वयं विष्णु भी करने में असमर्थ हो गए। तब उन्होंने आदिशक्ति को पुकारा, तब मां पीतांबरा का रूप लेकर हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुई और तूफान को रोक दिया। तब मां को स्तंभन की देवी के रूप में भी पूजा गया।

बगलामुखी जयंती पर जानें उनके नाम का अर्थ

कुछ तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार मां का नाम बगलामुखी की जगह वगलामुखी है। व शब्द का अर्थ है वारुणी, ग शब्द अर्थ है सिद्धि देने वाली और ला शब्द का अर्थ है पृथ्वी की संपत्ति। कुछ मान्यताओं के अनुसार मां के अनुपम सौंदर्य के कारण ही उन्हें यह दिव्य नाम प्राप्त है। अक्सर मां का चित्र किसी राक्षस की जीभ खींचते हुए बताया जाता है। कहते हैं माता शत्रुओं को तुरंत ही समाप्त कर देती है। सबसे पहले ब्रह्माजी ने माता की आराधना की थी।

वे ही त्रिपुरासुंदरी हैं

माता बगलामुखी ही त्रिपुरासुंदरी, काली, कमला, तारा और ललिता हैं। ये सभी दस महाविद्याओं की ही स्वरूप हैं। समुद्र के अंदर एक मणिद्वीप पर रत्नों से जड़े सिंहासन पर विराजती हैं। माता के तीन नेत्र हैं और माता सिर पर अर्धचंद्र धारण करती हैं। वे पीले रंग के वस्त्र पहनती हैं और पीले ही रंग के स्वर्ण आभूषणों से उनका श्रृंगार किया गया है। माता को हल्दी का रंग बेहद पसंद है और हल्दी के शु्द्ध उबटन से भी मां का श्रृंगार होता है। मां का रूप बेहद आकर्षक और तेज से भरा हुआ है। उन्होंने एक हाथ में खड्ग उठा रखा है। कई जगह पर मां को शव पर बैठे हुए दिखाया है।

बगलामुखी जयंती पर कैसे करें पूजा

बगलामुखी जयंती पर आप मां की पूजा करके दिव्य लाभ उठा सकते हैं। उनके मंदिर जाएं या घर पर उनके चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। इस दौरान माता का अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। माता के दिव्य मंत्रों का भी जाप किया जा सकता है। हालांकि कुछ मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी का मंत्र जाप गुरु आज्ञा से किया जाता है।

बगलामुखी पूजा के लाभ

माता बगलामुखी पूजा के अनंत लाभ है, जिनमें से कुछ इस प्रकार है।
  • आर्थिक उन्नति - माता बगलामुखी के भक्तों को लगातार आर्थिक उन्नति मिलती रहती है।
  • शत्रु नाश - मां बगलामुखी के भक्तों के शत्रु उनका कभी कुछ नहीं बिगाड़ पाते हैं।
  • ज्ञान - बगलामुखी भक्तों को ज्ञान प्रदान करती हैं, जिससे वाद-विवाद में कभी उनके भक्त हारते नहीं है।
  • भूत-प्रेत से बचाव - माता बगलामुखी की आराधना करने वाला व्यक्ति को कभी भी भूत-प्रेत परेशान नहीं करते हैं।
  • कुंडली दोष दूर - माता बगलामुखी अपने भक्तों की कुंडली से समस्त दोष दूर कर देती है और सभी ग्रह उन्हें अच्छे परिणाम देते हैं।

देश में केवल तीन मंदिर है प्रसिद्ध

  • नलखेड़ा मप्र- मां का सबसे सिद्ध पीठ नलखेड़ा मप्र में है। कहते हैं श्रीकृष्ण के कहने पर युद्धिष्ठर ने यहां युद्ध जीतने के लिए यज्ञ किया था। श्मशान में स्थित होने के कारण इस मंदिर की प्रसिद्धि और बढ़ गई है।
  • दतिया मप्र- दतिया में माता बगलामुखी का सिद्ध मंदिर है। यहां 1935 में मूर्ति स्थापित की गई थी। यह मंदिर पूरे देश में पीतांबरा पीठ के नाम से प्रसिद्ध है।
  • कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश- मात बगलामुखी का एक सिद्ध मंदिर कांगड़ा हिमाचल में है। यहां भगवान राम ने भी माता की पूजा की थी।

माता का मंत्र

- ह्लीं (Hleem) इन मंत्रों को किसी गुरु के मार्गदर्शन में ही जाप करना चाहिए। माता की सिद्ध पूजा और यज्ञ त्रिलोक ऐप के माध्यम से भी करवा सकते हैं। इस सर्व कार्य सिद्ध तंत्रोक्त महाबगला पूजा से शत्रुओं का नाश, कोर्ट केस में जीत, आर्थिक लाभ और यश और कुंडली के दोषों से बचाव होता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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