
कैसे करें बजरंग बाण का पाठ, क्या है उसके नियम

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पूजा
कैसे करें बजरंग बाण का पाठ, क्या है उसके नियम
भगवान हनुमानजी की पूजा में बजरंग बाण पाठ का विशेष महत्व है। किसी भी समस्या से निकलने के लिए बजरंग बाण एक रामबाण की तरह होता है। हनुमानजी तुरंत ही अपने भक्तों का भय और डर दूर कर देते हैं। व्यक्ति अपने भयों से मुक्ति पाने के लिए यदि बजरंग बाण का पाठ उचित विधि से करते हैं, तो उसका फल निश्चित ही जल्दी मिल जाता है। हम यहां बताने जा रहे हैं, बजरंग बाण का पाठ आप कैसे करें।
इस प्रकार से करें बजरंग बाण
बजरंग बाण का पाठ करने से पहले श्री गणेश की पूजा करें। इसके बाद भगवान श्रीराम का ध्यान करें। इसके बाद संकल्प लेकर पाठ करें। दरअसल इस पाठ में हनुमानजी को भगवान श्री राम की शपथ दिलाई गई है। कहते हैं कि श्री राम की शपथ के बाद हनुमानजी जरूर सभी की मदद करते हैं। कुछ इन पंक्तियों में है-
इन्हें मारु,तोहिं सपथ राम की। राखु नाथ मर्याद नाम की।
जनक सुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ विलम्ब न लावौ।
उठु उठु चलु तोहिं राम दोहाई। पाँय परौं कर जोरि मनाई।।
कुछ और नियम जिनका करना है पालन
- बजरंग बाण का पाठ सूर्योदय से पूर्व उठकर करना श्रेष्ठ रहता है। आप दक्षिण मुखी हनुमान के समीप इस पाठ को करें, इससे आपको ज्यादा लाभ होगा।
- लाल आसन या कुश के आसन का उपयोग करें।
- एक निश्चित संख्या में प्रतिदिन पाठ करें। जैसे 7, 11, 21, 51 आदि।
- 43 दिन लगातार बिना रूके बजरंग बाण का पाठ करना ही है।
- पाठ के बाद श्री राम जय राम जय जय राम मंत्र का जाप करें।
- पाठ के बाद हनुमानजी को लड्डू या किसी फल का भोग जरूर लगाएं।
- पूरे पाठ के दौरान सरसों या तिल के तेल का दीपक जरूर प्रज्वलित करें।
किन समस्याओं के लिए कर सकते हैं बजरंग बाण
- यदि आपका विवाह नहीं हो रहा है, या विवाह संबंधी कोई परेशानी आ रही है, तो आपको केले के पेड़ के पास बैठकर बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। इससे हनुमानजी का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
- ग्रह दोष समाप्ति के लिए शिव मंदिर में संकल्प लेकर बजरंग बाण का पाठ करें। इस दौरान आप उड़द के आटे का दीया जरूर प्रज्वलित करें।
- घर में वास्तु दोष दूर करने के लिए बजरंग बाण का रोज जोर से पाठ करना चाहिए।
- प्रति मंगलवार 9 बार बजरंगबाण पढ़ने से मांगलिक दोष का दुष्प्रभाव कम होता है।
- रात को बजरंगबाण का पाठ करने से डरावने सपने नहीं आते हैं।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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