बसंत पंचमी 2026 - शुभ मुहूर्त में करें माता सरस्वती की विशेष पूजा

बसंत पंचमी 2026 - शुभ मुहूर्त में करें माता सरस्वती की विशेष पूजा

बसंत पंचमी 2026 - शुभ मुहूर्त में करें माता सरस्वती की विशेष पूजा

Basant Panchami Shubh Muhurat 2026 - बसंत पंचमी 2026 का दिन कला और ज्ञान की देवी सरस्वतीजी को समर्पित माना जाता है। इस दिन माता सरस्वती की विशेष रूप से पूजा की जाती है। वहीं, इस बार बसंत पंचमी की तिथि बेहद खास रहने वाली है, क्योंकि इस शुभ अवसर पर चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होगा। चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु रहेंगे, जिसके चलते अबकी बार बेहद शुभ संयोग बन रहा है। आइए विस्तार से जानें कि बसंत पंचमी सरस्वती पूजा कब है, शुभ मुहूर्त और इस दिन कौन-सा योग बनेगा।

Basant Panchami 2026 Date

बसंत पंचमी 2026 की तिथि का बेहद खास महत्व होता है, जो ज्ञान और कला की देवी को समर्पित है। इस दिन सरस्वती माता की पूजा करने का विधान है। वहीं, इस बार बसंत पंचमी बेहद खास रहने वाली है क्योंकि, इस दिन चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होगा। साथ ही, चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु रहेंगे। ऐसे में बसंत पंचमी के दिन बेहद शुभ संयोग बन रहा है। यह तिथि छात्रों के लिए भी उत्तम संयोग बना रही है। इस त्योहार के साथ ही बसंत ऋतु का आगमन भी माना जाता है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं कि बसंत पंचमी सरस्वती पूजा कब है, शुभ मुहूर्त और इस दिन कौन-सा योग बन रहा है।

बसंत पंचमी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी, गुरुवार के दिन रात में 2 बजकर 29 मिनट से होगी और इसका समापन 23 जनवरी, शुक्रवार को रात में 1 बजकर 47 मिनट पर होगा। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार, बसंत पंचमी 23 तारीख को मनाई जाएगी और इसी दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाएगी। ऐसा करने से जातक के ज्ञान, कला और बुद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही, माता सरस्वती की कृपा प्राप्त हो सकती है।

बसंत पंचमी 2026 का शुभ संयोग

23 जनवरी, शुक्रवार के दिन यानी बसंत पंचमी पर चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होने जा रहा है। वहीं, चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग बन रहा है। ज्ञान के कारक गुरु की राशि में बैठकर चंद्रमा का गजकेसरी योग बनाना अत्यंत शुभ है। यह छात्रों के लिए उत्तम संयोग बना रहा है। बसंत पंचमी पर सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर 11 बजकर 13 मिनट का समय शिक्षा आरंभ के लिए सबसे उत्तम रहेगा।

सरस्वती पूजा 2026 शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने के लिए सुबह 9 बजकर 53 मिनट से लेकर 11 बजकर 13 मिनट तक का समय सबसे उत्तम रहेगा। इस दिन लोग अपने घर, कॉलेज, स्कूल और कार्यस्थल पर देवी सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करते हैं। साथ ही, माता से ज्ञान प्राप्ति की कामना करते हैं। पूजा के दौरान देवी सरस्वती को सिंदूर, श्रृंगार आदि की वस्तुएं भी अर्पित की जाती हैं। और गुलाल चढ़ाया जाता है। इसी दिन से बसंत ऋतु को आरंभ हो जाता है। लाभ चौघड़िया : 8 बजकर 33 मिनट से लेकर 9 बजकर 53 मिनट तक। अमृत चौघड़िया : 9 बजकर 53 मिनट से लेकर 11 बजकर 53 मिनट तक।

बसंत पंचमी 2026 पर माता सरस्वती के विशेष मंत्र

प्रमुख सरस्वती मंत्र

सरस्वती मूल/बीज मंत्र (ज्ञान और वाणी के लिए): ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः अर्थ: देवी सरस्वती को नमस्कार, जो ज्ञान की देवी हैं। यह मंत्र एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाता है। सरस्वती गायत्री मंत्र (संपूर्ण ज्ञान के लिए): ॐ सरस्वत्यै विद्महे, ब्रह्मपुत्रायै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्। अर्थ: हम सरस्वती को जानते हैं, जो ब्रह्मा की पुत्री हैं। उन्हें नमस्कार, वही हमें ज्ञान प्रदान करें। सरस्वती वंदना (विद्यार्थियों के लिए): या कुंदेंदु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता। या वीणावर दण्डमंडितकरा, या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभि देव सदा वंदिता। सा मां पातु सरस्वती भगवते निशेष जाड्यापहा॥ अर्थ: जो कुंद पुष्प, चंद्रमा और हिम के समान श्वेत हैं, जो शुभ्र वस्त्रों से सुशोभित हैं, जिनके हाथों में वीणा का दण्ड सुशोभित है और जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित सभी देवताओं द्वारा पूजनीय हैं, वह भगवती सरस्वती मेरे सभी अज्ञान को दूर करें।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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