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पुराणों का हिंदू धर्म में बहुत ही विशेष महत्व है। पुराणों में 18 पुराणों का महत्व माना जाता है। इनमें भी मार्केण्डेय पुराण का बड़ा महत्व है। माता दुर्गा को प्रिय लगने वाला सप्तशती पाठ मार्कण्डेय पुराण का ही हिस्सा है। जैसा कि नाम है इसमें 700 श्लोक दिए गए हैं और मां के विशेष रूपों का वर्णन किया गया है। कहते हैं दुर्गासप्तशती पाठ करने से समस्त मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। सभी प्रकार के दैहिक, वैदिक और भौतिक लाभों की प्राप्ति होती है। इससे व्यक्ति के जीवन से मारक दशाएं भी खत्म हो जाती है । दुर्गासप्तशती पाठ करने के कई नियम है।
आमतौर पर इतना बड़ा पाठ करना सबके लिए संभव नहीं हो पाता है, इसलिए कई लोग दुर्गासप्तशती के विशेष अध्यायों का पाठ भी करते हैं।
रुद्रयामल तंत्र के अनुसार सिद्ध कुंजिका स्तोत्र पढ़ने से भी दुर्गासप्तशती के पाठ का लाभ मिल जाता है। हालांकि कई जगह पर लिखा गया है कि दुर्गासप्तशती पाठ के केवल चौथे पाठ को पढ़ने से भी संपूर्ण दुर्गासप्तशती के पाठ का लाभ मिल जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि चौथा अध्याय पढ़ने से भी माता के दर्शनों का सौभाग्य मिल जाता है। इससे जीवन की कई परेशानियां खत्म हो जाती है। यदि आप केवल कुंजिका स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो कम से कम 108 पाठ करके माता के लिए हवन भी करें। माता को हवन के बाद खीर, हलवा आदि का भोग भी लगाएं।
प्रथम अध्याय – दुर्गा सप्तशती का पहला अध्याय पढ़ने से सभी प्रकार की चिंताएं दूर होती हैं।
द्वितीय अध्याय – दुर्गा सप्तशती का दूसरा अध्याय पढ़ने से शत्रु-बाधा दूर होती है। कोर्ट कचहरी में लाभ मिलता है।
तृतीय अध्याय – सप्तशती का तीसरा अध्याय पढ़ने से विरोधी समाप्त हो जाते हैं।
चतुर्थ अध्याय – चौथा अध्याय का पाठ करने से मां दुर्गा के दर्शनों का सौभाग्य मिलता है।
पंचम अध्याय – पांचवा अध्याय करने से मनोकामना पूरी होती है।
षष्ठ अध्याय – छठा अध्याय का पाठ करने से दु:ख, दारिद्रय, भय आदि दूर होता है।
सप्तम अध्याय – सातवें अध्याय करने से सौभाग्य मिलता है और कार्यों की सिद्धि होती है।
अष्टम अध्याय – दुर्गासप्तशती का आठवां अध्याय आपके जीवन को प्रेम और मित्रता से परिपूर्ण कर देता है।
नवम अध्याय – नवां अध्याय संतान की उन्नति होती है। साथ ही आपके जीवन से कई समस्याएं समाप्त होती है।
दशम अध्याय – दसवां अध्यान करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है और धन-धान्य बढ़ता है।
एकादश अध्याय –ग्यारहवां अध्याय समस्त भौतिक सुख प्राप्त होते हैं।
द्वादश अध्याय – बारहवें अध्याय समस्त लाभ दिलाने वाला माना जाता है।
त्रयोदश अध्याय – तेरहवां अध्याय मोक्ष प्रदाता है।
