उद्देश्य: यह चालीसा काल भैरव भगवान को समर्पित 40 पवित्र चौपाइयों का संग्रह है। भैरव जी भय को दूर करने वाले, धर्म के रक्षक और नकारात्मकता से सुरक्षा प्रदान करने वाले देवता हैं। श्रद्धा से इसका पाठ करने पर जीवन में साहस, स्पष्टता और कृपा प्राप्त होती है।
प्रारंभिक दोहा (आवाहन)
नमन करूं उस काल के स्वामी को, जो क्रोधी रूप में भी दयालु हैं।
हे काल भैरव, मेरे हृदय में विराजो, भय मिटाओ और शुभ फल दो।
भैरव चालीसा — ४० चौपाइयां
- १. जय जय श्री भैरव भय हरन, भक्तों के जीवन के पथ तरन।
- २. शिव के क्रोध से उत्पन्न भैरव, करुणा सागर, सत्य के धैरव।
- ३. काशी के कोतवाल कहलाए, भक्त जनों के रक्षक बन जाए।
- ४. त्रिशूल, डमरू हाथ सजाए, भय और भ्रम सब दूर भगाए।
- ५. अग्नि-से नेत्र, करुणा स्वरूपा, अज्ञान मिटा दे प्रभु रूपा।
- ६. सिर पर चंद्र, जटा विराजे, काल से भी आप ही बाजे।
- ७. धर्म के श्वान साथ तुम्हारे, करते रक्षा दीन तुम्हारे।
- ८. रौद्र रूप में भी सुखदाता, हरते दुख सब जीव त्राता।
- ९. योगी मार्ग तुम्ही बतावे, मृत को जीवन फिर दिलवावे।
- १०. विष पी लिया सबका पाप, कृपा से होता सत्य प्रताप।
- ११. न्यायप्रिय, दयालु रूप, करते पथ से भय का रूप।
- १२. नाम तुम्हारा सब भय हरता, मन में शांति का दीप धरता।
- १३. चौराहों में दीप जलाते, राह सदा शुभ दिखलाते।
- १४. हँसी तुम्हारी माया तोड़े, सत्य तुम्हारा मन में छोड़े।
- १५. भक्त व्रत जो सच्चे रखता, तुम रक्षा कर संग चलते।
- १६. भूत-पिशाच और विघ्न हारे, भैरव नाम सब संकट टाले।
- १७. भयभीत मन को बल मिल जाता, नाम तुम्हारा साहस लाता।
- १८. राई के तेल का दीप जलाऊँ, भैरव प्रभु तुझे मनाऊँ।
- १९. काले तिल, लौंग चढ़ाऊँ, सच्चे प्रेम से तुझे बुलाऊँ।
- २०. समय सही, द्वार खुले सारे, कृपा तुम्हारी सब दुःख टारे।
- २१. व्यापारी, कर्मी, सब पाएँ, न्याय और लाभ तुम्हीं दिलाएँ।
- २२. कानूनी संकट जब हो भारी, भैरव कृपा से जीतें प्यारी।
- २३. यात्रा में जो नाम ध्यावे, भय बिना पथ सुगम बनावे।
- २४. ईर्ष्या-द्वेष जो मन में आए, नाम तुम्हारा उसे मिटाए।
- २५. डगमग मन स्थिर हो जाए, भैरव ध्यान मन को भाए।
- २६. विवेक, संयम सिखलाते, सच्चे मार्ग पर चलवाते।
- २७. पुराने पाप तुम्हीं मिटाते, मन को निर्मल कर जाते।
- २८. व्यर्थ कर्म से छुड़वाते, सच्चे श्रम का फल दिलवाते।
- २९. घर में सुख और धर्म बसाते, दीन जनों को गले लगाते।
- ३०. विद्यार्थी मन लगन लगाएँ, भैरव कृपा से ज्ञान पाएँ।
- ३१. साधक, चिकित्सक, ज्ञानी सब, तुमसे पाते प्रेरणादायक प्रभव।
- ३२. दांपत्य जीवन सुखमय होता, जब भैरव स्मरण प्रतिदिन होता।
- ३३. अहंकार का गर्व मिटाओ, शिव नाम का वर दिलवाओ।
- ३४. चौसठ योगिनियाँ संग नाचें, अज्ञान की परतें भेद रचें।
- ३५. चरणों में जो शरण मिलाए, जन्म-जन्म का दुख मिटाए।
- ३६. अष्ट सिद्धि, नव निधि देता, सच्चे कर्मी का मन हर लेता।
- ३७. सेवा, दान जो कर पाए, भैरव कृपा से पुण्य बढ़ाए।
- ३८. काशी के कोतवाल महान, कर कृपा रखो मेरी जान।
- ३९. वाणी में सत्व, कर्म में सत्य, मन में हो केवल पवित्र भव्य।
- ४०. सांस-सांस में भैरव नाम, मृत्यु पर भी हो जय जय धाम।
समापन दोहा (पाठ का फल)
जो पढ़े श्रद्धा से चालीसा यह, सच्चे मन और भाव के साथ।
भैरव कृपा सदा संग रहती, भय न आता जीवन के पथ।
भैरव चालीसा पाठ के लाभ
- भय, शत्रु और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा।
- साहस, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
- कानूनी, आर्थिक और व्यापारिक मामलों में सफलता।
- यात्रा में सुरक्षा और बुरी नजर से रक्षा।
- विद्यार्थियों को ध्यान, स्मरण शक्ति और सफलता प्राप्त होती है।
- घर में सुख-शांति और वैवाहिक सौहार्द बना रहता है।
सरल विधि (दैनिक या साप्ताहिक पाठ के लिए)
- दिन व समय: रविवार या मंगलवार, सूर्योदय या सूर्यास्त के बाद। अष्टमी तिथि विशेष फलदायी है।
- वेदिका: पूर्व या दक्षिण दिशा में काल भैरव जी की मूर्ति या चित्र रखें।
- दीप व भोग: सरसों के तेल का दीप जलाएं। काले तिल, लौंग, उड़द दाल और जल अर्पित करें।
- धूप: कपूर या हल्की सुगंध वाली अगरबत्ती जलाएं।
- पाठ क्रम: प्रारंभिक दोहा, 40 चौपाइयाँ और समापन दोहा पढ़ें। मन स्थिर रखें।
- जप: “ॐ कालभैरवाय नमः” का 11 या 21 बार रुद्राक्ष माला पर जप करें।
- सेवा: पाठ के बाद काले कुत्ते या किसी भूखे पशु को भोजन कराएं।
संकल्प एवं पालन
- संकल्प: अपना नाम, उद्देश्य और पाठ की अवधि (जैसे 11, 21 या 40 दिन) बताएं।
- पवित्रता: स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें, सत्य वाणी रखें।
- आहार: सात्विक भोजन करें, नशा और क्रोध से बचें।
- नियम: एक ही समय पर प्रतिदिन पाठ करें और दीप अवश्य जलाएं।
भैरव मंत्र
बीज मंत्र: “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः भैरवाय नमः”
सरल मंत्र: “ॐ कालभैरवाय नमः”
श्वास मंत्र: श्वास लेते समय “ॐ”, छोड़ते समय “भैरव” का स्मरण करें।
उपाय
- मंगलवार या रविवार को सरसों तेल का दीपक जलाएं, भय दूर होता है।
- काले तिल और जल अर्पण करें, कर्मबाधाएँ दूर होती हैं।
- कुत्ते को रोटी खिलाएँ, यात्रा और मार्ग-सुरक्षा मिलती है।
- लोहे की चाबी पूजा स्थान पर रखें — शुभ द्वार खुलते हैं।
क्या करें और क्या न करें
- करें: विनम्रता रखें, सत्य कर्म करें, आभार व्यक्त करें।
- करें: पूजा स्थल स्वच्छ रखें और पाठ के बाद ध्यान करें।
- न करें: क्रोध, अपशब्द या हानि की भावना से पूजा न करें।
- न करें: पाठ करते समय नशा या अपवित्र आचरण न करें।
समापन प्रार्थना
हे काल भैरव, धर्म के रक्षक और निर्भयता के दाता,
मेरे जीवन को मार्गदर्शन दो, मेरे कर्मों को पवित्र बनाओ,
और मुझे सद्मार्ग पर स्थिर रखो।