चैत्र नवरात्रि 2025 - घटस्थापना मुहूर्त, तारीख और मां दुर्गा के मंत्र

चैत्र नवरात्रि 2025 - घटस्थापना मुहूर्त, तारीख और मां दुर्गा के मंत्र

चैत्र नवरात्रि 2025 - घटस्थापना मुहूर्त, तारीख और मां दुर्गा के मंत्र

चैत्र नवरात्रि 2025 (chaitra navratri 2025) घटस्थापना मुहूर्त 30 मार्च 2025 रविवार, को 05:53 ए एम से 06:43 ए एम तक है। एक वर्ष में चार नवरात्रि चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ मास में आती है, जो शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलते हैं। इनमें चैत्र और आश्विन नवरा‍त्र प्रमुख माने जाते हैं। इसमें भी चैत्र नवरा‍त्र का काफी महत्व है, इसे वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है। यह चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिप्रदा से शुरू होता है। यह भगवान श्री राम के जन्मोत्सव से जुड़ा महीना है। इस साल यानी वर्ष 2025 में चैत्र नवरात्रि (chaitra navratri 2025) की शुरुआत 30 मार्च से होगी।

नवरात्रि (Chaitra navratri 2025)पर कलश स्थापना मुहूर्त

नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री देवी की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक देवी दुर्गा का पूजन और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना से होती है। इस वर्ष कलश स्थापना का मुहूर्त 30 मार्च रविवार सुबह 05 बजकर 53 मिनट से लेकर 06 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। हालांकि इसके पश्चात अभिजित मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है जिसकी अवधि सुबह 11 बजकर 37 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक होगी।

Chaitra navratri 2025 कलश स्थापना विधि

कलश स्थापना के लिए शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त हो कर पूजा का संकल्प लिया जाता है। संकल्प लेने के पश्चात मिट्टी की वेदी बनाकर जौ बोया जाता है और इसी वेदी पर कलश की स्थापना की जाती है। घट के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर पूजन किया जाता है और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। इस दौरान अखंड दीप जलाने का भी विधान है। इन दिनों में मंत्र जाप करने से मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा की पूजा आरंभ की जाती है।

चैत्र नवरात्रि तिथि 2025

  • पहला नवरात्रि, पहली तिथि, 30 मार्च 2025, दिन रविवार - घटस्थापना – शैलपुत्री पूजा
  • दूसरा नवरात्रि, द्वितीया तिथि, 31 मार्च 2025, दिन सोमवार – ब्रह्मचारिणी पूजा
  • तीसरा नवरात्रि, तृतीया तिथि, 1 अप्रेल 2025, दिन मंगलवार – चन्द्रघन्टा पूजा
  • चौथा नवरात्रि, चतुर्थी तिथि, 2 अप्रेल 2025, दिन बुधवार – कुष्माण्डा पूजा
  • पांचवां नवरात्रि, पंचमी तिथि, 3 अप्रेल 2025, दिन गुरुवार – स्कन्दमाता पूजा
  • छठा नवरात्रि, षष्ठी तिथि, 4 अप्रेल 2025, दिन शुक्रवार – कात्यायनी पूजा
  • सातवां नवरात्रि, महासप्तमी तिथि , 5 अप्रेल 2025, दिन शनिवार – कालरात्रि पूजा
  • आठवां नवरात्रि, महाअष्टमी तिथि, 6 अप्रेल 2025, दिन रविवार – महागौरी पूजा (सन्धि पूजा)
  • नौवां नवरात्रि, रामनवमी तिथि, 7 अप्रेल 2025, दिन सोमवार - सिद्धिदात्री पूजा
  •  नवरात्रि पारण, दशमी, 8 अप्रेल 2025, दिन मंगलवार

चैत्र नवरात्रि 2025 में जाप करें मां दुर्गा के मंत्र

दुर्गा सप्तशती के पाठ से भक्तों की कई मनोकामनाएं पूरी हो जाती है, लेकिन यदि कोई भक्त पूरा पाठ नहीं कर सकते हैं, तो शास्त्रों में उनके लिए कई तरह के विधान है। मां दुर्गा के कई मंत्रों का जाप करके उनसे मनचाहा वरदान प्राप्त कर सकते हैं। चैत्र नवरात्रि 2025 पर ऐसे स्रोत एवं मंत्र हैं, जिनके विधिवत जाप से इच्छित मनोकामना की पूर्ति होती है।
  • अपने कल्याण के लिए – सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥
  • बाधा मुक्ति और धन प्राप्ति के लिए सप्तशती का यह मंत्र जपे- सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः। मनुष्यों मत्प्रसादेन भव‍िष्यंति न संशय॥
  • आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्ति के चमत्कारिक फल देने वाले मंत्र को स्वयं देवी दुर्गा ने देवताओं को दिया है-
  • देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम् रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
  • विपत्ति नाश के लिए- शरणागतर्द‍िनार्त परित्राण पारायणे। सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽतुते॥
  • रक्षा के लिए- शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च।।
  • स्वर्ग और मुक्ति के लिए- सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हदि संस्थिते। स्वर्गापर्वदे देवि नारायणि नमोस्तु ते।।
  • विघ्ननाशक मंत्र- सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरी। एवमेव त्याया कार्य मस्माद्वैरि विनाशनम्
इन पवित्र मंत्रों को जपने के कोई खास नियम नहीं है, लेकिन जाप के दौरान शुद्धता रखना जरूरी है। इन मंत्रों को मां दुर्गा का नाम लेकर साल के किसी भी शुभ दिन अपनी इच्छा मां के सामने रखते हुए शुरू कर देना चाहिए। जप संख्या का कोई विधान नहीं है, लेकिन माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि 2025 में कम से कम 108 दिन बिना विघ्न के या रूके इन मंत्रों का जाप करना चाहिए।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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