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चालीसा
चामुंडा चालीसा का पाठ भय, नकारात्मक ऊर्जा और दुष्ट शक्तियों को नष्ट करता है। माँ चामुंडा, जो आदि शक्ति का उग्र रूप हैं, अपने भक्तों को असीम साहस, सुरक्षा और बल प्रदान करती हैं। नियमित पाठ से जीवन में सफलता, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
माँ चामुंडा देवी की कृपा से व्यक्ति को धन, बुद्धि, शक्ति और सुख प्राप्त होता है। उनकी आराधना से भय, रोग और संकट समाप्त होते हैं। जो भक्त प्रतिदिन चालीसा का पाठ करता है, उसे दुष्ट शक्तियों और अदृश्य बाधाओं से रक्षा मिलती है। माँ की कृपा से परिवार में सुख-शांति, सौभाग्य और समृद्धि आती है।
मान्यता है कि नवरात्रि या अष्टमी के दिन इस चालीसा का पाठ विशेष फल देता है। पाठ से पहले सरसों के तेल का दीपक जलाएं, लाल पुष्प और गुड़ अर्पित करें। जो व्यक्ति भय, ऋण या रोग से पीड़ित हैं, उन्हें यह पाठ अवश्य करना चाहिए। माँ चामुंडा का आशीर्वाद जीवन में अद्भुत परिवर्तन लाता है।
नीलवरण माँ कालिका, रहती सदा प्रचंड।
दस हाथों में शस्त्र धार, देती दुष्ट को दंड।।
मधु-कैटभ संहार कर, करी धर्म की जीत।
मेरी भी पीड़ा हरो, हो जो कर्म पुनीत।।
नमस्कार चामुंडा माता, तीनों लोक में विख्याता।
हिमालय में पवित्र धाम है, महाशक्ति तुमको प्रणाम है।।
मार्कंडेय ऋषि ने ध्यान लगाया, कैसे प्रकट बोध बताया।
शुंभ-निशुंभ दो दैत्य बलशाली, तीनों लोक जो कर दिए खाली।।
वायु, अग्नि या कुबेर संग, सूर्य, चंद्र, वरुण हुए तंग।
अपमानित चरणों में आये, गिरिराज हिमालय को लाये।।
भद्र-रौद्र नित्य ध्याया, चेतन शक्ति करके बुलाया।
क्रोधित होकर काली आई, जिसने अपनी लीला दिखलाई।।
चंड-मुंड और शुंभ पते, कामुक वैरी लड़ने आये।
पहले सुग्रीव दूत को मारा, भागा चंड भी मारा मारा।।
अर्बों सैनिक लेकर आया, धरुन लोकांघन क्रोध दिखाया।
जैसे ही दुष्ट ललकारा, "हूं" शब्द गूंजा के मारा।।
सेना ने मचाई भगदड़, फड़ सिंह ने आया जो बाद।
हत्या करने चंड-मुंड आये, मदिरा पीकर के घोर आये।।
चतुरंगी सेना संग लाये, ऊँचे ऊँचे शिविर गिराये।
तुमने क्रोधित रूप निकाला, प्रगटी डाल गले मुंड माला।।
चर्म की साड़ी चीते वाली, हड्डी ढांचा था बलशाली।
विकराल मुखी आँखें दिखाई, जिसे देख सृष्टि घबराई।।
चंड-मुंड ने चक्र चलाया, ले तलवार "हूं" शब्द गुंजाया।
पापियों का कर दिया निस्तारा, चंड-मुंड दोनों को मारा।।
हाथ में मस्तक ले मुस्काई, पापी सेना फिर घबराई।
सरस्वती माँ तुम्हें पुकारा, पड़ा चामुंडा नाम तुम्हारा।।
चंड-मुंड की मृत्यु सुनकर, कालक-मौर्य आये राज पर।
अरब खरब युद्ध के पथ पर, झोंक दिये सब चामुंडा पर।।
उग्र चंडिका प्रगटी आकर, गिद्धों की वादी भर कर।
काली खट्वांग घूंसों से मारा, ब्रह्मांड ने फेंकी जलधारा।।
महेश्वरी ने त्रिशूल चलाया, माँ वैष्णवी चक्रा घुमाया।
कार्तिकेय की शक्ति आई, नरसिंहाई दैत्यों पे छाई।।
चुन-चुन सिंह सभी को खाया, हर दानव घायल घबराया।
रक्तबीज माया फैलायी, शक्ति उसने नई दिखाई।।
रक्त गिरा जब धरती ऊपर, नया दैत्य प्रकट हुआ वहीं पर।
चंडी माँ अब शूल घुमाया, मारा उसको लहू चूसाया।।
शुंभ-निशुंभ अब दौड़े आये, सत्तर सेना भर कर लाये।
वज्रपात संग शूल चलाया, सभी देवता कुछ घबराये।।
ललकारा फिर घूंसो मारा, ले त्रिशूल किया निस्तारा।
शुंभ-निशुंभ धरती पर सोये, दैत्य सभी देखकर रोये।।
कौमुण्डा माँ धर्म बचाया, अपना शुभ मंदिर बनवाया।
सभी देवता आके मानते, हनुमत, भैरव चँवर दुलते।।
आश्विन, चैत्र नवरात्रे आओ, ध्वजा नारियल भेंट चढ़ाओ।।
इस चालीसा का पाठ मंगलवार, शुक्रवार या नवरात्रि में प्रारंभ करें। शांत मन से पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं, लाल फूल, गुड़ और सिंदूर अर्पित करें। पूरे श्रद्धा भाव से चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें व प्रसाद वितरित करें।
पाठ प्रारंभ करने से पहले संकल्प लें – “हे माँ चामुंडा, जो दुष्टों का संहार करती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं, मैं श्रद्धा भाव से आपका चालीसा पाठ कर रहा/रही हूँ। कृपा करके मेरे सभी दुख दूर करें, मुझे शक्ति, सफलता और दिव्य संरक्षण प्रदान करें।”
समापन: नियमित रूप से चामुंडा चालीसा का पाठ करने से आत्मा शुद्ध होती है और आत्मबल में वृद्धि होती है। माँ चामुंडा देवी अपने भक्तों को निडरता, ऊर्जा और जीवन में विजय का वरदान देती हैं। उनका आशीर्वाद अंधकार में प्रकाश का संचार करता है।
