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मंत्र
छठ पूजा भारत के पूर्वी राज्यों — बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के मिथिला क्षेत्र — में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाने वाला एक प्रमुख वैदिक पर्व है। यह पर्व भगवान सूर्य और छठी मइया को समर्पित है, जो ऊर्जा, पवित्रता और जीवन के स्रोत माने जाते हैं। चार दिनों तक चलने वाला यह व्रत आत्मशुद्धि, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। इस दौरान उदय और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है और सुख, समृद्धि व स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
छठ पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से सूर्य देव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। ये मंत्र मानसिक शांति, शक्ति और आत्मबल प्रदान करते हैं।
1. मुख्य छठ पूजा मंत्र
ॐ एहि सूर्य देव सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते,
अनुकम्पया माम् भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर।
अर्थ: हे सहस्र किरणों वाले तेजस्वी सूर्य देव! आप समस्त जगत के स्वामी हैं। कृपया मेरी भक्ति से अर्पित अर्घ्य को स्वीकार करें।
2. सूर्य नमस्कार मंत्र
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ आदित्याय नमः।
ॐ नमो भास्कराय नमः।
ॐ घृणिं सूर्यः आदित्यः।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणाय मनोरथं फलं देहि देहि स्वाहा।
अर्थ: हे सूर्य देव! आपको नमस्कार। आप समस्त जीवन के दाता और प्रकाश के स्रोत हैं। कृपया हमारे मनोवांछित फल प्रदान करें।
छठ पर्व चार दिनों तक चलता है। हर दिन की अपनी विशेष विधि और धार्मिक महत्ता होती है:
पहले दिन व्रती लोग नदियों या तालाबों में स्नान करते हैं और घर की पूरी सफाई करते हैं। पूजा के लिए जल लाया जाता है। इसी जल से शुद्ध भोजन — जैसे कद्दू-भात (कद्दू की सब्जी और चावल) — बनाया जाता है। इस दिन केवल एक बार भोजन किया जाता है, जो शरीर और आत्मा की शुद्धि का प्रतीक है।
दूसरे दिन व्रती सुबह से शाम तक निर्जला उपवास रखते हैं। सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर और घी की रोटी बनाकर छठी मइया को भोग लगाया जाता है। इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और अगले 36 घंटे तक बिना पानी के व्रत करते हैं।
तीसरे दिन ठेकुआ, कचवनिया और अन्य प्रसाद तैयार किया जाता है। परिवार के लोग फल, नारियल, गन्ना, दीपक और पूजा सामग्री से भरी टोकरी लेकर नदी या घाट पर जाते हैं। सूर्यास्त के समय अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है और भक्तजन सूर्य मंत्रों का जाप करते हैं। यह दिन परिवार और समाज की समृद्धि के लिए अर्पित होता है।
चौथे दिन सूर्योदय से पहले व्रतीजन घाट पर एकत्र होते हैं। उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर भगवान सूर्य और छठी मइया से जीवन, ऊर्जा और सुख की प्रार्थना करते हैं। पूजा पूर्ण होने के बाद व्रत तोड़ा जाता है और प्रसाद सबमें बाँटा जाता है।
निष्कर्ष:
छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह जीवन की ऊर्जा, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। जब भक्त श्रद्धा से इन पवित्र मंत्रों का जाप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं, तो उनके जीवन में प्रकाश, समृद्धि और शांति का संचार होता है।
