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किसी भी कार्य को करते समय शुभ मुहूर्त देखा जाता है। यदि अचानक से कोई यात्रा या शुभ काम करना पड़ जाएं, जिसके लिए मुहूर्त नहीं देखा गया है, तो उसे दिन के शुभ चौघड़िया में किया जा सकता है। चौघड़िया देखकर काम शुरू करने में सफलता के चांस बढ़ जाते हैं। आइए जानते हैं क्या है चौघड़िया और किसी चौघड़िया में क्या करना चाहिए।
चौघड़िया के मतलब होता है दिन या रात का आठवां हिस्सा। दरअसल एक दिन में 30 घटी होती है। एक घटी 24 मिनट की होती है। इन चार घटियों से मिलकर एक चौघड़िया बनता है। दिन में चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त और फिर सूर्यास्त से लेकर सूर्योदय तक 1.30 -1.30 घंटे तक रहता है। आप अपने शहर के सूर्योदय के हिसाब से चौघड़िया देख सकते हैं।
चौघड़िया वार और ग्रह से जुड़ा रहता है। चंद्र, बुध, गुरु और शुक्र ग्रह का चौघड़िया शुभ होता है। सूर्य, मंगल और शनि ग्रह से जुड़ा चौघड़िया अशुभ माना जाता है। जैसे रविवार सूर्य का वार है, इसलिए चौघड़िया उद्वेग से शुरू होता है। जिसको सूर्य शासित कहते हैं। इसके बाद सोमवार चंद्र का वार है। सोमवार को पहला चौघड़िया अमृत का होता है। मंगलवार का पहला चौघड़िया मंगल द्वारा शासित होता है, जिसका नाम रोग है। बुधवार का पहला चौघड़िया लाभ होता है। गुरुवार का पहला चौघड़िया शुभ और शुक्रवार का पहला चौघड़िया चर होता है। वहीं शनिवार का पहला चौघड़िया काल होता है। इस तरह उद्वेग, अमृत, रोग, लाभ, शुभ, चर और काल ये चौघड़िया इसी क्रम में दिन में आते रहते हैं।
उद्वेग के चौघड़िया सूर्य द्वारा शासित होता है। सूर्य को ज्योतिष में पाप ग्रह माना जाता है, इसलिए इस चौघड़िया को अशुभ माना जाता है।
चर के चौघड़िया को आमतौर पर यात्रा के लिए शुभ माना जाता है। इस चौघड़ियां को शुक्र द्वारा शासित किया जाता है। इस चौघड़िया नए कपड़े पहनने का काम भी किया जा सकता है।
शुभ का चौघड़िया बुध द्वारा शासित है। ज्योतिष में बुध ग्रह को शुभ माना जाता है। यह इस चौघड़ियां में किसी भी तरह के शुभ काम देखे जा सकते हैं।
लाभ का चौघड़िया गुरु द्वारा शासित है। लाभ का चौघड़िया शिक्षा शुरू करने के लिए अच्छा माना जाता है। नया कौशल शुरू करने के लिए ये चौघड़िया काफी लाभप्रद है।
अमृत का चौघड़िया लाभकारी है। इसे चंद्रमा द्वारा शासित किया जाता है। चंद्रमा शुभ ग्रह है। इस दौरान पूजा करना, पैसों से संबंधित काम करना शुभ माना जाता है।
काल का चौघड़िया शनि द्वारा शासित है। इस दौरान किसी भी तरह का शुभ काम नहीं किया जाता है।
वैदिक ज्योतिष में, मंगल को एक अनिष्टकारी ग्रह माना गया है। रोग का चौघड़िया मंगल द्वारा शासित है। इस दौरान हालाँकि, युद्ध और दुश्मन को हराने के लिए रोग चौघड़िया की अनुशंसा की जाती है।
