अस्त ग्रह क्या होते हैं? जानिए कुछ खास बातें

अस्त ग्रह क्या होते हैं? जानिए कुछ खास बातें

सूर्य ग्रहों के राजा हैं और उन्हें सबसे शक्तिशाली ग्रह माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के तेज के कारण अन्य ग्रहों की स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसी संदर्भ में 'अस्त ग्रह' की अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है।

अस्त ग्रह क्या होते हैं?

जब कोई ग्रह सूर्य के इतना निकट चला जाए कि वह सूर्य की तेज रोशनी और ओज से प्रभावहीन हो जाए, तो उसे 'अस्त ग्रह' कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यता है कि अस्त ग्रह अपना शुभ फल देने में असमर्थ होते हैं। इन्हें 'कुपित ग्रह' भी कहा जाता है और इनकी दशा या अंतर्दशा में जातक को सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं होते।

ग्रहों के अस्त होने के निर्धारित अंश (Degrees)

कोई भी ग्रह तब अस्त माना जाता है जब वह सूर्य की परिधि में एक निश्चित अंश तक आ जाता है। ग्रहों के अस्त होने की सीमाएं इस प्रकार हैं:
  • चन्द्रमा: 12 अंश
  • मंगल: 7 अंश
  • बुध: 13 अंश (विशेष परिस्थितियों में 3 अंश)
  • गुरु: 11 अंश
  • शुक्र: 9 अंश
  • शनि: 15 अंश
उदाहरण: यदि शुक्र 8 डिग्री पर है और सूर्य 14 डिग्री पर एक ही भाव में स्थित है, तो दोनों के बीच केवल 6 डिग्री का अंतर है। चूंकि यह 9 डिग्री की सीमा से कम है, इसलिए यहाँ शुक्र अस्त माना जाएगा।

विभिन्न ग्रहों के अस्त होने का फल

जब कोई विशिष्ट ग्रह सूर्य से प्रभावित होकर अस्त होता है, तो उसके कारक तत्वों में कमी आती है:

1. चन्द्रमा

यह स्थिति केवल अमावस्या के आसपास होती है। चन्द्रमा के अस्त होने पर जातक को माता के सुख में कमी और संपत्ति प्राप्ति में विलंब का सामना करना पड़ सकता है।

2. मंगल

मंगल के अस्त होने से व्यक्ति के साहस में कमी आती है। प्रॉपर्टी संबंधी कार्यों में लाभ नहीं मिलता और व्यवसाय में हानि की संभावना रहती है।

3. बुध

हालाँकि बुध को अस्त होने का दोष कम लगता है, फिर भी यह देखा गया है कि यह विशेष लाभ नहीं देता। इससे त्वचा संबंधी विकार और सम्मान की हानि हो सकती है।

4. गुरु (बृहस्पति)

यदि गुरु अस्त हो जाए, तो व्यक्ति के चरित्र पर लांछन लग सकते हैं। ज्ञानी होने के बावजूद उसे समाज में उचित उच्च पद प्राप्त करने में कठिनाई होती है।

5. शुक्र

शुक्र के अस्त होने पर कार्यों में बाधाएं आती हैं। वैवाहिक सुख में कमी और यौन रोगों की संभावना बढ़ जाती है।

6. शनि

शनि के अस्त होने से सरकारी कार्यों में रुकावटें आती हैं। व्यक्ति को धन की हानि और सम्मान की कमी महसूस होती है।

क्या अस्त ग्रह कभी शुभ फल देते हैं?

ज्योतिषीय शोध के अनुसार, कुछ स्थितियों में अस्त ग्रह शुभ भी हो सकते हैं:
  • अशुभ भावों के स्वामी: यदि कुंडली के 6वें, 8वें या 12वें भाव के स्वामी अस्त हों, तो जातक को शुभ परिणाम मिलते हैं।
  • विपरीत फल: जब अशुभ भाव का स्वामी अस्त होकर प्रभावहीन हो जाता है, तो वह उस भाव के नकारात्मक परिणामों को प्रकट नहीं कर पाता। यह स्थिति एक प्रकार के 'विपरीत राजयोग' जैसा फल देती है।

निष्कर्ष

अस्त ग्रहों का विश्लेषण करते समय उनकी स्थिति और भाव के स्वामित्व को देखना अत्यंत आवश्यक है। जहाँ शुभ ग्रहों का अस्त होना हानिप्रद है, वहीं अशुभ भावों के स्वामियों का अस्त होना जातक के लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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