धनतेरस 2025: महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त और एक पौराणिक कथा

धनतेरस 2025: महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त और एक पौराणिक कथा

धनतेरस 2025 - महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त और एक पौराणिक कथा

दिवाली का आरंभ जिस दिन से होता है, वह दिन है धनतेरस। यह पर्व न केवल धन-संपत्ति और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य, आरोग्यता और दीर्घायु जीवन की कामना का भी दिन है। धनतेरस 2025 में 18 अक्टूबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा कर अपने जीवन में समृद्धि, आरोग्य और सुख की कामना करते हैं।

 धनतेरस का महत्व धन

  • मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा कर आर्थिक समृद्धि की कामना।
  • भगवान धन्वंतरि की आराधना से स्वस्थ जीवन की प्राप्ति।
  • यमराज के लिए दीपदान कर परिवार की रक्षा।

धनतेरस पर कैसे करें पूजा

  • प्रदोष काल में (सूर्यास्त के बाद 45 मिनट तक) पूजा करना शुभ होता है।
  • घर के उत्तर दिशा में पूजा स्थान बनाएं। शुद्ध वस्त्र पहनकर पूजा का संकल्प लें। सबसे पहले श्रीगणेश की पूजा करें।
  • श्रीकुबेर की मूर्ति या यंत्र की स्थापना करें। मां लक्ष्मी की चांदी या मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें।
  • कुबेर देव को पीले वस्त्र और पीले फूल अर्पित करें। मां लक्ष्मी को लाल फूल और गुलाल से सजाएं।
  • भोग में खीर या हलवा अर्पित करें। “ॐ श्रीं कुबेराय नमः” मंत्र का जाप करें।
  • श्रीसुक्त या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
  • पूजा के बाद घर के दक्षिण दिशा में यम दीपक लगाएं। यम दीपक का विशेष महत्व धनतेरस की रात को घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाना बेहद शुभ माना गया है।
  • यह दीपक मृत्यु के देवता यम को समर्पित होता है। इससे परिवार में अकाल मृत्यु और बीमारियों का खतरा कम होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

यम दीपदान

जब मृत्यु भी वापस लौट गई प्राचीन समय की बात है। राजा हिमराज के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि उसकी विवाह के चौथे दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी। राजा और रानी इस बात से बहुत चिंतित थे। तय समय पर विवाह हुआ, लेकिन रानी ने बहू को सारी बात बता दी। बहू बहुत समझदार और धर्मपरायण थी। उसने चौथे दिन अपने पति को जगाने नहीं दिया और घर के बाहर एक दीपों की पंक्ति, सोने-चांदी के गहनों और धन-संपत्ति से घर को रोशन कर दिया। द्वार पर वह खुद बैठ गई और अपने पति के लिए भजन गाने लगी। रात को जब यमराज उनके प्राण लेने आए, तो तेज प्रकाश और बहू के भजन से वे प्रभावित हो गए। उन्होंने बिना कुछ बोले प्राण लिए बिना ही वापसी का मार्ग चुना। तब से इस दिन को यम दीपदान के नाम से भी जाना जाता है और यह माना जाता है कि इस दिन दिया जलाने से अकाल मृत्यु टलती है। भगवान धन्वंतरि की आराधना धनतेरस को ही समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। वे आयुर्वेद के जनक और स्वास्थ्य के देवता माने जाते हैं। इस दिन उनका पूजन करके स्वास्थ्य, आयु और शांति की कामना की जाती है। पूजा में तुलसी दल, नीम की पत्तियां और गंगाजल का प्रयोग करें। "ॐ धन्वंतरये नमः" मंत्र का जाप करें।

 धनतेरस पर क्या खरीदें

राशि अनुसार सुझाव साल 2025 में आप अपनी राशि के अनुसार शुभ वस्तु खरीदें, तो उसका फल और अधिक शुभ माना जाता है
  • मेष चांदी का सिक्का
  • वृषभ चांदी के बर्तन
  • मिथुन सोने की अंगूठी
  • कर्क स्टील के बर्तन
  • सिंह सोने की कोई वस्तु
  • कन्या घर के लिए कोई वस्तु
  • तुला चांदी का गिलास
  • वृश्चिक लाल रंग के कोई वस्त्र
  • धनु सोने की अंगूठी
  • मकर घर के लिए नए बर्तन
  • कुंभ नीले रंग
  • मीन सोने के गहने

धनतेरस 2025 पूजा मुहूर्त तिथि

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 07:31 बजे से 08:28 बजे तक 

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

कैटेगरी

आपके लिए रिपोर्ट्स

    अनुशंसित पूजा

      Ask Question

      आपके लिए खरीदारी

      आपके लिए रिपोर्ट्स

      त्रिलोक ऐप में आपका स्वागत है!

      image