धनतेरस 2025: महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त और एक पौराणिक कथा

धनतेरस 2025: महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त और एक पौराणिक कथा

दिवाली महापर्व का आरंभ धनतेरस से होता है। यह पर्व न केवल धन-संपत्ति और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य, आरोग्यता और दीर्घायु जीवन की कामना का भी दिन है। साल 2025 में धनतेरस 18 अक्टूबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा का विशेष विधान है।

धनतेरस 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस की पूजा के लिए शाम का समय अत्यंत शुभ है:
  • तारीख: शनिवार, 18 अक्टूबर 2025
  • पूजा मुहूर्त: शाम 07:31 बजे से 08:28 बजे तक

धनतेरस का धार्मिक महत्व

धनतेरस के दिन तीन मुख्य उद्देश्यों के लिए पूजा की जाती है:
  • आर्थिक समृद्धि: मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा से धन-धान्य की प्राप्ति।
  • आरोग्य: आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की आराधना से स्वस्थ जीवन।
  • सुरक्षा: यमराज के लिए दीपदान कर परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा।

धनतेरस पूजा विधि (Step-by-Step)

प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद लगभग 45 मिनट) में पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता है।
  1. तैयारी: घर की उत्तर दिशा में पूजा स्थान बनाएं। शुद्ध वस्त्र पहनकर पूजा का संकल्प लें और सबसे पहले श्रीगणेश की वंदना करें।
  2. स्थापना: कुबेर यंत्र या मूर्ति और मां लक्ष्मी की चांदी या मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. पूजन: कुबेर देव को पीले वस्त्र व फूल और मां लक्ष्मी को लाल फूल अर्पित करें।
  4. भोग और मंत्र: खीर या हलवे का भोग लगाएं और “ॐ श्रीं कुबेराय नमः” मंत्र का जाप करें।
  5. पाठ: श्रीसुक्त या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।

यम दीपदान: अकाल मृत्यु से सुरक्षा

धनतेरस की रात घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाना बेहद शुभ है। यह दीपक मृत्यु के देवता यमराज को समर्पित होता है, जिससे परिवार में बीमारियों और अकाल मृत्यु का खतरा कम होता है।

यम दीपदान की पौराणिक कथा

प्राचीन काल में राजा हिमराज के पुत्र की मृत्यु उसके विवाह के चौथे दिन निश्चित थी। उसकी बुद्धिमान पत्नी ने चौथे दिन पूरे घर को दीपों, आभूषणों और धन से रोशन कर दिया और द्वार पर बैठकर भजन गाने लगी। जब यमराज प्राण लेने आए, तो वे प्रकाश और भजनों से इतने मंत्रमुग्ध हुए कि बिना प्राण लिए ही वापस लौट गए। तब से अकाल मृत्यु को टालने के लिए यम दीपदान की परंपरा चली आ रही है।

भगवान धन्वंतरि की आराधना

समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे स्वास्थ्य के देवता हैं। उनकी पूजा में तुलसी दल, नीम की पत्तियां और गंगाजल का प्रयोग करना चाहिए। पूजा के दौरान "ॐ धन्वंतरये नमः" मंत्र का जाप करना फलदायी होता है।

राशि अनुसार खरीदारी के सुझाव

धनतेरस पर अपनी राशि के अनुसार शुभ वस्तुएं खरीदना बरकत लाता है। नीचे दी गई तालिका देखें:
राशि शुभ खरीदारी
मेष चांदी का सिक्का
वृषभ चांदी के बर्तन
मिथुन सोने की अंगूठी
कर्क स्टील के बर्तन
सिंह सोने की कोई वस्तु
कन्या घर के लिए कोई उपयोगी वस्तु
तुला चांदी का गिलास
वृश्चिक लाल रंग के वस्त्र
धनु सोने की अंगूठी
मकर घर के लिए नए बर्तन
कुंभ नीले रंग की वस्तुएं
मीन सोने के गहने
निष्कर्ष: धनतेरस का यह पावन पर्व हमें भौतिक समृद्धि के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य के महत्व को भी समझाता है। विधि-विधान से की गई पूजा और दीपदान परिवार में खुशहाली और आरोग्य लेकर आता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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