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कुंडली का पहला भाव सबसे महत्वपूर्ण भाव होता है। इसे तनु भाव भी कहते हैं। यानी आप कैसे दिखेंगे, आपका संकल्प कैसा होगा? आपके विचार कैसे होंगे? सहित आपके व्यक्तित्व की पूरी जानकारी आपको पहले भाव से मिलेगी। कालपुरुष की कुंडली में पहला भाव मेष राशि का होता है। चलिए देखते हैं कुंडली के पहले भाव में शुभ ग्रह क्या परिणाम देते हैं। जानिए कुछ खास बातें-
सूर्य ऊर्जा का कारक है और नवग्रहों का राजा भी कहलाता है। सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा जाता है। कुंडली में सूर्य काफी मजबूत ग्रह माना जाता है। जब सूर्य पहले भाव में होता है, तो व्यक्ति आत्मविश्वास से भरपूर होता है। उसका स्वास्थ्य अच्छा होता है और दृढ़ संकल्प मजबूत होता है। सूर्य यदि अपने मित्र ग्रहों की राशि में हो, तो ऐसे लोगों में लीडरशिप क्वालिटी काफी ज्यादा होती है। हालांकि सूर्य यदि पहले भाव में होता है, तो कई बार व्यक्ति को थोड़ा अहंकारी भी बना देता है।
चंद्रमा मनसो जात:। यानी चंद्रमा मन का कारक है। यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा पहले घर में है, तो आपका मन स्थिर हो सकता है। चंद्रमा मन के साथ माता और सुख का भी कारक माना जाता है। पहले भाव का चंद्रमा आपको आकर्षक बनाता है। यदि चंद्रमा कमजोर है, तो व्यक्ति काफी परेशान रह सकता है। कमजोर चंद्रमा के कारण व्यक्ति के जीवनसाथी से भी कई बार वैचारिक मतभेद होते हैं। यदि चंद्रमा मजबूत स्थिति में है, तो व्यक्ति को सुखी और ऐश्वर्य से भरपूर जीवन मिलता है।
देवगुरु बृहस्पति ज्योतिष में शुभ ग्रह माने जाते हैं। गुरु यदि पहले भाव में होते हैं, तो व्यक्ति शारीरिक तौर पर थोड़ा मोटा हो सकता है, लेकिन विद्वान होगा। उसमें दयाभाव होगा। उसका दृष्टिकोण सकारात्मक होगा और व्यक्ति कभी भी निराशावादी नहीं होगा। पहले भाव का गुरु व्यक्ति को धार्मिक प्रवृत्ति का बनाता है। समाज में उसे बहुत प्रतिष्ठा मिलती है। यदि गुरु कमजोर है, तो व्यक्ति को पढ़ाई में दिक्कत हो सकती है, लेकिन उसके पास सुख-सुविधाओं का बहुत अभाव नहीं होगा।
बुध व्यक्ति के ज्ञान और बुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं। कुंडली में जब पहले भाव में बुध होता है, व्यक्ति बौद्धिक रूप से काफी मजबूत होता है। ऐसा व्यक्ति गणित, अकाउंट या रिजनिंग में काफी अच्छा होता है। ऐसा व्यक्ति जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है और अपने प्रश्नों के समाधान में लगा रहा है। जल्दी और आसानी से नई चीजों को सीख लेता है। नई-नई भाषाएं सीखने और लोगों से बात करने का शौकीन होता है। ऐसा व्यक्ति बैंकिंग आदि में अच्छा परफॉर्म करता है।
शुक्र दैत्यों के गुरु हैं, लेकिन ज्योतिष में सबसे शुभ ग्रहों में से एक हैं। शुक्र को विवाह, रोमांस, कला, फैशन, ज्वैलरी का कारक माना जाता है। यदि शुक्र पहले भाव में हो, तो व्यक्ति काफी तेजस्वी होता है। वह बेहद खूबसूरत होते हुए कला का शौकीन होता है। फैशन के हर मूव उसे पता होते हैं। किसी भी पार्टी का अट्रेक्शन होता है। यदि शुक्र खराब स्थिति में है, तो भी व्यक्ति काफी आकर्षक होगा, लेकिन जल्दी गलत संगति में पड़ सकता है।
