
एकश्लोकी भारतम्

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कृष्ण स्तोत्र
आदौ पाण्डवधार्तराष्ट्रजननं लाक्षागृहेदाहनं
द्यूतस्त्रीहरणं वने विहरणं मत्स्यालये वर्तनम् ।
लीलागोग्रहणं रणे च विजयं सन्धिक्रियाजृम्भणं
पश्चाद्भीष्मसुयोधनादिनिधनं ह्येतन्महाभारतम् ॥
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
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