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श्री गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। कहते हैं इस दिन भगवान गणेश को पुनर्जन्म मिला था। भगवान गणेश को इसी दिन सभी देवी-देवताओं से पहले पूजे जाने का आशीर्वाद भी मिला था। भगवान गणेश, मात पार्वती और भगवान शिव के सबसे छोटे पुत्र हैं। उन्हें विघ्वविनाशक, सिद्धिदायक, धनदायक और संकटनाशक जैसे नाम से भी पुकारा जाता है।
साल 2024 में गणेश चतुर्थी उत्सव शनिवार 7 सितंबर को मनाया जाएगा। गुजरात, महाराष्ट्र, मप्र सहित कई राज्यों इस समय दस दिन का गणेश उत्सव मनाया जाता है। इस समय गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त मध्याह्न 11:10 ए एम से 01:39 पी एम के बीच रहेगा। इस समय घर-घर में गणेश प्रतिष्ठा की जा सकती है।
भगवान गणेश सबके प्रिय और सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता है। उन्हें समस्त परेशानियों को दूर करके सफलता देने वाला माना जाता है। गणेश ज्ञान, विज्ञान के देवता हैं। उन्हें शुभता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए गणपति विनायक के रूप में सभी को प्रिय है और उनकी पूजा से समस्त कार्यों की सिद्धि भी होती है।
भगवान गणेश के जन्म की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। एक बार माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व हल्दी के लेप से एक छोटे बच्चे की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। उसे विनायक नाम दिया। माता ने विनायक को शक्तियां दी और भवन के द्वार पर खड़ा कर दिया। जब भी किसी ने भवन के अंदर जाने की कोशिश की, विनायक ने उसे अंदर नहीं जाने दिया और उस पर प्रहार किया। जब सभी देवता भी उससे युद्ध में हार गए, तब भगवान शिव ने अपने त्रिशुल से बालक का गला काट दिया। माता पार्वती अपने पुत्र की इस प्रकार हत्या से काफी दुखी हुई और काली बनकर देवताओं से युद्ध करने के लिए तैयार हो गईं। तब शिव ने देवताओं को हाथी का मस्तक लाने का आदेश दिया। इस मस्तक को बालक विनायक के धड़ से लगा दिया और उसे जीवनदान दिया। तब सभी देवताओं ने प्रसन्न होकर विनायक को प्रथम पूज्य का आशीर्वाद दिया और भगवान शिव ने उसे अपने गणों का प्रमुख बना दिया।
शुभ, लाभ या अमृत चौघड़िया के दौरान गणेश जी की मूर्ति को घर लाने की सलाह दी जाती है। यदि आप शनिवार, 7 सितंबर 2024 को गणेश चतुर्थी (Ganesha Chaturthi) के लिए गणपति की मूर्ति को घर लाना चाहते हैं, तो शुभ समय यह है-
गणेश चतुर्थी – शनिवार, 7 सितंबर 2024
मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त – 11:07 AM to 01:33 PM
अवधि – 02 घंटे 27 मिनट
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – 06 सितंबर 2024 को दोपहर 03:01 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – 07 सितंबर 2024 को शाम 05:37 बजे
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटी सम्प्रभ।
निर्विध्नं कुरु मे देव सर्व कार्यषु सर्वदा ।।
श्लोक का अर्थ:
“हे भगवान गणेश! हम आपको सर्वोच्च मानकर नमस्कार करते हैं। हे पराक्रमी भगवान! जिनके पास सूंड और शक्तिशाली शरीर के साथ पवित्र परमात्मा है, जिनकी चमक एक साथ चमकते हुए एक करोड़ सूर्य की तरह है, जो सभी को आनंद प्रदान करते हैं। सभी बुराइयों से हमें दूर रखते हुए हमारे कार्यों को सफल बनाएं।
- घर पर भगवान गणेश की मूर्ति लाएं।
- भगवान गणेश को वैदिक मंत्रों से पूजन करें और षोडोपचार पूजा करें।
- भगवान को लड्डू और नेवैद्य का भोग लगाएं।
- जब तक आप गणेशजी को अपने घर रखें उनकी प्रतिदिन आरती करें।
- आखिरी दिन गणेशजी की मूर्ति को विसर्जित करें।
हालांकि कुछ मान्यताओं के अनुसार गणेशजी को कभी भी घर से विदा नहीं किया जाता है।
दुर्वा से करें पूजा- भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उन्हें गणेशजी के 108 नाम के साथ दुर्वा अर्पण करें।
मोदक का भोग- मोदक श्री गणेश के प्रिय हैं, इसलिए उन्हें मोदक का भोग लगाएं।
मंत्र जाप और पाठ - गणेश उत्सव के दौरान रोजाना गणेशजी के किसी भी मंत्र का 108 बार जाप करें और अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
