कब है गुप्त नवरात्रि - कौन सी देवी की होगी पूजा
देवी पूजा में नवरात्रि का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार एक साल में चार नवरात्रि होती है। शरद नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि को बड़े स्तर पर मनाया जाता है। इसके अलावा माघ और आषाढ़ में भी दो नवरात्रि होती है। इन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। आमतौर पर गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक देवियों की पूजा होती है। माता को प्रसन्न करने के लिए आम श्रदालु भी गुप्त नवरात्रि में पूजा पाठ कर सकते हैं। गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन बसंत पंचमी मनाई जाएगी। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है
गुप्त नवरात्रि कब है
माघ महीने में गुप्त नवरात्रि इस वर्ष 26 जून, 2025 से 4 जुलाई 2025 तक मनाई जाएगी।
गुप्त नवरात्रि शुभ मुहूर्त (Gupt Navratri Shubh Muhurat)
गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ: बृहस्पतिवार, 26 जून 2025 को
गुप्त नवरात्रि समाप्त: शुक्रवार 4 जुलाई 2025
घटस्थापना मुहूर्त - 05:44 ए एम से 07:15 ए एम
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - 12:03 पीएम से12:57 पी एम
क्या है गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान मुख्य रूप से तांत्रिकों और साधुओं द्वारा मां दुर्गा को प्रसन्न करने की लिए किया जाता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक 10 महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए पूजा करते हैं। इसे गुप्त सिद्धियां और तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने का समय भी माना जाता है और ये भी कहा जाता है कि मां दुर्गा की पूजा जितनी गुप्त रखी जाती है, उसका फल उतना ज्यादा मिलता है।
गुप्त नवरात्रि में पूजे जाने वाली 10 महाविद्याएं
मां काली
ऐसी कथा प्रचलित है कि महिषासुर से युद्ध के समय मां दुर्गा का क्रोध अपनी चरम सीमा को पार कर गया था। उनका क्रोध उनके मस्तक से 10 भुजाओं वाली काली के रूप में प्रकट हुआ। दुर्गा के क्रोध से जन्मी काया का रंग काला होने के कारण, उन्हें काली नाम दिया गया।
तारा देवी
माता तारादेवी को तांत्रिक शक्तियों की देवी माना जाता है। सभी कष्टों से तारने वाली देवी के रूप में देवी तारा की पूजा की जाती है। कुछ कहानियों के अनुसार जब महादेव ने विष पिया था, तो मां तारा ने ही उन्हें अपना दूध पिलाया था।
त्रिपुर सुंदरी
देवासुर संग्राम के समय त्रिपुर सुंदरी ने अपनी सुंदरता से सभी असुरों को अपने वश में कर लिया था। कहते हैं कि इनके आराधना से अलौकिक शक्तियां भक्तों को प्राप्त होती है। त्रिपुर सुंदरी की शक्ति के बारे में देवी पुराण में काफी व्याख्या मिलती है। वे माता ललिता का स्वरूप हैं। गुप्त नवरात्रि में
ललिता सहस्रनाम पढ़ना चाहिए।
भुवनेश्वरी
गुप्त नवरात्रि में मां भुवनेश्वरी की साधना से शक्ति, लक्ष्मी, वैभव और उत्तम विद्याएं प्राप्त होती हैं। मां भुवनेश्वरी की साधना के लिए कालरात्रि, ग्रहण, होली, दीपावली, महाशिवरात्रि, कृष्ण पक्ष की अष्टमी अथवा चतुर्दशी का समय शुभ माना गया है। वे पूरे ब्रह्मांड माता हैं।
माता छिन्नमस्ता
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शक्तिपीठ झारखण्ड में स्थित देवी
छिन्नमस्ता का मंदिर है। देवी ने अपने लोगों की भूख शांत करने के लिए अपनी मस्तक काट दिया था, इसलिए इन्हें माता छिन्नमस्ता के नाम से जाना जाता है। वे पोषण और रक्षण की देवी है।
त्रिपुर भैरवी
माता त्रिपुर भैरवी के चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं। इनकी भक्ति से युक्ति और मुक्ति दोनों की प्राप्ति होती है। त्रिपुर भैरवी देवी की साधना से काम, आजीविका, सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
मां धूमावती
माता पार्वती ने एक बार क्रोध में भगवान शिव को निगल लिया था। तब से उनका विधवा रूप प्रचलित हुआ जिसका नाम मां धूमावती है। मां धूमावती मानव जाति में बसे इच्छा और कामनाओं का प्रतीक है जो कभी भी खतम नहीं होता है।
माता बगलामुखी
माता के अलौकिक रूप के कारण उन्हें बगलामुखी का नाम प्राप्त हुआ है। इनकी उत्पत्ति गुजरात के सौराष्ट्र में हल्दी के जल से हुई थी। इसलिए इन्हें पीताम्बरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। वे स्तंभन की देवी है। उनकी कृपा से शत्रु परास्त हो जाते हैं। गुप्त नवरात्रि में
बगलामुखी पूजा से लाभ होता है।
मातंगी
देवी मातंगी, मातंग तंत्र की देवी मानी जाती हैं। इन्हें जूठन का भोग लगाया जाता है। जब माता पार्वती को कोई स्त्री अपने जूठन का भोग लगा रही थी तब शिवजी और गणों ने मना किया, परन्तु उन स्त्रियों की भक्ति को मान देने के लिए माता ने मातंगी का रूप धारण कर लिया।
कमला देवी
माता कमला देवी, मां लक्ष्मी का ही स्वरुप हैं। जो भक्त सच्चे मन से मां को याद करते हैं उन्हें धन- धान्य, ऐश्वर्य की कोई कमी नहीं होती है। लक्ष्मी हमेशा कमल के पुष्प पर आसीन रहती है। इसी कारण उनका नाम कमला पड़ा।
गुप्त नवरात्रि की पूजा कैसे करें
शरद नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि की तरह ही गुप्त नवरात्रि में कलश की स्थापना की जाती है। कलश की स्थापना के साथ दोनों समय दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करना चाहिए। मां को भोग लगाए और पाठ के बाद मां की आरती अवश्य करें। गुप्त नवरात्रि में माता को लौंग और बताशे का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। मां दुर्गा को लाल फूल और चुनरी जरूर अर्पित करें। माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और अघोरी मां दुर्गा की पूजा आधी रात में करते हैं, जिससे उन्हें सिद्धि प्राप्त होती है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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