गुरु चांडाल दोष क्या है? कुंडली में इसके होने से क्या परिणाम मिलते हैं?

गुरु चांडाल दोष क्या है? कुंडली में इसके होने से क्या परिणाम मिलते हैं?

गुरु चांडाल दोष क्या है? कुंडली में इसके होने से क्या परिणाम मिलते हैं?

गुरु का सबसे शुभ ग्रह माना जाता है, लेकिन जब कुंडली में गुरु राहु के साथ युति कर लें या फिर राहु या केतु आमने-सामने हो जाएं, तब कुंडली में चांडाल दोष नामक दुर्योग बनता है। चांडाल किसी जाति से नहीं बल्कि समाज से बहिष्कृत व्यक्ति माना जाता है। यदि कुंडली में चांडाल दोष बनता है, तो कई प्रकार की परेशानियां आने लगती है। 

क्या होता है नुकसान

कुंडली में यदि चांडाल दोष होता है, तो व्यक्ति कई प्रकार के अनैतिक काम से जुड़ जाता है। उसके बनते काम बिगड़ जाते हैं और बार-बार जीवन में समस्याएं आने लगती है। ऐसे व्यक्ति को समाज की निंदा का प्रात्र भी बनना पड़ता है। नौकरी और व्यवसाय में दिक्कत आती है। व्यक्ति गलत संगत में पड़ जाता है। गुरु एक शुभ ग्रह है, जबकि राहु-केतु पूरी तरह से अशुभ। इस युति के अलग-अलग भाव में भी अलग-अलग परिणाम होते हैं।

अलग-अलग भाव में चांडाल दोष का अलग-अलग प्रभाव


पहले भाव में चांडाल दोष बनता है, तो व्यक्ति का चारित्रिक पतन होता है। वह गलत तरीकों से धन कमाने की कोशिश करता है।
दूसरे भाव में चांडाल दोष परिवार से रिश्ते बिगाड़ देता है। कई बार ऐसा व्यक्ति नशे का आदी हो जाता है।
तीसरे भाव में जब गुरु-राहु की युति बनती है, तो व्यक्ति को गलत काम के लिए कुख्यात कर देती है।। जुएं, सट्टे आदि की लत पड़ सकती है।
चौथे भाव में गुरु चांडाल दोष अक्सर पारिवारिक शांति छीन लेता है। 
पांचवे भाव में गुरु चांडाल दोष आपकी शिक्षा को बाधित कर देता है। ऐसा व्यक्ति कई बार अपनी पूरी शिक्षा नहीं ले पाता है।
कुंडली के छठे भाव में व्यक्ति बीमारियों से जूझता है और कई बार ऐसा व्यक्ति विरोधियों से घिरा रहता है।
सातवें भाव में यदि व्यक्ति गुरु-राहु या गुरु-केतु की युति हो, तो व्यक्ति का वैवाहिक जीवन काफी परेशानी से घिरा रहता है।
आठवें भाव में चांडाल दोष बनता है, तो व्यक्ति की दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
नवें भाव में गुरु-राहु या गुरु-केतु की युति भाग्य को कमजोर कर देती है और व्यक्ति जीवनभर संघर्ष करता है।
कुंडली के दसवें भाव में गुरु-चांडाल दोष बनने से कार्यक्षेत्र में लगातार तनाव बना रहता है।
कुंडली के 11वें भाव में व्यक्ति की आय में कमी होने लगती है। कई बार ऐसे व्यक्ति की समाज में बेहद निंदा होती है।
बारहवें भाव में गुरु-राहु या गुरु-केतु की युति से व्यक्ति अकेलेपन का शिकार हो जाता है। कई बार वह अधार्मिक काम करने लग जाता है। 

चांडाल दोष का दुष्प्रभाव दूर करने के उपाय -


1. चांडाल दोष शांति की पूजा करवाना चाहिए।
2. गुरुजन, माता-पिता का आशीर्वाद लेकर की कोई काम करना चाहिए।
3. भगवान विष्णु की प्रतिदिन पूजा करें और विष्णु सहस्रनाम का जाप करें। 
4. किसी आश्रम की सेवा करें और वृद्धाश्रम में भी समय बिताएं।
5. केले का पौधा लगाएं और प्रतिदिन उसकी सेवा करें।
6. केसर या हल्दी का टीका लगाकर ही दिन की शुरुआत करें।
7. गाय को गुड़ खिलाएं।
8. गरीबों को दो रंग का कंबल बांटें।
9. गुरु और राहु के बीज मंत्रों का जाप करें।
10. पक्षियों को दाना खिलाएं।
11. धार्मिक कार्यों में दान करें।
12. किसी मंदिर में प्रतिदिन झाड़ू लगाएं। 


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

कैटेगरी

आपके लिए रिपोर्ट्स

    अनुशंसित पूजा

      Ask Question

      आपके लिए खरीदारी

      आपके लिए रिपोर्ट्स

      त्रिलोक ऐप में आपका स्वागत है!

      image