Hariyali Amavasya 2025- तारीख, महत्व और उस दिन क्या करें

Hariyali Amavasya 2025- तारीख, महत्व और उस दिन क्या करें

Hariyali Amavasya 2025- तारीख, महत्व और उस दिन क्या करें

हरियाली अमावस्या, श्रावण (सावन) मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण त्यौहार है। मानसून के आगमन के साथ ही प्रमुख हिंदू त्योहारों की धूम शुरू हो जाती है। हरियाली अमावस्या प्रकृति की सुंदरता की सराहना करने का दिन है। साथ ही कह सकते हैं कि इस दिन पितृों के निमित्त पौधे लगाने से समस्त प्रकार के कार्यों की सिद्धि होती है।   Sampatti Prapti Puja  

हरियाली अमावस्या: तिथि और समय

इस वर्ष यह पर्व 24 जुलाई 2024 को पड़ेगा।
  • अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 24 जुलाई 25
  • अमावस्या तिथि समाप्त - 25 जुलाई 25, 12:40 ए एम,

हरियाली अमावस्या का महत्व

हरियाली अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। श्रावण मास की अमावस्या अन्य अमावस्याओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। बारिश के मौसम में हरियाली अमावस्या का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें प्रकृति की सुंदरता का आनंद लिया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। यह त्योहार भारत के उत्तरी राज्यों जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में विशेष रूप से प्रसिद्ध है। हालाँकि, इसे देश के कई अन्य भागों में भी मनाया जाता है, लेकिन अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे महाराष्ट्र में गटारी अमावस्या, आंध्र प्रदेश में चुककल अमावस्या और उड़ीसा में चितलगी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। हमारे देश में विभिन्न संस्कृतियां हैं, सभी के अलग-अलग रिवाज और परंपराएं हैं। उसी के आधार पर यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन पौधे लगाकर प्रकृति का धन्यवाद दिया जाता है।

क्या होता है हरियाली अमावस्या का विशेष आयोजन

हरियाली अमावस्या के दिन कई राज्यों में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की जाती है। खासकर मथुरा और वृंदावन में इस पर्व की धूम देखने को मिलती है। भगवान कृष्ण के भक्त विशेष दर्शन के लिए मथुरा के बाँके बिहारी मंदिर, द्वारकाधीश और वृंदावन जाते हैं। वृंदावन में बाँके बिहारी मंदिर में एक फूल बंगला है, जो भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध है। हरियाली अमावस्या के दिन कृष्ण मंदिरों के अलावा विभिन्न शिव मंदिरों में विशेष शिव दर्शन का आयोजन किया जाता है।   Marraige Report 2025  

आप हरियाली अमावस्या पर क्या करें

हरियाली अमावस्या का दिन पूर्वजों को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धालुओं को प्रातः जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद अपने पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए पूजा करनी चाहिए, साथ ही ब्राह्मण भोजन करवाकर पितृों का प्रसन्न कर सकते हैं। इसके अलावा, श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव की भी पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लेते हैं। साथ ही, भगवान शिव को समर्पित मंत्रों का जाप करना भी बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के मंदिरों में विशेष अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु अपने इष्ट देव महादेव के दर्शन कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। साथ ही, महिलाएं अपने पति की कुशलता के लिए भी प्रार्थना करती हैं। इस दिन पूजा का विधि पूर्ण होने के बाद ही भोजन करना चाहिए।

हरियाली अमावस्या पर पौधे लगाएं

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, हरियाली अमावस्या के दिन हरियाली का बहुत महत्व होता है। यह त्योहार श्रावण मास में पड़ता है, तब तक प्रकृति हरियाली की चादर से ढकी रहती है। यदि आप इस दिन कोई पौधा लगाकर और उसकी देखभाल करते हैं, तो आपको पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामना पूरी होती है। 1. धन प्राप्त करने के लिए – तुलसी, आंवला, बिल्वपत्र और केले का वृक्ष लगाना चाहिए। 2. अच्छे स्वास्थ्य के लिए – आंवला, पलाश, ब्राह्मी, अर्जुन, तुलसी और सूरजमुखी के पौधे लगाना चाहिए। 3. भाग्य वृद्धि के लिए – अर्जुन, अशोक, नारियल या वट का वृक्ष लगाएं। 4. संतान प्राप्ति के लिए – बिल्व, नीम, नागकेशर, पीपल या अश्वगन्धा के वृक्ष लगाएं। 5. सुख- समृद्धि के लिए – कदम्ब, नीम या धनी छायादार वृक्ष लगाएं। 6. जीवन में सुख-शांति के लिए – पारिजात, मोगरा, रातरानी और गुलाब के पौधे लगाएं। इस बार हरियाली अमावस्या अगस्त 24 (गुरुवार) को आ रही है। आप अपने घर पर अपनी पसंद के अनुसार पौधे लगा सकते हैं। Love Report 2025

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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