
होलिका दहन - जानिए विधि और शुभ मुहूर्त

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पूजा
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है। मान्यता है कि होलिका दहन से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-संपत्ति का आगमन होता है।
होलिका दहन 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
इस साल होलिका दहन 3 मार्च को मंगलवार के दिन किया जाएगा। ध्यान रहे कि होलिका दहन हमेशा भद्रा रहित काल में ही शुभ माना जाता है।
- होलिका दहन तिथि: 3 मार्च 2026
- होलिका दहन मुहूर्त: शाम 06:31 PM से रात 08:58 PM तक
होलिका दहन की संपूर्ण पूजन विधि
पूरे श्रद्धा भाव से पूजन करने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाएं:
- तैयारी: सुबह जल्दी स्नान कर व्रत का संकल्प लें। पूजन स्थल को साफ कर वहां होलिका दहन की सामग्री इकट्ठा करें।
- मूर्ति स्थापना: होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा बनाकर भगवान नरसिंह की पूजा करें।
- अग्नि प्रज्वलन: शुभ मुहूर्त के दौरान होलिका की पूजा करें और उसमें अग्नि दें।
- परिक्रमा: परिवार के साथ होलिका की तीन बार परिक्रमा करें।
- अर्पण: नरसिंह भगवान का ध्यान करते हुए आग में गेहूं, चने की बालियां, जौ, गोबर के उपले और जल चढ़ाएं।
विशेष उपाय: होलिका की आग शांत होने के बाद उसकी राख घर लाएं। यदि घर में वास्तु दोष है, तो इस राख को दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) में रखें।
होलिका दहन के दिन बच्चों और परिवार के लिए विशेष कार्य
इस दिन कुछ पारंपरिक कार्यों को करने से घर में खुशहाली आती है:
- बच्चों के लिए: बच्चों को साहसी बनाने के लिए उन्हें लकड़ी की तलवार दें और उत्साही सैनिक की तरह खेलने दें। उन्हें पूड़ी, खीर, मालपुआ और हलवा जैसे पकवान खिलाएं।
- हनुमान पूजा: इस दिन हनुमानजी की विशेष पूजा करने से साल भर शुभ परिणाम मिलते हैं।
- चंद्र दर्शन: पूरे परिवार के साथ चंद्रमा के दर्शन करें। माना जाता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
होलिका दहन के शक्तिशाली मंत्र
पूजा के दौरान और भस्म लगाते समय इन मंत्रों का जाप कल्याणकारी होता है:
होलिका पूजन मंत्र:
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:,
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।
भस्म लगाने का मंत्र:
वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।
होलिका दहन का महत्व और पौराणिक कथा
आदिकाल में हिरण्यकश्यप नामक राक्षस ने अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु भक्ति से हटाने के लिए कई यातनाएं दीं। जब वह सफल नहीं हुआ, तो उसने अपनी बहन होलिका को बुलाया, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था।
होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच निकले। तभी से यह पर्व अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में मनाया जाता है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।