महालक्ष्मी षोडशोपचार पूजा: प्रथम चरण (आह्वान और अर्पण)
1. आवाहनम् (आमंत्रण)
माता लक्ष्मी का इस मंत्र से आह्वान करें:ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।अर्थ: हे अग्निदेव, सोने के समान चमकने वाली, चंद्रमा के समान शीतल और प्रकाशमान महालक्ष्मी को मेरे घर बुलाएं।
2. आसनम् (आसन का अर्पण)
माता को बैठने के लिए आसन भेंट करें:ॐ तां म आ व ह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ।।अर्थ: हे अग्निदेव, उन लक्ष्मी जी को बुलाएं जिनके आने से मुझे स्वर्ण, गौ और उत्तम ऐश्वर्य की प्राप्ति हो।
3. पद्यं (पैर धोना)
माता के चरण पखारने के लिए जल अर्पित करें:ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनाद्प्रमोदिनीम् । श्रियम् देवीमुप ह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।
महालक्ष्मी पूजन: मुख्य षोडशोपचार विधि
4. अर्घ्यम् (जल का अर्पण)
हाथों में जल लेकर मां को अर्घ्य दें:ॐ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् । पद्मेस्थितां पदमवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।
5. आचमन (शुद्धिकरण)
शुद्धि के लिए आचमन कराएं:ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्ती श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् । तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।
6. स्नान
माता को जल से स्नान कराएं:ॐ आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः । तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्य अलक्ष्मीः ।।
7. वस्त्र (परिधान अर्पण)
माता को वस्त्र अर्पित करें:उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह । प्रदुभुर्तॉऽस्मि रास्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिंमृद्धिम ददातु मे ।।
महालक्ष्मी श्रृंगार और गंध अर्पण
8. उपवस्त्र (चोली अर्पण)
माता को उपवस्त्र चढ़ाएं:क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठमलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् । अभूतिमसमृद्धि च सर्वां निर्गुद में गृहात् ।।
9. गंध (चन्दन अर्पण)
सुगंधित चंदन अर्पित करें:गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् । ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोप हवये श्रियम् ।।
10. सौभाग्यद्रव्य (सिन्दूर आदि)
माता को सौभाग्य की वस्तुएं जैसे सिन्दूर और चूड़ियाँ चढ़ाएं:मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि । पशुनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।
11. पुष्प (फूल अर्पण)
कमल या लाल फूलों की माला अर्पित करें:कर्दमेन प्रजा भूता मयि संभव कर्दम । श्रियम वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।।
धूप, दीप और नैवेद्य विधि
12. धूप
सुगंधित धूपबत्ती प्रज्वलित करें:आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस् मे गृहे । नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।।
13. दीप (दीपक दर्शन)
घी का दीपक जलाकर माता को दिखाएं:आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंडगलां पदमालिनीम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह ।।
14. नैवेद्य (भोग अर्पण)
मिठाई और फल का भोग लगाएं:आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् । सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह ।।
15. दक्षिणा, आरती एवं पुष्पांजलि
दक्षिणा अर्पित करें और आरती के बाद पुष्पांजलि दें:तां म आवह जातवेदो लक्ष्मी मन पगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ।।
16. नमस्कार
अंत में माता को प्रणाम कर क्षमा याचना करें:यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् । सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत् ।।
निष्कर्ष: दिवाली की रात जो भी भक्त इस षोडशोपचार विधि से माता लक्ष्मी की आराधना करता है, उसके घर में सुख, शांति और स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।


