दिवाली के दिन कैसे करें माता महालक्ष्मी की षोडोपचार पूजा?

दिवाली के दिन कैसे करें माता महालक्ष्मी की षोडोपचार पूजा?

साल 2025 में दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। कार्तिक अमावस्या के प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजा का विशेष विधान है। बहुत से लोग घर पर महालक्ष्मी की पूजा करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसकी संपूर्ण विधि की जानकारी नहीं होती। यहाँ हम विस्तार से षोडशोपचार पूजा विधि (16 चरणों वाली पूजा) बता रहे हैं।

महालक्ष्मी षोडशोपचार पूजा: प्रथम चरण (आह्वान और अर्पण)

1. आवाहनम् (आमंत्रण)

माता लक्ष्मी का इस मंत्र से आह्वान करें:
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।
अर्थ: हे अग्निदेव, सोने के समान चमकने वाली, चंद्रमा के समान शीतल और प्रकाशमान महालक्ष्मी को मेरे घर बुलाएं।

2. आसनम् (आसन का अर्पण)

माता को बैठने के लिए आसन भेंट करें:
ॐ तां म आ व ह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ।।
अर्थ: हे अग्निदेव, उन लक्ष्मी जी को बुलाएं जिनके आने से मुझे स्वर्ण, गौ और उत्तम ऐश्वर्य की प्राप्ति हो।

3. पद्यं (पैर धोना)

माता के चरण पखारने के लिए जल अर्पित करें:
ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनाद्प्रमोदिनीम् । श्रियम् देवीमुप ह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।

महालक्ष्मी पूजन: मुख्य षोडशोपचार विधि

4. अर्घ्यम् (जल का अर्पण)

हाथों में जल लेकर मां को अर्घ्य दें:
ॐ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् । पद्मेस्थितां पदमवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।

5. आचमन (शुद्धिकरण)

शुद्धि के लिए आचमन कराएं:
ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्ती श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् । तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।

6. स्नान

माता को जल से स्नान कराएं:
ॐ आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः । तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्य अलक्ष्मीः ।।

7. वस्त्र (परिधान अर्पण)

माता को वस्त्र अर्पित करें:
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह । प्रदुभुर्तॉऽस्मि रास्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिंमृद्धिम ददातु मे ।।

महालक्ष्मी श्रृंगार और गंध अर्पण

8. उपवस्त्र (चोली अर्पण)

माता को उपवस्त्र चढ़ाएं:
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठमलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् । अभूतिमसमृद्धि च सर्वां निर्गुद में गृहात् ।।

9. गंध (चन्दन अर्पण)

सुगंधित चंदन अर्पित करें:
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् । ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोप हवये श्रियम् ।।

10. सौभाग्यद्रव्य (सिन्दूर आदि)

माता को सौभाग्य की वस्तुएं जैसे सिन्दूर और चूड़ियाँ चढ़ाएं:
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि । पशुनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।

11. पुष्प (फूल अर्पण)

कमल या लाल फूलों की माला अर्पित करें:
कर्दमेन प्रजा भूता मयि संभव कर्दम । श्रियम वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।।

धूप, दीप और नैवेद्य विधि

12. धूप

सुगंधित धूपबत्ती प्रज्वलित करें:
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस् मे गृहे । नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।।

13. दीप (दीपक दर्शन)

घी का दीपक जलाकर माता को दिखाएं:
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंडगलां पदमालिनीम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह ।।

14. नैवेद्य (भोग अर्पण)

मिठाई और फल का भोग लगाएं:
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् । सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह ।।

15. दक्षिणा, आरती एवं पुष्पांजलि

दक्षिणा अर्पित करें और आरती के बाद पुष्पांजलि दें:
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मी मन पगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ।।

16. नमस्कार

अंत में माता को प्रणाम कर क्षमा याचना करें:
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् । सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत् ।।

निष्कर्ष: दिवाली की रात जो भी भक्त इस षोडशोपचार विधि से माता लक्ष्मी की आराधना करता है, उसके घर में सुख, शांति और स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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