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साल में 12 पूर्णिमा होती है, लेकिन इन सभी में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। शरद पूर्णिमा महोत्सव हिंदू महीने अश्विन में मनाया जाता है। अश्विनी महीने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। कई जगह इस पूर्णिमा कोजागिरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह विशेष पर्व महालक्ष्मी की आराधना का पर्व है। इस दिन कई जगहों पर रात्रि में चंद्रमा को खीर का भोग लगाने की परंपरा भी है। शरद ऋतु की शुरुआत शरद पूर्णिमा से ही होती है।
शरद पूर्णिमा बुधवार, अक्टूबर 16, 2024
शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय - 05:13 पी एम (अलग-अलग शहरों में समय में कुछ अंतर हो सकता है)
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 16, 2024 को 08:40 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अक्टूबर 17, 2024 को 04:55 पी एम बजे
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पूरी सोलह कलाओं से युक्त होता है। कहते हैं इस दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत होता है। इसकी चांदनी में खीर या दूध रखने से उसमें कई तरह के पौष्टिक गुण उत्पन्न होते हैं। शरद पूर्णिमा पर महालक्ष्मी की पूजा जरूर करना चाहिए। भगवान शिव के मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है। शरद पूर्णिमा पर रात के समय चंद्रमा को देखने और चंद्रमा के मंत्रों के जाप से समस्त प्रकार के सुख और वैभव मिलते हैं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में शरद पूर्णिमा को रासलीला की रात कहा गया है। इस रात्रि में चंद्रमा की चमत्कारी किरणों में दिव्य भक्ति का नृत्य किया जाता है। मान्यता है कि सबसे पहले श्रीकृष्ण भगवान के साथ यह भक्ति नृत्य बृज की गोपियों ने किया था। महारास में भाग लेने से समस्त कार्यों की सिद्धि होती है। इस रात्रि में कृष्ण भगवान के विशेष मंत्रों के जाप और भजनों को गाने से सभी प्रकार की खुशियां प्राप्त होती है।
शरद पूर्णिमा पर व्रत रखकर माता लक्ष्मी की आराधना करने से समस्त प्रकार के सुख और वैभव प्राप्त होते हैं। यदि आप शरद पूर्णिमा का व्रत रख रहे हैं, तो कुछ ये बातें जरूर अपनानी चाहिए।
- सुबह उठकर व्रत का संकल्प लें।
- स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहनें।
- दिन में केवल एक बार फलाहार करें।
- शाम के समय शिव मंदिर में दीपदान करें।
- सूर्यास्त के बाद महालक्ष्मी का सफेद फूलों से पूजन करें।
- महालक्ष्मी के किसी भी मंत्र का 108 पाठ करें।
- श्री सुक्त का पाठ करें।
- रात में चंद्रमा की रोशनी में ललिता सहस्रावली का पाठ करें। या महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें।
शरद पूर्णिमा को नेपाल, उप्र, बंगाल, बिहार, आसाम आदि क्षेत्रों में कोजागर पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन नव विवाहित महिलाएं विशेष रूप से तैयार होकर माता लक्ष्मी की पूजा करती है। परिवार के लोग रात्रि जागरण करके माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं और उनके लिए भक्ति गीत गाते हैं। मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी चंद्रमा की रोशनी में पृथ्वी भ्रमण करती हैं और जो व्यक्ति जागता हुआ मिलता है, माता उस पर प्रसन्न होकर उसे धन, धान्य का आशीर्वाद देती हैं।
