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शुक्र को वैदिक ज्योतिष में सबसे शुभ ग्रहों में से एक माना गया है। इसके प्रभाव से व्यक्ति भौतिक, शारीरिक सुख और समस्त प्रकार ऐश्वर्य प्राप्त होते हैं। शुक्र वैवाहिक जीवन, प्रेम जीवन, शौहरत, भोग विलास, सौंदर्य, कला, काम वासना और कपड़ों का कारक माना जाता है। 12 राशियों में से शुक्र वृषभ और तुला का स्वामी है। मीन में शुक्र उच्च राशि का होता है और कन्या शुक्र की नीच राशि है। यदि नक्षत्रों की बात करें, तो भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त होता है। शुक्र, शनि और बुध के अति मित्र माने जाते हैं। प्रत्येक राशि में शुक्र 24-35 दिनों तक रहते हैं।
शुक्र के कारण व्यक्ति के आकर्षण और व्यक्तित्व को भी देखा जाता है। शुक्र यदि कुंडली में अच्छे हैं, तो व्यक्ति बेहद आकर्षक होता है। वह सभी के आकर्षण का केंद्र जल्दी बन जाता है। शुक्र के प्रभाव से मनुष्य कला के क्षेत्र में काफी उन्नति करता है। फैशनेबल कपड़े पहनने का उसे काफी शौक होता है। व्यक्ति भोग विलास, काम वासना आदि में काफी रुचि रखता है। यदि कुंडली में शुक्र अच्छा है, तो व्यक्ति गायन, वादन, नृत्य आदि में भी काफी दिलचस्पी रखता है।
बली शुक्र - बली शुक्र व्यक्ति के जीवन में कभी भी प्रेम की कमी नहीं होने देता है। ऐसा व्यक्ति लोगों का चहेता होता है। व्यक्ति भौतिक सुखों का आनंद लेता है। शुक्र के कारण व्यक्ति का जीवन बेहद विलासिता से गुजरता है।
पीड़ित शुक्र - पीड़ित शुक्र के कारण व्यक्ति के जीवन में वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती है। व्यक्ति के कपड़े हमेशा गंदे रहते हैं। बाल बिखरे हुए रहते हैं। यदि शुक्र कमजोर हैं तो व्यक्ति काफी ज्यादा शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट व्यक्ति को हो सकते हैं। शुक्र के बुरे प्रभाव से बचने के लिए व्यक्ति को महिलाओं का काफी सम्मान करना चाहिए। महिलाओं का दिल दुखाने से शुक्र कुंडली में कमजोर होते हैं।
कार्यक्षेत्र - कला, नृत्य, इवेंट मैनेजमेंट, कपड़ा व्यवसायी, रेस्टोरेंट, ट्रेवल, फिल्म, थिएटर आदि।
उत्पाद - ज्वैलरी, हवाई जहाज, इत्र, परफ्यूम, शक्कर, शिप, हवाई जहाज, खिलौने आदि।
स्थान - बेडरूम, सिनेमाघर, बगीचे, हवाई अड्डा, हीरे की खदान आदि।
रोग - किडनी, सेक्सुअल डीसीज आदि।
रुद्राक्ष - 6 मुखी
रत्न - हीरा
शुक्र का तांत्रिक मंत्र
ॐ शुं शुक्राय नमः
शुक्र का बीज मंत्र
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
शुक्र को दैत्यों का गुरु माना जाता है। भागवत पुराण के अनुसार शुक्र महर्षि भृगु के पुत्र हैं। इनका एक नाम भार्गव भी है। शुक्र बेहद खूबसूरत और घोड़े पर बैठे हुए चित्रांकित किया जाता है। यदि आप धन, वैभव, प्रेम और ऐश्वर्य की कामना करते हैं, तो शुक्रवार को व्रत आदि कर सकते हैं। महालक्ष्मी की स्तुति से भी शुक्र प्रसन्न होते हैं।
