
जन्माष्टमी 2025 - त्यौहार का महत्व, तारीख और कृष्ण कथा

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पूजा
जन्माष्टमी 2025 - त्यौहार का महत्व, तारीख और कृष्ण कथा
भारतीय उत्सवों में जन्माष्टमी ऐसा विशेष उत्सव है जिसकी धूम चारों ओर रहती है। देश कृष्ण भक्ति में डूबा रहता है। भाद्रपद महीने की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। श्रीकृष्ण को एक नटखट बालक, एक प्रेमी, एक सखा, एक राजनीतिज्ञ, एक गुरु और ईश्वर के रूप में पूजा जाता है।
इस कब है कृष्ण जन्माष्टमी ?
सबसे पहले बात करते हैं कि साल 2025 में कृष्ण जन्माष्टमी की। इस साल जन्माष्टमी का त्यौहार शनिवार 16 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। कहते हैं श्रीकृष्ण का जन्म आज से लगभग साढ़े पांच हजार साल पहले हुआ था। गुजरात में सावन के महीने में जन्माष्टमी पर्व मनाया जाता है। मथुरा, वृंदावन, जगन्नाथपुरी, द्वारका और बद्रीनाथ में जन्माष्टमी की विशेष धूम रहती है।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की तारीख – 16 अगस्त, सोमवार 2025
पूजा का समय – रात 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक
कृष्ण जन्म की कथा (story of krishna’s life)
कहते हैं जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ गया था, तब भगवान विष्णु ने मानव रूप में अवतार लिया था। यह भगवान विष्णु का आठवां अवतार था। भगवान कृष्ण ने केवल कंस को मारने के उद्देश्य से अवतार नहीं लिया था। उनका उद्देश्य पृथ्वी पर दोबारा धर्म की सत्ता को कायम करना था और यह कार्य उन्होंने पांडवों के साथ मिलकर किया। भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में कंस के कारागार में हुआ। तेज बारीश के बीच नन्हे कृष्ण को गोकुल ले जाया गया। वहां माता यशोदा और नंदजी ने कृष्ण का पालन पोषण किया। जब कृष्ण थोडे़ बड़े हुए तब कंस को मारने के लिए उन्होंने मथुरा की ओर प्रस्थान किया। उन्होंने कारागर से माता-पिता और नाना को छुड़वाया। इसके बाद असली यात्रा शुरू हुई। वे उज्जैन के सांदिपनी आश्रम में पढ़ने के लिए गए। कौरवों ने जब अत्याचार शुरू किया, तब उन्होंने पांडवों का साथ दिया। युद्ध भूमि में अर्जुन गीता का उपदेश दिया। कई राक्षसों और क्रूर राजाओं को उन्होंने मारा और लोगों को शांति से धर्म के मार्ग पर चलने की सीख दीं।
कैसे मनाई जाती है जन्माष्टमी
देश के ज्यादातर हिस्सों में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। लोग इस दिन व्रत रखकर कृष्ण मंदिर में भगवान के दर्शन करते हैं। ज्यादातर मंदिरों में रात 12 बजे विशेष आरती का आयोजन होता है। इस दौरान कृष्ण का अभिषेक और पंचोपचार पूजा की जाती है। घरों में गीता पाठ किया जाता है, श्रीमद्भागवत तथा भागवत पुराण का पाठ किया जाता है। इनके अलावा बहुत से लोग “हरे राम, हरे कृष्णा” तथा “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:” जैसे बहुत से मंत्रों का जप भी करते हैं। दक्षिण भारत में इस त्यौहार को गोकुल अष्टमी कहा जाता है। श्रीकृष्ण की विशेष पूजा के साथ कई तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं।
आप कैसे करें श्री कृष्ण पूजा
जन्माष्टमी के दिन कृष्ण या बाल गोपाल की मूर्ति को जल, दूध, दही, शहद और पंचामृत से अभिषेक करें। पीले रंग के वस्त्र श्री कृष्ण को पहनाएं। राधा की मूर्ति हों, तो उनका भी श्रृंगार करें। भगवान कृष्ण को मिठाइयों को भोग लगाएं। भगवान के पास शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें। घर में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। रात 12 बजे भगवान की विशेष आरती के बाद उपवास करें।
कृष्ण पूजा से ग्रह शांति
कहते हैं भगवान कृष्ण की पूजा करने से पितृदोष का प्रभाव कम हो जाता है। वैदिक ज्योतिष में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि जन्मकुंडली में पितृदोष की स्थिति होने पर भगवद् गीता का पाठ करना चाहिए। इसके अलावा गुरु ग्रह के लिए ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र के साथ 1008 बार माला जपें। वैदिक ज्योतिष में इस मंत्र का उपयोग लगभग हर ग्रह दोष के निवारण के लिए किया जाता है।
भगवान श्री कृष्ण के अन्य मंत्र
ओम् गोविंदाय नम:।।
ओम क्लीं कृष्णाय नम:।।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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