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कुंडली में बनने वाले दोषों में कालसर्प दोष को सबसे अधिक बुरा माना गया है। कहते हैं जिसकी कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उसके जीवन से समस्याएं समाप्त ही नहीं होती है। इस दोष के कारण कई बार जॉब या बिजनेस में नुकसान होता है या फिर बार-बार आर्थिक संकट आते हैं। कई बार काम भी लटका रहता है और लंबे समय तक सफलता नहीं मिलती है। इस दोष के दुष्प्रभाव में कमी की जा सकती है।
कुंडली में जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं, तो कालसर्प दोष बनता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ 12 प्रकार के कालसर्प दोष मानते हैं, लेकिन कुछ जगहों पर ऐसा नहीं है। 12 प्रकार के कालसर्प दोष राहु और केतु की कुंडली में स्थिति के कारण बनती है। कालसर्प दोष होने पर उसकी शांति करवाना ही एकमात्र उपाय रहता है।
जब कुंडली में कालसर्प दोष होने का पता चलता है, तो उसका उपाय केवल पूजा समाधान ही हो सकता है। यह पूजा ज्योतिर्लिंग तीर्थ क्षेत्र में करवाना काफी लाभदायक रहता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, महाकाल ज्योतिर्लिंग, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य जगहों यह पूजा की जाना अच्छा और शीघ्रफलदायक माना जाता है। इसके अलावा कुछ अन्य सामान्य उपाय हैं, जिनका ध्यान रखा जाना चाहिए -
1. प्रतिदिन शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
2) प्रदोष, मासिक तिथि, जन्म नक्षत्र पर रुद्राभिषेक करवाएं।
3) प्रतिदिन घर में घी का दीपक प्रज्वलित करें।
4) रोजाना ऊँ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना लाभदायक रहता है।
5)आप श्री राम मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
6) कहते हैं कालसर्प से पीड़ित व्यक्ति को अपने घर में मोरपंख रखने चाहिए।
1. कालसर्प दोष निवारण पूजा से कालसर्प दोष दुष्प्रभाव कम हो जाता है।
2. जीवनसाथी के साथ चल रहा तनाव दूर हो जाता है।
3. घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है।
4. नौकरी या व्यापार में आने वाली समस्याएं कम होने लगती है।
5. बहुत दिनों से लंबित काम में गति आने लगती है और सफलता मिलती है।
6. आर्थिक नुकसान से बचने लग जाते हैं।
