
1246
सावन का महीना त्यौहारों का महीना है। सावन वैसे तो शिव पूजा का पर्व है, लेकिन इस महीने में महाविष्णु की पूजा भी अत्यधिक फलदायी होती है। एकादशी पर्व भगवान विष्णु की पूजा का दिन है। ऐसे में सावन में आने वाली एकादशी का विशेष महत्व हो जाता है। सावन के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल कामिका एकादशी का व्रत 31 जुलाई 2024 को मनाया जाएगा। कामिका एकादशी के व्रत से इच्छित फलों की प्राप्ति होती है।
कामिका एकदाशी से जुड़ी कथा के अनुसार एक गांव में कोई क्रोधी व्यक्ति रहता था। एक दिन उसका किसी ब्राह्मण से झगड़ा हो गया। क्रोध में आकर व्यक्ति ने ब्राह्मण की हत्या कर दी। ब्रह्महत्या के पाप से वह दुखी हो गया और पश्चाताप के कारण वह अन्य उसका अंतिम संस्कार और श्राद्ध करने के बारे में सोचने लगा, लेकिन अन्य ब्राह्मणों ने उस व्यक्ति का परित्याग कर दिया। दुख में आकर व्यक्ति ऋषि के पास गया और उसका निवारण व उपाय जानना चाहा। इस पर ऋषि ने उसे कामिका एकादशी पर व्रत करने को कहा। ऋषि के कहे अनुसार उसे कामिका एकादशी का व्रत किया। कहते हैं इसके बाद भगवान ने स्वप्न में उसे दर्शन दिए और ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत के प्रभाव से शिव और विष्णु दोनों ही प्रसन्न होकर समस्त पापों से मुक्त कर देते हैं.
– एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
– भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें और भगवान को फल, फूल, नेवैद्य का भोग लगाएं।
– इसके बाद भगवान विष्णु के किसी भी मंत्र का 108 बार जाप करें।
– व्रत के दौरान निर्जल दिनभर भगवान विष्णु की स्तुति करें।
- हो सकें तो विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
– यदि आप पूरी तरह से निराहार नहीं रह सकते हैं, तो शाम के समय भोजन कर सकते हैं। हालांकि एकादशी का पारण दूसरे दिन होता है।
– भगवान विष्णु के मंदिर में दान दें।
- किसी पौधे को लगाकर उसे बड़ा करें।
31 जुलाई 2024 गुरुवार
एकादशी तिथि प्रारम्भ - जुलाई 30, 2024 को 04:44 पी एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त - जुलाई 31, 2024 को 03:55 पी एम बजे
