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वैदिक ज्योति, में केतु को आध्यात्म का ग्रह माना जाता है। हालांकि केतु को पाप ग्रह की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन केतु हमेशा ही अशुभ फल दें यह जरूरी नहीं है। केतु को ज्योतिष में आध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, एकांत, तंत्र-मंत्र, ईश्वर भक्ति आदि का कारक माना जाता है। केतु किसी राशि का स्वामित्व नहीं रखता है, लेकिन कुछ मान्यताओं के अनुसार यह धनु राशि में उच्च और मिथुन राशि में नीच का फल देता है। अश्विनी, मघा और मूल केतु के नक्षत्र हैं। इन नक्षत्रों को अशुभ माना जाता है और जो बच्चा इस नक्षत्र में पैदा होता है, उसकी शांति करवाना आवश्यक है।
केतु के कारण ही किसी की कुंडली में कालसर्प दोष का निर्माण करता है। यदि केतु गुरु के साथ हो, तो कई विद्वान इसे चांडाल दोष और शनि के साथ होने पर शापित दोष कहते हैं। इन दोनों ही दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में कई तरह की समस्याएं आती है।
केतु की अपनी कोई राशि नहीं है, वह जिस राशि और ग्रह के साथ बैठता है, उसी के गुण केतु में आ जाते हैं। केतु यदि कुंडली के प्रथम भाव में हो, तो व्यक्ति को एकांत प्रिय बनाता है। ऐसा व्यक्ति भौतिक साधनों से दूर रहना पसंद करता है। ऐसा व्यक्ति शंकालु प्रवृत्ति का होता है। कई बार डरपोक किस्म का होता है।
बली केतु- केतु तीसरे, पांचवें, षष्टम, नवम और द्वादश में हमेशा अच्छे फल देता है। कुछ विद्वान कहते हैं केतु के साथ गुरु की युति बनती है, तो चांडाल दोष बना है, लेकिन कई जगह इसे राजयोग कारक भी कहा गया है। दरअसल ऐसा व्यक्ति आध्यात्मिक क्षेत्र में काफी उन्नति करता है। केतु यदि मंगल के साथ हों, तो साहस में वृद्धि करता है।
पीड़ित केतु - केतु यदि पीड़ित हो, तो कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति के सामने किसी ना किसी तरह की बाधा आती रहती है। व्यक्ति जो निर्णय लेता है, उसमें असफलता का सामना करना पड़ता है। केतु यदि कमजोर हो, तो व्यक्ति के मामा परिवार में समस्या बनी रहती है।
कार्यक्षेत्र- आध्यात्मिक क्षेत्र, समाज सेवा
रत्न- लहसुनिया
रंग- भूरा
अंकशास्त्र नंबर -7
मंत्र -
केतु का तांत्रिक मंत्र
ॐ कें केतवे नमः
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
केतु का जन्म समुद्र मंथन के बाद हुआ। जब राक्षस स्वरभानु ने देवताओं की पंक्ति आकर अमृत पान कर लिया। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन से स्वरभानु का गला का काट दिया। इसके बाद उसका धड़ केतु कहलाया। केतु राक्षस का भाग होने के बावबूद भी आध्यात्मिक ग्रह है। यदि केतु अच्छा है, तो व्यक्ति बड़ा आध्यात्मिक गुरु भी बन सकता है।
