केतु ग्रह - राक्षसी उत्पत्ति के बावजूद मोक्ष का कारक क्यों माना जाता है?

केतु ग्रह - राक्षसी उत्पत्ति के बावजूद मोक्ष का कारक क्यों माना जाता है?

केतु ग्रह - राक्षसी उत्पत्ति के बावजूद मोक्ष का कारक क्यों माना जाता है?

ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि जहाँ राहु भोग, मोह, और इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं केतु त्याग, वैराग्य और मोक्ष का। ज्योतिष शास्त्र में केतु को भले ही एक छाया ग्रह कहा गया है, लेकिन यह रहस्यमयी, आध्यात्मिक और अप्रत्याशित परिणाम देने वाला होता है। केतु भले ही एक राक्षस का अंश रहा है, लेकिन वह मोक्ष (मुक्ति) का कारक भी है। क्यों, चलिए इसे पौराणिक कथा और ज्योतिषीय दृष्टि से इसे समझते हैं...केतु का जन्म

कैसे हुए केतु का जन्म

पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के बाद जब देवताओं को अमृत पिलाया जा रहा था, तो स्वरभानू नामक एक दैत्य ने छलपूर्वक देवताओं की पंक्ति में बैठकर अमृत पी लिया। भगवान विष्णु ने जब यह देखा, तो उन्होंने सुदर्शन चक्र से उसका सिर अलग कर दिया। सिर वाला भाग बन गया राहु और धड़ वाला भाग कहलाया केतु। इस प्रकार केतु की उत्पत्ति दैत्य योनि से हुई। इसलिए कहा जाता है कि वह “राक्षस ग्रह” है।

केतु और मोक्ष का संबंध

केतु का राक्षस होना यहाँ नकारात्मक नहीं बल्कि भौतिकता और भ्रम का प्रतीक है। केतु की राक्षसी उत्पत्ति के बावजूद, उसमें दैवीय गुणों का भी समावेश है क्योंकि उसने अमृत का एक भाग पी लिया था। उसमें भौतिकता (दैत्यत्व) और आध्यात्मिकता (अमृत) दोनों के तत्व हैं। ज्योतिष के अनुसार केतु हमारे पिछले जन्मों के कर्मों का फल दिखाता है और उनसे सीखने का अवसर देता है। केतु जिस भाव में बैठता है, वहाँ से व्यक्ति को भौतिक सुखों से अलग कर देता है।

केतु दिखाता है वास्तविक सुख

केतु जीवन में कठिनाइयां देता है, लेकिन इन्हीं कठिनाइयों से व्यक्ति परिपक्व होती है। यह अलगाव और मुश्किल हालात ही वैराग्य और मोक्ष की पहली सीढ़ी है। इस तरह से केतु त्याग, विरक्ति, और आत्मज्ञान का प्रतीक बन गया। केतु सिखाता है कि सबकुछ अनुभव कर लेने के बाद आसक्ति से मुक्ति कैसे पाएँ। यह दिखाता है कि बाहरी दुनिया अस्थायी है, वास्तविक सुख भीतर है। वह आत्मा को भ्रम से सत्य की ओर ले जाता है। केतु यह भी सिखाता है कि सफलता या असफलता से भी व्यक्ति ऊपर उठ सकता है, यदि वह उसे आध्यात्मिक अनुभव के रूप में देखें। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में केतु शुभ स्थिति में होता है, तो वह व्यक्ति भीतर से गहराई से वैराग्यवान बन जाता है, उसे जीवन की क्षण भंगुरता का बोध होता है और वह मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होता है। कहा गया है कि राहु भौतिक इच्छाओं का प्रतीक है, जबकि केतु उनसे मुक्ति का। राहु बाँधता है, केतु मुक्त करता है।

कुंडली में केतु को मजबूत कब करें ?

केतु से उत्पन्न परेशानियों को दूर करने के लिए ये उपाय करें -
  • भगवान गणेश की पूजा करें – गणपति की आराधना केतु को शांत करती है।
  • संतानों से संबंध मधुर रखें – ज्योतिष में संतान को केतु से जोड़ा गया है।
  • काले-सफेद दोरंगे कंबल का दान करें – मंदिर या गरीब को यह दान शुभ माना गया है।
  • कुत्तों को रोटी खिलाएं – यह सरल उपाय केतु की शांति में अत्यंत प्रभावी है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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