
ललिता जयंती 2026 - माघ पूर्णिमा पर कैसे करें मां की पूजा

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ज्योतिष
ललिता जयंती के दिन देवी के राजराजेश्वरी महात्रिपुरसुंदरी स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से साधक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। हर साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर ललिता जयंती मनाई जाती है। माता ललिता असल में दस महाविद्याओं में से तीसरी महाविद्या हैं और यह दिन उनके अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
ललिता जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
मां ललिता को राजेश्वरी, षोडशी और त्रिपुर सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है। साल 2026 में ललिता जयंती की महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 फरवरी को सुबह 5 बजकर 53 मिनट से।
- पूर्णिमा तिथि समापन: 2 फरवरी को शाम 03 बजकर 22 मिनट पर।
- मुख्य तिथि: ललिता जयंती (षोडशी जयंती) रविवार, 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।
ललिता जयंती की सरल पूजा विधि
देवी ललिता की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन साधकों को निम्नलिखित पूजा विधि का पालन करना चाहिए:
- स्नान और वस्त्र: सूर्यास्त से पहले उठें और स्नान के पश्चात सफेद रंग के वस्त्र धारण करें।
- स्थापना: पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें। एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर मां ललिता की तस्वीर या श्रीयंत्र की स्थापना करें।
- भोग और अर्पण: देवी को कुमकुम, अक्षत, फल-फूल और विशेष रूप से दूध से बनी खीर अर्पित करें।
- पाठ और आरती: अंत में देवी ललिता की कथा का पाठ करें और आरती उतारें।
- प्रसाद वितरण: पूजा के बाद छोटी कन्याओं में प्रसाद बांटना अत्यंत शुभ माना जाता है।
मां ललिता: तीसरी महाविद्या का स्वरूप और महत्व
देवी पुराण के अनुसार, माता ललिता की पूजा से भक्तों को मोक्ष और सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। मां ललिता के बारे में कुछ विशेष तथ्य:
- प्रचलित नाम: उन्हें कामेश्वरी, ललिताम्बिका, कामाक्षी और महात्रिपुरसुंदरी जैसे नामों से पूजा जाता है।
- कामाख्या स्वरूप: कामाख्या क्षेत्र में मां को कामाख्या के स्वरूप में पूजा जाता है।
- प्रमुख पाठ: मां की आराधना में ललिता सहस्रनाम और ललिता त्रिशती का पाठ विशेष फलदायी होता है।
- श्रीविद्या: मां ललिता को श्रीविद्या की प्रमुख देवी माना जाता है और इनकी पूजा अक्सर तांत्रिक पद्धति से की जाती है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
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