शनि देव इतने महत्वपूर्ण क्यों है ? जानिए कुछ खास बातें

शनि देव इतने महत्वपूर्ण क्यों है ? जानिए कुछ खास बातें

शनि देव इतने महत्वपूर्ण क्यों है ? जानिए कुछ खास बातें

वैदिक ज्योतिष में शनि को सबसे महत्वपूर्ण ग्रहों में से एक माना गया है। शनि दो राशि मकर और कुंभ के स्वामी है। ज्योतिष में शनि को कर्म के स्वामी कहा गया है। शनि प्रत्येक ढाई साल में राशि बदलते हैं और हाल ही राशि बदलकर कुंभ राशि से मीन राशि में पहुंचे हैं। शनि को बिजनेस, नौकरी, आयु, रोग, पीड़ा, ज्ञान, तकनीक, लोहा, तेल, कर्मचारी सेवक आदि का कारक माना जाता है। शनि तुला राशि में उच्च और मेष राशि में नीच का फल देता है। शनि सबसे धीरे चलने वाला ग्रह कहा जाता है। यह एक राशि में करीब ढाई साल तक रहता है।

साढ़ेसाती होती है खतरनाक

आमतौर पर शनि ग्रह की साढ़ेसाती से लोग परेशान रहते हैं। दरअसल नवग्रह में केवल शनि ही है, जिनका राशि परिवर्तन करने पर असर करीब साढ़े सात साल रहता है। उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की शनि की साढ़ेसाती की कहानी प्रसिद्ध है। जब शनि किसी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस राशि पर, उससे एक राशि आगे और एक राशि पीछे शनि का असर होता है, जिसे साढ़ेसाती कहते हैं। शनि की साढ़ेसाती सात साल तक चलती है। कई लोग इसे परेशान करने वाला समय कहते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यह समय व्यक्ति को केवल मेहनत करने, धैर्य से काम करने और जल्दबाजी में फल की चिंता नहीं रखने वाला समय रहता है।

कर्म का फल देते हैं शनिदेव

अक्सर शनि को ज्योतिष में नकारात्मक ग्रह की संज्ञा दी जाती है, लेकिन वास्तव में शनि पूरी तरह से नकारात्मक ग्रह नहीं है। शनि न्याय का कारक है, इसका सीधा मतलब यही है कि आप जितनी मेहनत करते हैं, वास्तव में शनि आपको उतना ही लाभ देता है। शनि यदि कुंडली में बेहद शुभ हो, तो कभी किसी बात की परेशानी नहीं आने देता है। पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद शनि के नक्षत्र हैं। इनमें पुष्य नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र कहा जाता है। यदि आपको कुंडली में शनि से बेहतर परिणाम चाहिए, तो आपको अपने अधीनस्थ काम करने वालों का सम्मान करना चाहिए। शनि कर्म के देवता है। यहां स्पष्ट है कि आप जैसा व्यवहार दूसरों से करेंगे, शनि आपसे ठीक वैसा ही व्यवहार करेंगे।

शनि का कुंडली में प्रभाव

ज्योतिष में शनि यदि कुंडली के पहले भाव में हो, तो सामान्यत: इसे अनुकूल नहीं माना जाता है। लग्न भाव में शनि जातक को आलसी, सुस्त बना देता है। कई बार ऐसे व्यक्ति का रंग सांवला होता है और व्यक्ति एकांत में रहना पसंद करता है। व्यक्ति के बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार शनि तीसरे और ग्यारहवें भाव में अच्छा माना जाता है। वहीं शनि की कुछ ग्रहों से युति भी बेहद खराब मानी जाती है। यदि शनि चंद्रमा के साथ हो, तो विष दोष बनाता है और शनि राहु के साथ हो, तो पिशाच दोष बनता है। शनि केतु के साथ शापित दोष बनाता है। इस तरह शनि के दोष कई तरह के नकारात्मक असर देते हैं। यदि कुंडली में शनि स्व राशि, उच्च राशि या मित्र राशि में हो, तो अच्छे परिणाम देता है। यह शनि लोगों को न्यायप्रिय बनाता है। वहीं व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में भी अच्छी सफलता दिलाने वाला माना जाता है। कुंडली का अच्छा शनि व्यक्ति को समस्त सुख और वैभव देता है। व्यक्ति को बीमारियों से बचने की शक्ति देता है।

अशुभ शनि का असर भी बुरा

कुंडली में शनि अशुभ हो, तो सबसे पहली दिक्कत नौकरी और बिजनेस में आती है। वहीं कमजोर शनि कुंडली में दुर्घटना और जेल के योग भी बना देता है। कमजोर शनि से बचने के प्रयास करते रहना चाहिए और व्यक्ति को गलत कार्यों से दूर रहना चाहिए।

सूर्य पुत्र हैं शनि

कलियुग में शनिदेव नवग्रहों में सबसे ज्यादा पूजे जाते हैं। शनिदेव को सूर्यपुत्र कहा जाता है। हालांकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य और शनि आपस में अच्छे संबंध नहीं रखते हैं। दरअसल इसे वैज्ञानिक दृष्टि से भी समझना चाहिए कि सूर्य एक गर्म ग्रह है और शनि अत्यधिक ठंडा। दोनों का संबंध एक-दूसरे के लिए विनाशकारी ही होगा। हालांकि जब सूर्य शनि की राशि मकर में जाते हैं, तो मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाता है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण भी करते हैं।

एक नजर शनि और उसके कारकों पर

  • कार्यक्षेत्र- तेल से जुड़ा व्यापार, ऑटोमोबाइल, मजदूर, आदि प्रोडक्ट - मशीन, चमड़ा, काले तिल, समस्त तेल, कोयला, चमड़े के सामान आदि रत्न - नीलम रुद्राक्ष - सात मुखी यंत्र - शनि यंत्र।
  • मंत्र - शनि का तांत्रिक मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः।।
  • शनि का बीज मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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