
अन्नपूर्णा जयंती - माता के दो मंदिर है बेहद प्रसिद्ध

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हिंदू धर्म में अन्नपूर्णा जयंती का विशेष महत्व है। माँ अन्नपूर्णा को भोजन, पोषण और समृद्धि की देवी माना जाता है। हर साल मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन उनकी पूजा और व्रत किया जाता है ताकि घर में कभी अन्न और धन की कमी न हो। माँ अन्नपूर्णा वास्तव में माता पार्वती का ही स्वरूप हैं, जिन्होंने संसार के पोषण के लिए यह रूप धारण किया था।
अन्नपूर्णा जयंती 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अन्नपूर्णा जयंती 4 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी। तिथि का विवरण इस प्रकार है:
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 दिसंबर 2025, सुबह 08:37 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 5 दिसंबर 2025, सुबह 04:43 बजे
- व्रत और पूजा: उदय तिथि के अनुसार 4 दिसंबर को ही जयंती मनाई जाएगी।
अन्नपूर्णा जयंती का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि इस दिन माँ अन्नपूर्णा की विधि-विधान से पूजा करने पर घर के भंडार हमेशा भरे रहते हैं। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और देवी से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। माँ अन्नपूर्णा न केवल शारीरिक भूख शांत करती हैं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान और धैर्य की भी देवी हैं।
माँ अन्नपूर्णा के दो सबसे प्रसिद्ध मंदिर
भारत में माँ अन्नपूर्णा के कई मंदिर हैं, लेकिन काशी और इंदौर के मंदिरों की महिमा निराली है।
1. माँ अन्नपूर्णा मंदिर, काशी (Varanasi)
वाराणसी (काशी) में स्थित माँ अन्नपूर्णा का मंदिर अत्यंत प्राचीन और सिद्ध माना जाता है। इसका नाता सीधा भगवान विश्वनाथ से है।
- श्रीयंत्र की संरचना: यह देश का इकलौता मंदिर है जो 'श्री यंत्र' के आकार में निर्मित है। मंदिर के कोण मिलाने पर प्राकृतिक रूप से श्रीयंत्र की आकृति बनती है।
- शिव ने मांगी थी भिक्षा: पुराणों के अनुसार, स्वयं भगवान शिव ने संसार के कल्याण के लिए माँ अन्नपूर्णा से अन्न की भिक्षा मांगी थी। यहाँ भक्त स्वर्णमयी माता और भिक्षा मांगते शिव की रजत प्रतिमा के दर्शन करते हैं।
- स्वर्णमयी दर्शन: वर्ष में केवल चार दिन ही माता के विशेष स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि यहाँ से मिला 'खजाना' (प्रसाद) घर में रखने से कभी दरिद्रता नहीं आती।
2. माँ अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर (Indore)
मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित माँ अन्नपूर्णा का मंदिर अपनी भव्यता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
- द्रविड़ स्थापत्य शैली: इस मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली में किया गया है। मंदिर का 'हाथी गेट' देशभर में आकर्षण का केंद्र है।
- भव्य मूर्तियां: मंदिर के 81 फीट ऊंचे शिखर और 51 स्तंभों पर 1250 से अधिक नवीन मूर्तियां उकेरी गई हैं।
- त्रिशक्ति स्वरूप: गर्भगृह में माँ अन्नपूर्णा के साथ माँ सरस्वती और माँ कालिका की मुख्य प्रतिमाएं विराजमान हैं।
- लक्ष्मी स्वरूप: यहाँ माता की पूजा लक्ष्मी के रूप में भी की जाती है। विशेष अवसरों पर माता का दिन में तीन बार अलग-अलग श्रृंगार होता है।
निष्कर्ष
माँ अन्नपूर्णा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अन्नपूर्णा जयंती एक उत्तम अवसर है। चाहे वह काशी का सिद्ध क्षेत्र हो या इंदौर का भव्य धाम, माँ के दर्शन मात्र से भक्तों के जीवन में सकारात्मकता और संपन्नता आती है। इस दिन अन्न का सम्मान करें और सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करें।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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