
1307
मंत्र
कैलासचल कंदरालयकारी गौरी उमा शंकरी कौमारी निगमार्थ गोचरकारी ओंकार बीजाक्षरी | मोक्षद्वार कपाट पतनकारी काशिपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातः अन्नपूर्णेश्वरी ||
हे दिव्य माता कौमारी! जो भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत पर निवास करती हैं, आप ही मोक्ष के द्वार खोलने वाली और काशी की अधीश्वरी हैं। हे करुणामयी अन्नपूर्णा माता! मेरी प्रार्थना स्वीकार करें और मुझे दिव्य अन्न का आशीर्वाद प्रदान करें।
योगानंदकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थ निष्ठाकरी चन्द्रार्कनलाभासा मनलहरी त्रैलोक्य रक्षकरी | सर्वैश्वर्य समस्त वाञ्छितकरी काशिपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातः अन्नपूर्णेश्वरी ||
हे देवी! आप योगानंद देने वाली, शत्रुओं का नाश करने वाली और धर्म तथा अर्थ की स्थिरता देने वाली हैं। आप सूर्य, चन्द्र और अग्नि के समान तेजस्वी हैं। तीनों लोकों की रक्षिका अन्नपूर्णेश्वरी माता, कृपा कर मुझे अन्न रूपी वरदान प्रदान करें।
दृश्यादृश्य विभूति वाहनकरी ब्रह्माण्ड भाण्डोदरी लीला नाटक सूत्र भेदनकरी विज्ञान दीपंकरी | श्री विश्वेश मनः प्रसादनकरी काशिपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातः अन्नपूर्णेश्वरी ||
हे माता अन्नपूर्णा! दृश्य और अदृश्य दोनों शक्तियों की अधीश्वरी आप ही हैं। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड आपके भीतर समाया है। आप ही ज्ञान और विद्या की ज्योति जलाने वाली हैं। हे माता! कृपा करके अपने भक्त को अन्न और संतोष का वरदान दें।
नाना रत्न विचित्र भूषणकरी हेमाम्बरादाम्बरी मुक्ताहार विलम्बमान विलसद्वक्षोज कुम्भान्तरी | काश्मीर अगरु वसिताङ्गरुचिरे काशिपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातः अन्नपूर्णेश्वरी ||
हे देवी! आप नाना प्रकार के रत्नों से अलंकृत हैं, स्वर्ण वस्त्रों से आभूषित हैं। आपके गले में मोतियों की माला और आपके अंगों से केसर व अगर की सुगंध फैलती है। हे काशी की अधीश्वरी! अपनी कृपा से हमें अन्न का आशीर्वाद प्रदान करें।
नित्यानंदकरी वराभयकरी सौन्दर्य रत्नाकरी निर्दूषिताखिल घोर पावनकरी प्रत्यक्षा महेश्वरी | प्रलयाचल वंश पावनकरी काशिपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातः अन्नपूर्णेश्वरी ||
हे नित्यानंद देने वाली माता! आपके एक हाथ में वर मुद्रा है जो आशीर्वाद देती है और दूसरे हाथ से आप भय दूर करती हैं। आप समस्त पापों को शुद्ध करती हैं और स्वयं महेश्वरी का प्रत्यक्ष स्वरूप हैं। कृपा करें और हमें अन्न व समृद्धि का वरदान प्रदान करें।
देवी अन्नपूर्णा माता पार्वती का ही अवतार हैं, जो भोजन और पोषण की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। वह जीवन के पोषण और दान के दिव्य प्रतीक हैं। भोजन करने से पहले अन्नपूर्णा मंत्र का जप करना ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक है। यह मंत्र घर में अन्न की शुद्धता, समृद्धि और संतोष लाता है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति भोजन का सम्मान करता है और माता अन्नपूर्णा की उपासना करता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। रसोईघर को स्वच्छ रखना, भोजन का अपमान न करना और जरूरतमंदों को भोजन कराना, माता की कृपा प्राप्त करने के श्रेष्ठ उपाय हैं।
स्वयं को और स्थान को शुद्ध करें: स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर गंगाजल या धूप से वातावरण को पवित्र करें।
रसोई की शुद्धि: रसोईघर और चूल्हे को अच्छे से साफ करें क्योंकि यह अग्नि का पवित्र स्थान है।
वेदी की तैयारी: पीला या लाल वस्त्र बिछाएं और माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। चावल और फल अर्पित करें।
सजावट और आराधना: माता को फूल, आभूषण और दीप अर्पित करें। इससे उनकी दिव्य उपस्थिति अनुभव होती है।
मंत्र का जाप: पूरे मन से अन्नपूर्णा मंत्र का जाप करें, विशेष रूप से एकादशी या पूर्णिमा के दिन।
कृतज्ञता के साथ समापन: अंत में किसी गरीब, ब्राह्मण या पशु-पक्षी को भोजन कराएँ — यह माता अन्नपूर्णा की सेवा का सर्वोत्तम रूप है।
घर में अन्न की कभी कमी नहीं रहती, कठिन समय में भी भोजन की प्राप्ति सुनिश्चित होती है।
भोजन से पहले कृतज्ञता और पवित्रता की भावना जागृत होती है।
भोजन में पौष्टिकता और आध्यात्मिकता दोनों की वृद्धि होती है।
घर में समृद्धि, धन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से परिवार में शांति और सौहार्द बना रहता है।
