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चालीसा
माँ दुर्गा का स्मरण शक्ति, साहस, सुरक्षा और भय व नकारात्मकता पर विजय प्रदान करता है। नियमित पाठ मन को पवित्र करता है, स्वास्थ्य, साहस और सफलता देता है तथा जीवन में समृद्धि और संतुलन लाता है।
मैं शुद्ध मन से दुर्गा चालीसा का पाठ प्रारंभ करता/करती हूँ, जिससे मुझे शक्ति, सुरक्षा, ज्ञान और जीवन की सभी बाधाओं से मुक्ति प्राप्त हो।
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी।
निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहुँ लोक फैली उजियारी।
शशि ललाट मुख महा विशाल। नेत्र लाल भृकुटि विकराल।
रूप मातु को अधिक सुहावे। दर्शन करत जन अति सुख पावे।
तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना।
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुंदरी बाला।
प्रलय काल सब नाशन हारी। तुम गौरी शंकर की प्यारी।
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हे नित ध्यावें।
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनि न धारा।
धरा रूप नरसिंह को अम्बा। प्रगट भईं फाड़कर खम्बा।
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो। हिरण्यकशिपु को स्वर्ग पठायो।
लक्ष्मी रूप धर्यो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं।
खीरसिंधु में करत विलासा। दयासिंधु दीजै मन आसा।
हिंगलाज में तुम ही भवानी। महिमा अमित न जात बखानी।
मतंगी अरु धूमावती माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता।
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी।
केहरी वाहन सोह भवानी। लांगूर वीर चलत अगवानी।
कर में खप्पर खड्ग विराजे। जाको देख काल डर भाजे।
सोहे अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला।
नगर कोटि में तुम्हीं विराजत। तिहुँ लोक में डंका बाजत।
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे।
महीषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भरा मही अकुलानी।
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिह संहारा।
परी गढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय माँ तुम तब तब।
अमरपुरी अरु बसव लोका। तब महिमा सब रहे अशोका।
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हे सदा पूजें नर नारी।
प्रेम भक्ति से जो यश गावे। दुःख दारीद्र निकट न आवे।
ध्यावे तुम्हे जो नर मन लाई। जन्म मरण ता को छूटि जाई।
योगी सुर मुनि कहते पुकारि। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी।
शंकर आचार्य तप कीनो। काम अरु क्रोध जीते सब लीनो।
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहू काल नहीं सुमिरो तुमको।
शक्ति रूप को मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो।
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्बा भवानी।
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दै शक्ति नहीं कीन विलम्बा।
मोको मात कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो।
आशा तृष्णा निपट सतावे। मोह मदादिक सब विनशावे।
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इच्छित तुम्हे भवानी।
करो कृपा हे मात दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला।
जब लगि जियूँ दया फल पाऊँ। तुम्हारा यश मैं सदा सुनाऊँ।
दुर्गा चालीसा जो नित गावे। सब सुख भोग परम पद पावे।
देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्बा भवानी।
हे माँ दुर्गा, आपकी कृपा हमें सुरक्षा, ज्ञान और बल प्रदान करे। आपका आशीर्वाद सभी जीवों पर बना रहे — सब स्वस्थ, सुरक्षित और सुखी रहें।
कुछ देर मौन बैठें, गहरी सांस लें और माँ दुर्गा की दिव्य ज्योति को अपने और घर के चारों ओर फैलता हुआ देखें। मन में कृतज्ञता रखें और निश्चय करें कि आप साहस, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलेंगे।
