दुर्गा चालीसा

दुर्गा चालीसा

माँ दुर्गा का स्मरण शक्ति, साहस, सुरक्षा और भय व नकारात्मकता पर विजय प्रदान करता है। नियमित पाठ मन को पवित्र करता है, स्वास्थ्य, साहस और सफलता देता है तथा जीवन में समृद्धि और संतुलन लाता है।

दुर्गा चालीसा पाठ के लाभ

  • भय, बाधा और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करती है
  • आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास और आत्म-संयम देती है
  • स्वास्थ्य, मानसिक शांति और जीवनशक्ति प्रदान करती है
  • धन, सौभाग्य और उचित अवसर आकर्षित करती है
  • परिवार और घर की रक्षा करती है
  • विद्या, कार्य और साधना में एकाग्रता बढ़ाती है
  • क्रोध, ईर्ष्या और अहंकार को कम करती है

पाठ की विधि और नियम

  • श्रेष्ठ दिन: मंगलवार, शुक्रवार, नवरात्रि, अष्टमी, अथवा प्रतिदिन सुबह या संध्या
  • वेदी: माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएँ
  • भेंट: लाल फूल, फल, जल और शुद्ध मन से अर्पण करें
  • शुद्धता: स्नान कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
  • गणना: 11, 21 या 108 बार पाठ करने का संकल्प लें
  • माला: चाहें तो रुद्राक्ष या तुलसी की माला से जप करें
  • पाठ के बाद: कुछ समय मौन रहें और माँ को धन्यवाद दें

पाठ प्रारंभ से पहले संकल्प

मैं शुद्ध मन से दुर्गा चालीसा का पाठ प्रारंभ करता/करती हूँ, जिससे मुझे शक्ति, सुरक्षा, ज्ञान और जीवन की सभी बाधाओं से मुक्ति प्राप्त हो।

दुर्गा चालीसा दोहा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी।
निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहुँ लोक फैली उजियारी।

दुर्गा चालीसा

शशि ललाट मुख महा विशाल। नेत्र लाल भृकुटि विकराल।
रूप मातु को अधिक सुहावे। दर्शन करत जन अति सुख पावे।

तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना।
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुंदरी बाला।

प्रलय काल सब नाशन हारी। तुम गौरी शंकर की प्यारी।
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हे नित ध्यावें।

रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनि न धारा।
धरा रूप नरसिंह को अम्बा। प्रगट भईं फाड़कर खम्बा।

रक्षा कर प्रह्लाद बचायो। हिरण्यकशिपु को स्वर्ग पठायो।
लक्ष्मी रूप धर्यो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं।

खीरसिंधु में करत विलासा। दयासिंधु दीजै मन आसा।
हिंगलाज में तुम ही भवानी। महिमा अमित न जात बखानी।

मतंगी अरु धूमावती माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता।
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी।

केहरी वाहन सोह भवानी। लांगूर वीर चलत अगवानी।
कर में खप्पर खड्ग विराजे। जाको देख काल डर भाजे।

सोहे अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला।
नगर कोटि में तुम्हीं विराजत। तिहुँ लोक में डंका बाजत।

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे।
महीषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भरा मही अकुलानी।

रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिह संहारा।
परी गढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय माँ तुम तब तब।

अमरपुरी अरु बसव लोका। तब महिमा सब रहे अशोका।
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हे सदा पूजें नर नारी।

प्रेम भक्ति से जो यश गावे। दुःख दारीद्र निकट न आवे।
ध्यावे तुम्हे जो नर मन लाई। जन्म मरण ता को छूटि जाई।

योगी सुर मुनि कहते पुकारि। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी।
शंकर आचार्य तप कीनो। काम अरु क्रोध जीते सब लीनो।

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहू काल नहीं सुमिरो तुमको।
शक्ति रूप को मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो।

शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्बा भवानी।
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दै शक्ति नहीं कीन विलम्बा।

मोको मात कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो।
आशा तृष्णा निपट सतावे। मोह मदादिक सब विनशावे।

शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इच्छित तुम्हे भवानी।
करो कृपा हे मात दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला।

जब लगि जियूँ दया फल पाऊँ। तुम्हारा यश मैं सदा सुनाऊँ।
दुर्गा चालीसा जो नित गावे। सब सुख भोग परम पद पावे।

देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्बा भवानी।

समापन प्रार्थना

हे माँ दुर्गा, आपकी कृपा हमें सुरक्षा, ज्ञान और बल प्रदान करे। आपका आशीर्वाद सभी जीवों पर बना रहे — सब स्वस्थ, सुरक्षित और सुखी रहें।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • पाठ भाव और अर्थ के साथ करें, गति की नहीं भावना की महत्ता है
  • समय कम हो तो दोहा और 11 चौपाइयों का पाठ करें
  • 9, 21 या 40 दिनों तक निरंतर पाठ करने से विशेष फल मिलता है
  • पाठ का पुण्य परिवार, गुरु और सब जीवों को समर्पित करें

पाठ के बाद ध्यान

कुछ देर मौन बैठें, गहरी सांस लें और माँ दुर्गा की दिव्य ज्योति को अपने और घर के चारों ओर फैलता हुआ देखें। मन में कृतज्ञता रखें और निश्चय करें कि आप साहस, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलेंगे।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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