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मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः ॥
हम देवी सरस्वती को नमन करते हैं, जो दिव्य ज्ञान और पवित्रता की अधिष्ठात्री हैं। वे बुद्धि, सृजनशीलता और विचारों की स्पष्टता का स्रोत हैं। माँ की कृपा से हमारे मन में प्रकाश फैले और हमें सत्य तथा ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर करें।
इस मंत्र के नियमित जप से स्मरण शक्ति, ज्ञान और वाणी की स्पष्टता में वृद्धि होती है। यह भ्रम और अज्ञान को दूर कर बुद्धि को तीव्र बनाता है तथा शिक्षा, संगीत और रचनात्मक कार्यों में सफलता दिलाता है।
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
हे माँ सरस्वती! जो वर देने वाली और सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं, आपको मेरा प्रणाम। मैं अपने ज्ञानार्जन के मार्ग की शुरुआत करता हूँ, कृपया सदैव मुझे सफलता प्रदान करें।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
हे माँ सरस्वती! जो चाँदनी, हिम और कुमुदिनी के समान उज्ज्वल हैं, शुभ्र वस्त्र धारण किए हुए हैं, जिनके हाथों में वीणा और वर मुद्रा सुशोभित हैं, जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं और ब्रह्मा, विष्णु, महेश जैसे देवताओं द्वारा सदा पूजित हैं — वे माँ हमारे अज्ञान और जड़ता को नष्ट करें और हमें सच्चे ज्ञान से आलोकित करें।
सरस्वती मंत्र का नियमित जप आत्मविश्वास बढ़ाता है, वाणी में मिठास लाता है और मंच भय (stage fear) को दूर करता है। यह विद्यार्थियों, कलाकारों, संगीतकारों और शिक्षकों के लिए अत्यंत शुभ फलदायक होता है। श्रद्धा और भक्ति से जप करने पर यह मंत्र आध्यात्मिक ज्ञान और अंतर्दृष्टि को जागृत करता है।
