
माघ अमावस्या 2026 - करें पितृों का तर्पण और पाएं समृद्धि

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पूजा
माघ अमावस्या 2026 - करें पितृों का तर्पण और पाएं समृद्धि
Magh Amavasya 2026: माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है, इसे वर्ष की सभी अमावस्याओं में सबसे पुण्यदायी माना गया है. वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 दिन रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन मौन, संयम, स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि अमावस्या तिथि में किए गए पुण्य कर्मों से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। माघ अमावस्या 2026 के दिन को पितृों की कृपा प्राप्त करने का विशेष दिन माना जाता है।
माघ अमावस्या 2026 तिथि कब है?
- माघ अमावस्या 18 जनवरी 2026 दिन रविवार को है।
- अमावस्या तिथि प्रारम्भ – 17 जनवरी 2026 दिन शनिवार की रात 12 बजकर 03 मिनट पर
- अमावस्या तिथि समाप्त – 18 जनवरी 2026 दिन रविवार की रात 01 बजकर 21 मिनट पर
माघ अमावस्या 2026 के दिन का चौघड़िया मुहूर्त
उद्वेग – अशुभ: सुबह 06:37 से 07:58 बजे तक
चर – सामान्य: सुबह 07:58 से 09:19 बजे तक
लाभ – उन्नति: 09:19 से 10:39 बजे तक
अमृत – सर्वोत्तम: 10:39 से 12 बजे तक
काल – हानि: 12 से 01:21 बजे तक
शुभ – उत्तम: 01:21 से 02:41 बजे तक
रोग – अमंगल: 02:41 से 04:02 बजे तक
उद्वेग – अशुभ: 04:02 से 05:23 बजे तक
माघ अमावस्या 2026 पर क्या करना चाहिए?
- माघ अमावस्या 2026 के दिन सूर्योदय से पहले पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- अगर नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- माघ अमावस्या के दिन मौन व्रत करें और कम से कम बात बोले।
- अमावस्या के दिन तिल, गुड़, अन्न, गर्म कपड़े, जूते-चप्पल का दान करें।
- माघ अमावस्या रविवार को है, इसलिए सूर्य देव को अर्घ्य दें और लाल वस्तुओं का दान करें।
- पूरे दिन मन ही मन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
मौनी अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए
- माघ मास की अमावस्या तिथि को सुबह देर तक सोने से बचें।
- घर में झगड़ा, विवाद, कटु वचन या किसी का अपमान न करें।
- अमावस्या के दिन मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज जैसी तामसिक वस्तुओं का सेवन न करें।
- अमावस्या की रात में सुनसान स्थानों या श्मशान घाट के पास जाने से बचें।
माघ अमावस्या के दिन करें विशेष उपाय
माघ अमावस्या 18 जनवरी 2026 दिन रविवार को है, इस दिन रविवार होने के कारण इसे ‘रवि-मौनी अमावस्या’ कहा जा रहा हैं। यह संयोग सूर्य देव की विशेष कृपा दिलाने वाला माना गया हैं. इस दिन तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। ऐसा करने से मान-सम्मान, स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं। दोपहर में दक्षिण दिशा में मुंह करके पितृों को तर्पण करें।
पितृ तर्पण 2026 पूजा के नियम
माघ अमावस्या 2026 पितृों को समर्पित होती हैं, इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं. पितृ तर्पण अमावस्या, श्राद्ध, महालय, मौनी अमावस्या जैसे विशेष दिनों पर किया जाने वाला एक अत्यंत पुण्यकारी कर्म है। माघ अमावस्या के दिन तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में आ रही समस्याएं समाप्त होती हैं।
तर्पण की विधि
दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके बैठ जाएं।
दाहिने हाथ में जल लें, उसमें काले तिल, जौ और कुशा डालें।
जल को अनामिका, मध्यमा और अंगूठे के बीच से धीरे-धीरे पृथ्वी पर अर्पित करें।
जल छोड़ते समय पितरों के नाम या “ॐ पितृभ्यो नमः” मंत्र का उच्चारण करें.
प्रत्येक पितर के लिए तीन बार तर्पण करें।
पिता, माता, दादा-दादी, परदादा-परदादी सहित तीन पीढ़ियों के पितरों का तर्पण करें।
जिन पितर के नाम ज्ञात न हों, उनके लिए “सर्वेभ्यः पितृभ्यो नमः” कहकर तर्पण करें।
तर्पण के बाद ब्राह्मण, साधु या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दें।
तर्पण के बाद गाय, कुत्ता, कौआ और चींटी को भोजन कराएं।
माघ अमावस्या 2026 पर पवित्र स्नान का विशेष फल
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि माघ अमावस्या 2026 पर गंगा, यमुना, संगम, सरयू या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी समान पुण्य मिलता हैं। माघ अमावस्या को कई स्थानों पर मौनी अमावस्या भी कहा जाता है, इस दिन मौन व्रत, संयम और आत्मचिंतन करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और आत्मा शुद्ध होती है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
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