मरकत श्री लक्ष्मीगणपति प्रपत्तिः

मरकत श्री लक्ष्मीगणपति प्रपत्तिः

सौमुख्यनामपरिवर्धितमन्त्ररूपौ
वैमुख्यभावपरिमार्जन कर्मबद्धौ
प्रामुख्यकीर्ति वरदान विधानकर्मौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ १ ॥

श्रेष्ठैकदन्तगजरूपनिजानुभाव्यौ
गोष्ठीप्रपञ्चितपुनीतकथाप्रसङ्गौ
प्रोष्ठप्रदायक समुन्नतभद्ररूपौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ २ ॥

राजद्विलासकपिलाह्वयरूपभासौ
भ्राजत्कलानिवहसंस्तुतदिव्यरूपौ
सौजन्यभासुरमनोविषयप्रभासौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ३ ॥

विभ्राजदात्मगजकर्णिकया सुवेद्यौ
शुभ्रांशु सौम्यरुचिरौ शुभचिन्तनीयौ
अभ्रङ्कषात्ममहिमौ महनीयवर्णौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ४ ॥

लम्बोदरात्मकतनूविभवानुभाव्यौ
बिम्बायमानवरकान्तिपथानुगम्यौ
सम्बोधिताखिल चराचरलोकदृश्यौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ५ ॥

दुष्टासुरेषु विकटीकृतनैजरूपौ
शिष्टानुरञ्जनचणौ शिखरायमाणौ
सृष्टिस्थितिप्रलयकारणकार्यमग्नौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ६ ॥

निर्विघ्नराजितपथौ नियमैकवेद्यौ
गर्वापनेयचरितौ गणराड्विनोदौ
सर्वोन्नतौ सकलपालनकर्मशीलौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ७ ॥

गाणाधिपत्यपदवीप्रविभक्तदीपौ
प्राणप्रदानकुशलौ प्रविलासभावौ
त्राणोत्सुकौ निरतभाग्यविधानशीलौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ८ ॥

प्राग्धूमकेतुवरनाम विराजमानौ
स्वाधीनकर्मकुशलौ समभावभाव्यौ
बाधानिवारणचणौ भवबन्धनाशौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ९ ॥

ईशौ गणाधिपति दिव्यपथानुगम्यौ
राशीकृतात्मगुणभाग्यविवर्धमानौ
आशान्तदीप्तिविभवौ सुकृतात्मदृश्यौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ १० ॥

मौलीन्दुकान्तिविशदीकृततत्त्वभासौ
केलीविलासरुचिरौ कमनीयशोभौ
व्यालोलभक्तिरमणौ वरदानशीलौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ११ ॥

श्रेष्ठौगजाननपुराणकथाविलीनौ
श्रेष्ठप्रभावलयिनौ चिरदीप्तिभासौ
श्रेष्ठात्मतत्त्व चरितौ शिवदानशीलौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ १२ ॥

श्रीवक्रतुण्डमुखकान्तिसमानभासौ
भावोन्नतिप्रथित संस्तवनीयशोभौ
सेवानुरक्तजनतावनकर्मदक्षौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ १३ ॥

शूर्पोपमान निजकर्णविलेख्यवर्णौ
दर्पापनोदनचणौ दरहासशोभौ
कर्पूर साम्यविमलौ करुणाविलासौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ १४ ॥

हेरम्बनामपठनेन विराजमानौ
प्रारम्भकार्यफलदान समर्चनीयौ
श्रीरम्यकान्तिविभवौ चिरकीर्तिनिष्ठौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ १५ ॥

स्कन्दाग्रजत्वपदवीविलसत् प्रभावौ
मन्दारसुन्दर सुमार्चितदिव्यरूपौ
कुन्दोपमौ कविजनात्मविलासहासौ
लक्ष्मीगणेशचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ १६ ॥

इति श्री मरकत लक्ष्मीगणपति प्रपत्तिः सम्पूर्णा ॥

मरकत श्री लक्ष्मीगणपति मङ्गलाशासनम् >>


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

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