किस भाव में मंगल क्या परिणाम देता है ?

किस भाव में मंगल क्या परिणाम देता है ?

किस भाव में मंगल क्या परिणाम देता है ?

मंगल एक ऐसा ग्रह है, जो अपने नाम के अनुरूप मंगलकारी भी है और नाश करने वाला भी है। हालाँकि मंगल ग्रह को लेकर, लोगों की धारणाएँ ज्यादातर नकारात्मक ही रहती है। ज्योतिष में सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह को मंगल का मित्र और बुध ग्रह को शत्रु बताया गया है। वैदिक ज्योतिष में जहाँ मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक का स्वामी है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मंगल का गोचर किसी भी राशि में करीब डेढ़ माह का होता है। मंगल ग्रह (मंगल की उपस्थिति पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें खाने में होने पर) कुंडली में मंगल दोष बनता है, जिससे जातकों के वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएँ आती हैं। जानते हैं लाल किताब के अनुसार भाव में मंगल कैसा परिणाम देता है -

पहले भाव में मंगल

पहले भाव में मंगल का होना आपको आक्रामक बनाता है। आपका क्रोध और साहस दोनों अपने चरम पर ही रहते हैं। हष्‍ट-पुष्‍ट शरीर और शरीर में कई सारे तिल आपकी निशानी होती है। मंगल का उंचे स्‍थान में होना आपके पारीवारिक जीवन के लिए अभिशाप जैसा है। आपको दुर्घटनाओं के प्रति सावधान रहने की जरूरत है और सेक्‍स पर नियंत्रण भी आपके लिए बहुत जरूरी है।

दूसरे भाव में मंगल

दूसरे घर में मंगल विराजमान होकर आपको झगड़ालू बनाते हैं। आप कटुवचन बोलते हैं और परिवार के साथ आपकी बिल्‍कुल नहीं बनती। दया करना आपको नहीं आता, आप बस स्‍वयं पर ही केंद्रित रहते हैं। धन से संबंधित निर्णय लेने की आपमें अद्भुत क्षमता होती है।

तीसरे भाव में मंगल

तीसरे घर में मंगल भाई बहनों का सुख नहीं देता है। आपके या तो भाई बहन होते ही नहीं और अगर होते भी हैं तो उनसे हमेशा झगड़ा ही होता रहता है। यात्रा के दौरान अक्‍सर दुर्घटना हो जाती हैं। आप किसी भी नियम का पालन करना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं और हमेशा दूसरों के लिए परेशानियां ही खड़ी करते हैं।

कुंडली के चौथे भाव में मंगल

चौथे घर में मंगल मां के प्‍यार से वंचित रखता है। आपके दोस्‍त भी बहुत ज्‍यादा नहीं होते और जो होते भी हैं उनसे आप कोई मतलब नहीं रखते। आप राजनीति के क्षेत्र में सफल होते हैं और आप रोमांचक कार्यों में बहुत रूचि लेते हैं।

पांचवें भाव में मंगल

पांचवें घर में मंगल की उपस्थिति आपको प्राधिकरण का अधिकारी बनाता है। आप स्‍वाभाव से अड़ियल होते हैं और जीवन में किसी भी बात से सुखी नहीं रहते हैं। इन्‍हें ज्‍यादातर पेट दर्द की शिकायत रहती है। इन्‍हें भी अपनी अत्‍यधिक सेक्‍स करने की आदत रहती है जिससे इनका स्‍वास्‍थ्‍य सही नहीं रहता है।

छठे भाव में मंगल

इस घर में मंगल आपको अजेय बनाता है। शत्रुओं पर आपकी जीत होती है। आप राजनीति में रूचि रखते हैं और इसी क्षेत्र में आपका भविष्‍य निखरता है। छठे घर में मंगल संबंध‍ियों की तरफ से परेशानियां पैदा करता है।

सातवें भाव में मंगल

सातवें घर में मंगल आपको अपने जीवनसाथी के प्रति असंवेदनशील बनाता है। आप बस किसी भी तरह उन पर अपना अधिकार जताना चाहते हैं। ऐसे में वैवाहिक जीवन में अनबन होती है और वैवाहिक जीवन काफी उदासीन होता है। आप धोखेबाज होते हैं और ऐसे कामों में बहुत रूचि भी लेते हैं। आप बुद्धिमान होने के बाद भी ज्‍यादा सफल नहीं हो पाते। यहां बैठा मंगल आपको अव्‍यावहारिक भी बनाता है।

आठवें घर में मंगल

यहां बैठा मंगल जीवनसाथी की शीघ्र मृत्‍यु का कारण बनता है। ऐसे लोगों के विवाह के बाद दूसरों से असमाजिक संबंध भी होते हैं। आपको पथरी की समस्‍या बनी रहती है। वैवाहिक जीवन में कुछ खास नहीं होता है। यह जातक दूसरों पर आदेश चलाना ही अपना परम कर्तव्‍य मानते हैं।

नवें भाव में मंगल

इस घर में मंगल आपको अधिकारी बनाता है। आप राज करते हैं और आपके आगे पीछे कई नौकर चाकर होते हैं, किन्‍तु ये अच्‍छे पुत्र नही होते। दान करने में ये लोग सबसे आगे रहते हैं और समय-समय पर दूसरों की मदद करते रहते हैं।

दसवें भाव में मंगल

यहां मंगल की उपस्‍थि‍ति आपको साहसी, धनी और कठोर बनाता है। आपको स्‍वयं पर घमंड होता है और अपने आगे आप किसी को नहीं सुनते। इस भाव में मंगल अगर बुध से युति कर ले तो जातक वैज्ञानिक बनता है और देश विदेश में नाम कमाता है।

11वें भाव में मंगल

यहां बैठा मंगल आपको अच्‍छा वक्‍ता बनाता है। आपका व्‍यक्तित्‍व प्रभावी होता है और आपको नशे की आदत होती है। आप अपने जीवन में खूब धन व प्रापर्टी कमाते हैं। हालांकि कई बार यहां बैठा मंगल आपको सामाजिक बनने से रोकता है। लोग आपको अड़ियल समझने लगते हैं।

12वें भाव का मंगल

यहां बैठा मंगल जीवनसाथी की शीघ्र मृत्‍यु का कारण बनता है। आपको कोई न कोई रोग हर समय सताता है और आप स्‍वार्थी व्‍यवहार के होते हैं। इसलिए आपका सामाजिक दायरा भी बहुत छोटा है। किसी से मेलजोल बढ़ान आप अपनी शान के खिलाफ समझते हैं।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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