किस भाव में मंगल आपको क्या देते हैं लाभ, जानिए अपनी कुंडली का हाल

किस भाव में मंगल आपको क्या देते हैं लाभ, जानिए अपनी कुंडली का हाल

किस भाव में मंगल आपको क्या देते हैं लाभ, जानिए अपनी कुंडली का हाल

कुंडली में मंगल को एक पाप ग्रह माना जाता है। जब मंगल कुछ विशेष भावों में बैठता है, तो मांगलिक दोष का निर्माण होता है। मांगलिक दोष के कारण वैवाहिक जीवन में काफी तनाव की स्थिति रहती है। हालांकि मंगल अमंगल ग्रह बिल्कुल भी नहीं है। मंगल को ज्योतिष में साहस, आत्मविश्वास, पराक्रम, शौर्य का कारक माना जाता है। यदि मंगल शुभ भाव में है, तो व्यक्ति आत्मविश्वास से ही सारे काम कर लेता है। जानिए मंगल किस भाव में किस तरह का परिणाम देता है।

पहले भाव में मंगल


पहले भाव का मंगल व्यक्ति को आत्मविश्वासी बनाता है। हालांकि यहां पर बैठा मंगल मांगलिक दोष का भी निर्माण करता है। ऐसे व्यक्ति के जीवनसाथी से कई बार अच्छे संबंध नहीं होते हैं। व्यक्ति साहसी होता है, लेकिन बात-बात पर गुस्सा करने वाला होता है। 

दूसरे भाव में मंगल


दूसरे भाव में मंगल व्यक्ति की बोली खराब कर देता है। परिवार के लोगों के साथ अक्सर विवाद होते रहते हैं। कड़ी मेहनत के बाद सफलता मिलती है। ऐसे लोगों को गाड़ी से गिरने का डर हमेशा बना रहता है। कई बार यहां बैठा मंगल जीवनसाथी और ससुराल पक्ष से भी संबंध खराब कर देता है। 

तीसरे भाव में मंगल


तीसरे भाव का मंगल व्यक्ति को धैर्यवान और प्रसिद्ध बनाता है। ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान तो होता है, लेकिन कई बार भाई-बहनों के साथ उसके संबंध अच्छे नहीं होते हैं। व्यक्ति क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। ऐसे व्यक्ति के अक्सर मित्र या पड़ोसियों से मतभेद होते रहते हैं। 

चौथे भाव में मंगल


चतुर्थ भाव में मंगल माता के साथ अक्सर विवाद देता है, लेकिन ऐसे व्यक्ति के पास जमीन-जायदाद की कभी कमी नहीं होती है। कार्यक्षेत्र में भी वह पूरे आत्मविश्वास से काम करता है। घर की साज-सज्जा पर विशेष ध्यान देता है। हालांकि कई बार ऐसा व्यक्ति पैतृक संपत्ति के विवाद में फंस जाता है। 


पांचवें भाव में मंगल


कुंडली में मंगल पांचवें भाव में हो, तो व्यक्ति तेजस्वी होता है। पढ़ने-लिखने में ऐसे व्यक्ति का दिमाग लगता है। पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। यहां बैठा मंगल कई बार लव लाइफ में प्रॉब्लम देता है। ऐसा व्यक्ति जल्दी भ्रमित भी हो जाता है और गलत संगत में भी पड़ सकता है। 


छठे भाव में मंगल


छठे भाव का मंगल व्यक्ति के शत्रुओं पर विजय दिलाता है। हालांकि यहां यदि कमजोर मंगल है, तो व्यक्ति को ऋण संबंधी दिक्कत आ सकती है यानी वह लोन लेकर फंस सकता है। हालांकि यहां बैठा मंगल नौकरी में उन्नति देता है और स्वास्थ्य संबंधी सभी दिक्कतों को दूर रखता है। 

सातवें भाव में मंगल


यहां बैठा मंगल भी मांगलिक दोष का निर्माण करता है। ऐसा व्यक्ति गुस्सैल स्वभाव का हो सकता है। आमतौर पर ऐसे व्यक्ति की जीवनसाथी से कई बार नहीं बनती है। आर्थिक स्थिति वैसे तो ठीक रहती है, लेकिन खर्चा बना रहता है। यदि पत्नी को मांगलिक दोष हो, तो जीवन अच्छा रहता है। 

आठवें भाव में मंगल


कुंडली के अष्टम भाव में मंगल अक्सर छोटी-छोटी चोट देता रहता है। ऐसे व्यक्ति को गाड़ी चलाने में सावधानी रखना चाहिए। दुर्घटना का भय बना रहता है। हालांकि धन संबंधी कोई परेशानी यहां मंगल नहीं देता है, फिर भी धन को संभलकर खर्च करने की चेतावनी जरूर देता है। 

नवें भाव में मंगल


कुंडली में नवें भाव में मंगल हो, तो व्यक्ति साहसी तो होता है, लेकिन कई बार भाग्य के भरोसे ज्यादा बैठ जाता है। अक्सर पिता से मतभेद होते रहते हैं। ऐसे व्यक्ति का मन यात्रा करने में बहुत लगता है। छोटे भाई-बहनों का सहयोग भी मिलता रहता है। 


दसवें भाव में मंगल


दसवें भाव में मंगल काफी अच्छा माना जाता है। यहां आपको कार्यस्थल पर विशेष सहयोग हमेशा मिलेगा। हालांकि पिता से यहां मतभेद होते रहते हैं, लेकिन धन संबंधी समस्याएं दूर होती है। जमीन-जायदाद के काम में अक्सर ही सफलता मिलती है। 


ग्यारहवें भाव में मंगल


यहां मंगल आपको महत्वाकांक्षी बनाता है। ऐसा व्यक्ति दोस्तों के सहयोग से आगे बढ़ता है। पढ़ाई में अच्छा होता है, लेकिन कई बार सामाजिक क्षेत्र में पीछे रहता है। व्यक्ति का प्रेम जीवन भी सामान्य रहता है। इनकम के नए-नए सोर्स बनते रहते हैं।

बारहवें भाव में मंगल


कुंडली के बारहवें भाव में मंगल होने से व्यक्ति मांगलिक होता है। उसे खर्चें की समस्या बनी रहती है। धर्म-कर्म से जुड़े मामलों में पैसा खर्च करता है। ऐसे व्यक्ति को लोन लेने से बचना चाहिए। नौकरी और व्यवसाय में उन्नति होती है। कई बार विदेश से जुड़े काम में भी सफल होता है। 


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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