
नवरात्रि तीसरा दिन करिए मां चंद्रघंटा की पूजा और पाइए मनचाहा वरदान

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पूजा
नवरात्रि तीसरा दिन करिए मां चंद्रघंटा की पूजा और पाइए मनचाहा वरदान
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से हो रही है। नवरात्रि के तीसरे दिन यानी 1 अप्रैल को माता चंद्रघंटा का पूजा होगी। माता चंद्रघंटा तुरंत ही प्रसन्न होने वाली देवी है। मां के मस्तक पर अर्धचंद्र है, जो घंटे के आकार है। माता मणिपुर चक्र की देवी मानी जाती है। कुछ मान्यताओं के अनुसार वे ही ब्रह्मांड को सँभालती है।
ऐसा है माता चंद्रघंटा का स्वरूप
माता चंद्रघंटा का स्वरूप बेहद ही आकर्षक हैं। उनका तेज सहस्र सूर्यों के बराबर हैं। वे हिरण्यवर्णा है यानी सोने की तरह चमक रखती हैं। मां दसभुजा धारी है। उनके अलग-अलग हाथ में कमल, धनुष, खड्ग, कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा जैसे अस्त्र धारण करती है। वे अभय मुद्रा भी धारण करती हैं और जो उनकी शरण में आता है, वे सदैव ही उसकी मनोकामना पूरी करती है।
माता की पूजा करने से मिलती है शांति
माता चंद्रघटा की पूजा करने से सभी प्रकार की परेशानी से मुक्ति मिलती है। यदि आपके जीवन में शत्रु बेहद बढ़ गए हों, तो आपको माता की आराधना जरूर करना चाहिए। मां की पूजा में घंटे की नाद का बेहद महत्व है। कुछ वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार घंटे की नाद व्यक्ति को एकाग्र होने में मदद करती है, जीवन से नकारात्मकता दूर करती है। ध्यान के दौरान के मां के स्वरूप को मन की आंखों से देखना चाहिए।
माता चंद्रघंटा को है लाल रंग प्रिय
कुछ चित्रों में मां का स्वरूप युद्ध करने के लिए तत्पर दिखाई देता है, लेकिन मां परम वात्सल्य देने वाली मानी गई है। मां का पहला रूप शैलपुत्री और दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी का है। तब वे भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए तपस्या रत थीं। मां का तीसरा स्वरूप भगवान शंकर को प्राप्त करने के बाद आदि शक्ति का है। माता को लाल रंग प्रिय है, उनकी पूजा में लाल रंग के फूल और वस्त्रों का उपयोग करना चाहिए।
मां चंद्रघंटा का ध्यान मंत्र
पिंडजप्रवरारूढ़ा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
रंग, गदा, त्रिशूल,चापचर,पदम् कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
माता चंद्रघंटा पूजा विधि
- माता की पूजा के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठे। स्नान के बाद माता की पूजा का संकल्प लें।
- माता की मूर्ति या चित्र को लाल कपड़े पर स्थापित करें।
- मां का ध्यान मंत्र जप कर, उनका आह्वान करें।
- माता के समक्ष पांच दीपक प्रज्वलित करें।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- मां की आरती भव्य तरीके से करें और पूरे घर में घंटा बजाएं।
- मां की कृपा प्राप्त करने के लिए उपवास करें।
- मणिपुर चक्र पर ध्यान करें।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
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