नवरात्रि तीसरा दिन करिए मां चंद्रघंटा की पूजा और पाइए मनचाहा वरदान

नवरात्रि तीसरा दिन करिए मां चंद्रघंटा की पूजा और पाइए मनचाहा वरदान

हिंदू सनातन धर्म में **चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri)** के पावन नौ दिनों को आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक चेतना को जगाने का महा-उत्सव माना गया है। नवरात्रि के तीसरे दिन (3rd Day of Navratri) आदिशक्ति के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा (Goddess Chandraghanta) की पूजा-अर्चना पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ की जाती है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन का यह पावन पूजन 1 अप्रैल को संपन्न किया जाएगा।शास्त्रों के अनुसार, माता चंद्रघंटा अत्यंत दयामयी और अपने भक्तों पर तुरंत ही प्रसन्न होने वाली जाग्रत देवी हैं। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का एक सुंदर **अर्धचंद्र (Half Moon)** सुशोभित है, जिसके कारण इन्हें 'मां चंद्रघंटा' कहा जाता है। योग साधना और तंत्र शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार, माता चंद्रघंटा मानव शरीर के **मणिपुर चक्र (Manipura Chakra)** की मुख्य अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। कुछ प्रामाणिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, वे ही अपनी मंद मुस्कान से संपूर्ण ब्रह्मांड की गतिविधियों को सँभालती और संचालित करती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र, स्तोत्र और इसके अलौकिक लाभ:

सहस्र सूर्यों का तेज: कैसा है माता चंद्रघंटा का अलौकिक स्वरूप?

दुर्गासप्तशती और प्राचीन पुराणों के अनुसार, मां चंद्रघंटा का विग्रह अत्यंत चमकीला, वीर रस से ओतप्रोत और चुंबकीय रूप से आकर्षक है:
  • हिरण्यवर्णा आभा: माता का शारीरिक वर्ण सोने की तरह दमकता हुआ चमकीला (हिरण्यवर्णा) है। उनका अलौकिक तेज ब्रह्मांड के सहस्र (हजारों) सूर्यों के सामूहिक प्रकाश के बराबर माना गया है। वे साक्षात **सिंह (शेर)** पर सवार रहती हैं, जो जातक के भीतर के भय को समाप्त करता है।
  • दस भुजाधारी स्वरूप: माता चंद्रघंटा चक्र मंडल में **दस भुजाओं (Ten Arms)** से युक्त देवी हैं। वे अपने अलग-अलग हाथों में कमल का पुष्प, धनुष, बाण, खड्ग (तलवार), कमंडल, त्रिशूल और गदा जैसे महाविनाशकारी अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। इसके साथ ही मां अपने भक्तों की रक्षा के लिए अभय मुद्रा और वरद मुद्रा भी धारण करती हैं। जो भी साधक पूरी पवित्रता के साथ उनकी शरण में आता है, मां उसकी सभी सात्विक मनोकामनाएं तुरंत पूरी कर देती हैं।

घंटे की पवित्र नाद का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व: मिलती है परम शांति

माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना करने से जातक को जीवन के सभी कड़े संघर्षों, मानसिक अवसादों और अज्ञात शत्रुओं के भय से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। यदि आपके व्यावसायिक या सामाजिक जीवन में गुप्त शत्रु और विरोधी अचानक बेहद बढ़ गए हों, तो आपको इस दिन माँ की आराधना कड़ाई से करनी चाहिए। वैज्ञानिक तथ्य (Scientific Facts): मां की पूजा और आरती के समय **घंटे की तीव्र नाद (ध्वनि)** का सबसे विशेष महत्व बताया गया है। आधुनिक वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, पीतल या तांबे के घंटे से निकलने वाली विशिष्ट ध्वनि तरंगें (Vibrations) मानव मस्तिष्क को तुरंत शांत करने और एकाग्र (Focus) होने में अद्भुत मदद करती हैं। यह ध्वनि तरंग वातावरण से सभी प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस और नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को समूल नष्ट कर देती है। इसलिए ध्यान साधना के दौरान जातक को मन की आंखों से मां के इस जाग्रत स्वरूप का दर्शन करना चाहिए।

पार्वती जी का आदि-शक्ति स्वरूप: मां को परम प्रिय है लाल रंग

यद्यपि कुछ चित्रों और कथाओं में असुरों का नाश करने के लिए मां का स्वरूप युद्ध के लिए तत्पर (उग्र) दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में मां अपने भक्तों के लिए परम वात्सल्य, ममत्व और शांति की वर्षा करने वाली हैं। आध्यात्मिक यात्रा का रहस्य: नवरात्रि का पहला स्वरूप 'माता शैलपुत्री' और दूसरा स्वरूप 'माता ब्रह्मचारिणी' का था। उस कालखंड में वे भगवान भोलेनाथ शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घने जंगलों में केवल कठिन तपस्या कर रही थीं। लेकिन माता का यह तीसरा स्वरूप, भगवान शिव को प्राप्त करने के बाद, संसार की रक्षा के लिए प्रकट हुआ **पूर्ण आदि-शक्ति स्वरूप** है। माता चंद्रघंटा को **लाल रंग (Red Color)** अत्यधिक प्रिय है; अतः उनकी पूजा की सफलता के लिए लाल रंग के ताजे फूलों (जैसे लाल गुलाब या गुड़हल) और लाल रंग के स्वच्छ सूती वस्त्रों का उपयोग करना अनिवार्य माना गया है।

मां चंद्रघंटा के परम जाग्रत ध्यान, पूजा और स्तुति महामंत्र

नवरात्रि की तृतीया तिथि को संध्या काल में या सुबह के समय रुद्राक्ष की माला से इन सिद्ध मंत्रों का कम से कम १०८ बार जाप करना आपके जीवन की दरिद्रता को नष्ट कर देता है:

१. मां चंद्रघंटा का प्रामाणिक ध्यान मंत्र

पिंडजप्रवरारूढ़ा, चंडकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।

२. तृतीय दुर्गा का सिद्ध स्तोत्र पाठ

इस सुंदर स्तोत्र का पाठ करने से जातक के घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती:
वंडे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम। सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम॥ मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम। रंग, गदा, त्रिशूल, चापचर, पदम् कमण्डलु माला वराभीतकराम॥

चैत्र नवरात्रि तृतीया तिथि: मां चंद्रघंटा की प्रामाणिक पूजा विधि

बजरंगबली के आराध्य श्री राम की पावन चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह उठकर निम्नलिखित शास्त्र सम्मत विधि से मां का पूजन संपन्न करें:
  1. ब्रह्ममुहूर्त में जागृति: इस पावन दिन सुबह सूर्योदय से पहले ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके शुद्ध लाल वस्त्र धारण करें और व्रत का पवित्र संकल्प लें।
  2. चौकी व आसन व्यवस्था: पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी पर साफ लाल रंग का सूती कपड़ा बिछाएं और उस पर माता चंद्रघंटा की तस्वीर या विग्रह को आदरपूर्वक स्थापित करें।
  3. आह्वान व दीपदान: मां के सम्मुख शुद्ध गाय के घी के **५ दीपक (Five Lamps)** एक साथ प्रज्वलित करें। ऊपर दिए गए ध्यान मंत्रों का सस्वर पाठ करके माता का आवाहन करें।
  4. सप्तशती पाठ व घंटा नाद: पूजा के दौरान पूरी पवित्रता के साथ 'श्री दुर्गा सप्तशती' (Durga Saptashati) के तीसरे अध्याय का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद मां की कपूर से भव्य आरती करें और पूरे घर के कोने-कोने में **घंटा और शंख** बजाएं ताकि नकारात्मक शक्तियां घर छोड़ दें। मां की असीम कृपा के लिए इस दिन निराहार या फलाहारी उपवास रखना परम फलदायी होता है।

कुंडली दोष व चक्र जाग्रति: मां चंद्रघंटा की पूजा के मुख्य ५ लाभ

तप और शौर्य की प्रतिमूर्ति मां चंद्रघंटा की सात्विक उपासना करने से जातक को निम्नलिखित अलौकिक वरदान प्राप्त होते हैं:
  • १. भयंकर शत्रु बाधा और क्लेश से मुक्ति: यदि आपके कार्यक्षेत्र में विरोधी आपकी तरक्की से जलते हैं या कोर्ट-कचहरी का कोई मुकदमा चल रहा है, तो मां का यह स्वरूप आपके सभी शत्रुओं को स्वतः ही शांत कर देता है।
  • २. मणिपुर चक्र (Manipura Chakra) की परफेक्ट बैलेंसिंग: जो साधक योग और ध्यान साधना के मार्ग पर हैं, उनके लिए यह दिन स्वर्ण अवसर है। इस दिन अपना पूरा ध्यान नाभि के पीछे स्थित **'मणिपुर चक्र'** पर केंद्रित करना चाहिए। माँ की कृपा से यह चक्र पूरी तरह संतुलित होता है, जिससे जातक के भीतर का डर गायब होता है और गजब का साहस पैदा होता है।
  • ३. मानसिक एकाग्रता और तेज का विकास: यदि आपका मन हमेशा अशांत रहता है या नौकरी-बिजनेस में फोकस की भारी कमी है, तो मां चंद्रघंटा की पूजा से बुद्धि तीक्ष्ण होती है और चेहरे पर एक अनोखा ओज (तेज) आता है।
  • ४. समस्त सुख, ऐश्वर्य और मनचाहा वरदान: मां की अनुकंपा से जातक की दरिद्रता समूल नष्ट हो जाती है। घर में सुख-समृद्धि, भौतिक साधन, भूमि, मकान और राजसी ऐश्वर्य का वास हमेशा बना रहता है।
  • ५. घर से नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन: घंटे की पवित्र ध्वनि और मां के मंत्रों के प्रभाव से आपके पूरे घर और परिवार के सदस्यों पर लगी बुरी नजर, भूत बाधा और तंत्र दोष पल भर में दूर हो जाते हैं।

निष्कर्ष: माता चंद्रघंटा का यह भव्य स्वरूप हमें यह दिव्य संदेश देता है कि जब धर्म और सत्य की रक्षा की बात आए, तो हमारे भीतर सिंह जैसा साहस होना चाहिए, लेकिन हमारे दिल में अपनों के लिए परम वात्सल्य और करुणा का भाव हमेशा बना रहना चाहिए। वर्ष 2026 की खगोलीय और ज्योतिषीय गतियों के अनुसार इस पूरे नवरात्रि काल में अपने विचारों को शुद्ध रखें, पूरी तरह शाकाहारी रहें, और बड़ों का आदर करें; जगत जननी मां चंद्रघंटा आपके जीवन के सभी कष्टों को हरकर आपके घर को सुख, अखंड समृद्धि और आरोग्यता के आशीर्वाद से हमेशा के लिए सराबोर कर देंगी।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

कैटेगरी

आपके लिए रिपोर्ट्स

    अनुशंसित पूजा

      Ask Question

      आपके लिए खरीदारी

      आपके लिए रिपोर्ट्स

      त्रिलोक ऐप में आपका स्वागत है!

      image