मोक्षदा एकादशी 2025 - कैसे करें इस विशेष दिन पूजा ?

मोक्षदा एकादशी 2025 - कैसे करें इस विशेष दिन पूजा ?

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से न केवल साधक को, बल्कि उसके पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है, जो इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा देती है।

मोक्षदा एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2025 में मोक्षदा एकादशी का व्रत उदय तिथि के अनुसार 1 दिसंबर को रखा जाएगा। तिथियों का विवरण निम्नलिखित है:
  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 30 नवंबर 2025, रात 09:30 बजे।
  • एकादशी तिथि समाप्त: 01 दिसंबर 2025, शाम 07:02 बजे।
  • व्रत तिथि: 01 दिसंबर 2025 (उदय तिथि के अनुसार)।
  • विशेष: इसी दिन रात 11:18 बजे पंचक भी समाप्त होगा।

मोक्षदा एकादशी व्रत का महत्व

मोक्षदा एकादशी का व्रत अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
  • पितरों की मुक्ति: यह व्रत पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है और उन्हें नरक के कष्टों से मुक्त कर मोक्ष दिलाता है।
  • बाधाओं से मुक्ति: जीवन में आ रही आर्थिक, मानसिक और शारीरिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
  • ग्रह दोष निवारण: इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर कुंडली के ग्रह दोषों से राहत मिलती है।
  • सुख-समृद्धि: माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त कृपा से घर में खुशहाली आती है।

मोक्षदा एकादशी पूजन विधि (Step-by-Step)

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस विधि से पूजा करें:
  1. स्नान और संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और हल्के रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें। उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें।
  2. स्थापना: पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. भोग और अर्पण: भगवान को पीले फूल, तुलसी दल (अनिवार्य), पंचामृत, फल, केले और पीली मिठाई का भोग लगाएं।
  4. मंत्र जप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
  5. पाठ और आरती: मोक्षदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में विष्णु जी व लक्ष्मी जी की आरती करें।
  6. पारण: शाम को पारण के समय सात्विक भोजन से व्रत खोलें।

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा: राजा वैखानस के पिता का उद्धार

पौराणिक कथा के अनुसार, गोकुल नगर के प्रतापी राजा वैखानस ने एक बार स्वप्न देखा कि उनके पिता नरक में कष्ट भोग रहे हैं। व्याकुल होकर राजा पर्वत ऋषि के पास गए।

पर्वत मुनि का समाधान

पर्वत मुनि ने अपनी दिव्य दृष्टि से बताया कि पूर्व जन्म के पापों के कारण राजा के पिता नरक में हैं। उन्होंने राजा को मार्गशीर्ष एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित करने की सलाह दी।

पितरों को मिला मोक्ष

राजा ने परिवार सहित विधि-विधान से मोक्षदा एकादशी का व्रत किया और उसका फल पिता को समर्पित कर दिया। इसके प्रभाव से उनके पिता नरक से मुक्त होकर स्वर्ग चले गए और पुत्र को आशीर्वाद दिया।

विशेष: गीता जयंती और धनुर्मास एकादशी

मोक्षदा एकादशी को धनुर्मास की एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, इसलिए इस दिन गीता-पाठ का आरंभ करना या श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करना अत्यंत फलदायक माना जाता है।

निष्कर्ष

मोक्षदा एकादशी आत्म-शुद्धि और पितृ ऋण से मुक्ति का एक महान अवसर है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख-शांति चाहते हैं और पितरों का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो इस पावन तिथि पर व्रत और गीता का पाठ अवश्य करें।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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