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मंत्र
ॐ ह्रीं ह्रौं सूर्याय नमः। आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्येन सविता रक्षेण देवो याति भुवनानि पश्यन्। सूर्यमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्कारोमि।
हे सूर्यदेव! आप समस्त लोकों के दैदीप्यमान प्रकाशक हैं। आप अपने स्वर्ण रथ पर आरूढ़ होकर आकाश में विचरण करते हैं, और अपनी किरणों से अंधकार को दूर करते हैं। आपके तेज से सम्पूर्ण सृष्टि प्रकाशित होती है। आपकी कृपा से हमारे जीवन में शक्ति, ज्ञान और स्पष्टता का उदय हो।
ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः। इमं देवासपत्नं ग्वं सुवध्वं महते क्षत्राय, महते ज्येष्ठ्याय, महते जनराज्याय, इन्द्रियाय। इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्य विशेष वामि राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां ग्वं राजा। चंद्रमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्कारोमि।
हे चंद्रदेव! आप शांति, सौम्यता और मानसिक संतुलन के दाता हैं। आपकी शीतल किरणें मन को शीतलता और आनंद प्रदान करती हैं। कृपया हमें भावनात्मक संतुलन, सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करें। आपकी कृपा से हमारे मन की अशांति समाप्त हो और जीवन में शीतलता का प्रवाह बना रहे।
ॐ हुं श्रीं भौमाय नमः। अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्। आपः ग्वं रेतां ग्वं सिजिन्वति। मंगळमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्कारोमि।
हे मंगलदेव! आप अग्नि के समान लाल और तेजस्वी हैं। आप साहस, उत्साह और ऊर्जा के प्रतीक हैं। कृपया हमें दृढ़ निश्चय, आत्मबल और सफलता का वरदान दें ताकि हम अपने जीवन के संघर्षों को धैर्य और सामर्थ्य से पार कर सकें।
ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नमः। उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टपूर्ते स ग्वं स्र्जेथामायं च। अस्मिन्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यजमानश्च सिदत्। बुधमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्कारोमि।
हे बुधदेव! आप ज्ञान, विवेक और वाणी के अधिपति हैं। कृपया हमें बुद्धिमत्ता, वाक्-कौशल और विवेक का वरदान दें। आपकी कृपा से हम अपने कर्मों में सफलता प्राप्त करें और ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर रहें।
ॐ ह्रीं क्लीं हुं बृहस्पतये नमः। बृहस्पते अति यदर्यो अरहाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दिदयच्छवासृतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्। गुरुमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्कारोमि।
हे गुरु बृहस्पति! आप देवताओं के आचार्य और ज्ञान के स्वरूप हैं। कृपया हमें ज्ञान, धर्म, समृद्धि और विवेक प्रदान करें। आपकी कृपा से हमारे जीवन में सुख, सम्मान और आध्यात्मिक प्रकाश बना रहे।
ॐ ह्रीं श्रीं शुक्राय नमः। अन्नात्परिसुतो रसं ब्राह्मणः, व्यापिवत् क्षत्रं पयः सोमं प्रजापतिः। ऋतेन सत्यं इन्द्रियं विपं ग्वं। शुक्रमन्धस इन्द्रसिन्ध्रियमिदं पयोऽमृतं मधु। शुक्रमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्कारोमि।
हे शुक्रदेव! आप जीवन में सौंदर्य, प्रेम और आनंद के प्रेरक हैं। आप बुद्धि, समृद्धि और भोग के दाता हैं। कृपया हमें आकर्षण, कला और समृद्धि का आशीर्वाद दें ताकि हमारा जीवन मधुरता और संतुलन से परिपूर्ण हो।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः। शं नो देवीरभिष्टय आपो भवंतु प्रीतये। क्षं यो रभि श्रवंतु नः। शनिमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्कारोमि।
हे शनिदेव! आप कर्मफल दाता और न्यायप्रिय ग्रह हैं। आप धैर्य, संयम और सहनशीलता के प्रतीक हैं। कृपया हमारे सभी दुखों को दूर करें और हमें स्थिरता, न्याय और आत्मबल प्रदान करें।
ॐ ऐं ह्रीं राहवे नमः। कया नश्चित्रा अभुवदोती सदा वृधः सखा। कया शचिष्ठया व्रता। राहुमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्कारोमि।
हे राहु देव! आप रहस्यमय शक्ति और परिवर्तन के प्रतीक हैं। कृपया हमें छल, भय और बाधाओं से मुक्त करें। आपकी कृपा से हमारे जीवन में नई दिशा, सफलता और दृढ़ता प्राप्त हो।
ॐ ह्रीं ऐं केतवे नमः। केतुम् कृण्वन्त्र केतवे पेषो मर्या अपेषसे। समुषद्भिरजायताः। केतुमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्कारोमि।
हे केतु देव! आप ज्ञान, आत्मचेतना और मोक्ष के प्रतीक हैं। आप अज्ञान का नाश कर आत्मज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। कृपया हमें वैराग्य, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करें। आपकी कृपा से हम मोक्ष और सत्य के मार्ग पर अग्रसर हों।
