
October 2025 Ekadashi - पापाकुंशी और रमा एकादशी का व्रत

1288

पूजा
October 2025 Ekadashi - पापाकुंशी और रमा एकादशी का व्रत
अक्टूबर महीने में पापांकुशा और रमा एकादशी का व्रत किया जाएगा। मान्यता है कि इन व्रतों को करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और पापों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं अक्टूबर में कब कब रखा जाएगा एकादशी व्रत साथ ही जानें व्रत का महत्व।
हर माह में दो एकादशी तिथि आती हैं। उसी तरह अक्टूबर माह में भी दो एकादशी आएगी। पापांकुशा एकादशी और रमा एकादशी का व्रत इस महीने किया जाएगा। एकादशी का व्रत करने वालों को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान पूजा पाठ करने से जीवन में सुख समृद्धि और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है। आइए जानते हैं अक्टूबर माह में कब कब रखा जाएगा एकादशी का व्रत।
कब है पापांकुशा एकादशी व्रत ?
पंचांग के अनुसार, आश्विन माह में आने वाली एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। इस साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 2 अक्टूबर को रात में 7 बजकर 9 मिनट पर होगा और 3 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 32 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त होगी। उदय तिथि के अनुसार, पापाकुंशी एकादशी तिथि का व्रत 3 अक्टूबर को ही रखा जाएगा। पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण 4 अक्टूबर को किया जाएगा।
कब है रमा एकादशी का व्रत ?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह में आने वाली एकादशी तिथि को रमा एकादशी कहा जाता है। कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 16 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर आरंभ होगा और 17 अक्टूबर को शाम में 11 बजकर 12 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी। ऐसे में रमा एकादशी का व्रत 16 अक्टूबर को उदय तिथि के हिसाब से किया जाएगा।
पापाकुंशी एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में सुख शांति भी बनी रहती है। इसी के साथ व्रत करने वालों को नरम से मुक्ति मिलती है।
रमा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रमा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को आर्थिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही व्रत करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और धन धान्य से जुड़ी सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। रमा एकादशी पर आप भगवती महालक्ष्मी की विशेष पूजा भी आपको करना चाहिए।
एकादशी पूजा विधि
- एकादशी के दिन सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें।
- इसके बाद साफ पीले रंग के वस्त्रों को धारण करें।
- अब पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- इसके बाद एक साफ चौकी लेकर उसपर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर दें।
- अब प्रभु को पीले वस्त्र अर्पित करें।
- इसके बाद पीले फूल, चंदन, तुलसी दल अर्पित करें।
- अब मिठाई का भोग लगाएं।
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।
- अंत में आरती करें और जरुरमंद व्यक्तियों को दान दक्षिणा दें।
- इस दौरान आप रात्रि के समय भगवान विष्णु के भजन और कीर्तन का आयोजन भी कर सकते हैं, इससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।