गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं को लगाएं ये विशेष भोग

गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं को लगाएं ये विशेष भोग

गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं को लगाएं ये विशेष भोग

गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं का पूजन किए जाने का विधान है। गुप्त नवरात्र का पर्व गृहस्थ से ज्यादा तंत्र, साधना कर्म और योग क्रियाओं के लिए बहुत सही समय माना जाता है। गुप्त नवरात्रि में साधारण स्वरुप में मां दुर्गा के नौं रुपों का पूजन भी किया किया जाता है लेकिन विशेष रुप से इस समय दस महाविद्याओं का पूजन संपन्न होता है। इस समय हर दिन ब्रह्माणिय शक्ति व ऊर्जा का अलग स्तर होता है। हर दिन खास होता है एवं साधना को चरण दर चरण पूरा होते देखते हैं। गुप्त नवरात्रि के दिन दस महाविद्याओं के हर रुप का पूजन किया जाता है। इस समय पर दसमहाविद्या को विशेष भोग लगाने का विधान रहा है। साल 2026 में गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू हो रही है।

मां काली, तारा और ललिता का भोग

1) मां काली- महाविद्या काली का पूजन विशेष रुप से गुप्त नवरात्रि में साधना सिद्धि हेतु किया जाता है। मां काली को श्रीफल खास तौर पर अर्पित किया जाता है। देवी काली की पूजा में भोग स्वरूप शहद का उपयोग विशेष रुप से किया जाता है। मां काली को शहद अत्यंत प्रिय हैं। गुप्त नवरात्रि में महाविद्या काली का पूजन करने के उपरांत मां को शहद का भोग विशेष रुप से अर्पित करना चाहिए। 2) देवी तारा- 10 महाविद्या की दूसरी शक्ति देवी तारा है। तारा देवी भक्तों को सभी दुखों से तारने वाली है। देवी तारा को हिंदू धर्म की ही भांति बौद्ध धर्म में भी अत्यंत पूजनीय माना गया है। तारा देवी के पूजन में सरसों के तेल से बने पदार्थ, तेजपत्ता चढ़ाए, नारियल, सूखे मेवे और रेवड़ियों का भोग लगाने से सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। 3) देवी ललिता- 10 महाविद्याओं में देवी ललिता सुख एवं सौभाग्य की देवी हैं। देवी ललिता का पूजन आर्थिक विपन्नता को दूर करता है। देवी ललिता के पूजन में ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करने से सभी कष्ट दूर होते हैं, धन धान्य की प्राप्ति होती है। देवी ललिता के पूजन में सफेद रंग से निर्मित खाद्य पदार्थों का विशेष रुप से भोग बनाया जाता है। इस दिन देवी को खीर, सफेद मिठाईयां एवं दूध से बने भोग अर्पित करना उत्तम माना गया है। देवी के पूजन के पश्चात भोग अर्पित करके गरीबों में बांटने से गोर दोष शांत होते हैं।

मां भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, छिन्नमस्तिका का भोग

4) महाविद्या भुवनेश्वरी- महाविद्या भुवनेश्वरी का पूजन सृष्टि के कल्याण एवं सभी सिद्दियों की प्राप्ति हेतु किया जाता है। महाविद्या भुवनेश्वरी का पूजन करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। देवी की पूजा से ज्ञान में वृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। महाविद्या भुवनेश्वरी की पूजा में माता रानी को मालपुआ का भोग विशेष रुप से अर्पित किया जाता है। 5) महाविद्या त्रिपुर भैरवी- महाविद्या त्रिपुर भैरवी को काली का स्वरुप माना गया है। त्रिपुर भैरवी के अनेकों नाम हैं और देवी की अनेक सहायिकाओं को भैरवी रुप में भी जाना जाता है। देवी का स्वरुप शत्रुओं का नाश करने के लिए विख्यात हैं। त्रिपुर की सुरक्षा का दायित्व इन्हें प्राप्त हैं। महाविद्या त्रिपुर भैरवी की पूजा में देवी को गुड़, खांड आदि का भोग विशेष रुप से अर्पित किया जाता है। देवी की पूजा में लाल चंदन का उपयोग जरुर करना चाहिए। देवी को गुड़ का भोग लगाने से शत्रु बाधा शांत होती है। न्यायिक मामलों में विजय की प्राप्ति होती है। 6) महाविद्या छिन्नमस्तिका- महाविद्या छिन्नमस्तिका को तंत्र में विशेष स्थान प्राप्त हैं। देवी का पूजन तांत्रिक कर्म में सफलता हेतु किया जाता है। महाविद्या छिन्नमस्तिका के पूजन में माता को मीठे पान का भोग लगाना बहुत उत्तम होता है। देवी के पूजन में शहद फर पान को विशेष माना जाता है।

मां धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला का भोग

7) धूमावती माता - गुप्त नवरात्रि में महाविद्या धूमावती का पूजन रोगों के नाश हेतु किया जाता है। रोग एवं दोषों का नाश देवी के पूजन द्वारा संभव होता है। देवी के पूजन में सरल एवं गरिष्ठ दोनों प्रकार के भोग लगाने का वर्णन प्राप्त होता है। देवी की पूजा में तेल से बने पदार्थ एवं खिचड़ी को विशेष माना गया है। 8) बगलामुखी माता- गुप्त नवरात्रि में महाविद्या बगलामुखी की पूजन विशेष तंत्र साधना का समय होता है। तांत्रिक कर्म में देवी को विशेष स्थान प्राप्त हैं। देवी बगलामुखी पीताम्बरा के रुप में भी पूजी जाती है क्योंकि देवी का स्वरुप पीले रंग से अधिक वर्णित होता है। देवी के पूजन में पीले रंग का विशेष उपयोग होता है। जीवन के किसी भी प्रकार के विवाद में विजय पाने के लिए बगलामुखी की पूजन किया जाता है। यह आठवी महाविद्या के रुप में पूजी जाती है। महाविद्या बगलामुखी को खास तौर पर पीले रंग के मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं। बेसन और हल्दी से बने भोग अर्पित किया जाना बेहद शुभ होता है। 9) महाविद्या मातंगी- महाविद्या मातंगी शुभ एवं कोमल स्वरुप होती है। देवी का पूजन नवें दिन पर विशेष रुप से होता है। कला एवं संगीत का सुर इन्हीं में विराजित हैं। देवी मातंगी को भोग स्वरुप मिष्ठान एवं श्रीफल से बने भोग अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। 10) महाविद्या कमला- महाविद्या कमला का स्वरुप अत्यंत शुभदायक होता है। देवी को महाविद्याओं में दसवीं शक्ति के रुप में माना जाता है। देवी का स्वरुप सभी तरह के ज्ञान एवं बुद्धि को प्रदान करने वाला माना जाता है। देवी कमला को खीर का भोग एवं केसर अर्पित करना शुभ होता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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