
इस नवरात्रि जरूर पढ़ें पार्वती पंचक, वैवाहिक जीवन होगा सुखद

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पूजा
इस नवरात्रि जरूर पढ़ें पार्वती पंचक, वैवाहिक जीवन होगा सुखद
शारदीय नवरात्रि 2025, 22 सितंबर से शुरू हो रही है। यदि आप अपने जीवन में प्रेम प्राप्त करना चाहते हैं या अपने वैवाहिक जीवन को सफल बनाना चाहते हैं, तो आपको नवरात्रि से संकल्प लेकर रोजाना पार्वती पंचक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। दरअसल मां पार्वती शक्ति का प्रतीक है। नवदुर्गा, काली, तारा आदि दस महाविद्या मां पार्वती का स्वरूप है। मां तुरंत ही अपने भक्तों को विपत्तियों से बचा लेती हैं। उनकी पूजा और स्तोत्र के कई तरीके हैं, लेकिन इनमें पार्वती पंचक स्तोत्र को पुराणों में बहुत महत्व दिया गया है। इस स्तोत्र में माता को शक्ति मानते हुए उनकी सत्ता को स्वीकार किया गया है। आमतौर पर इस स्तोत्र को पढ़ने की सलाह उन लोगों को दी जाती है, जो वैवाहिक या प्रेम जीवन की समस्याओं से परेशान हैं। इसके अलावा भी पार्वती पंचक स्तोत्र से सुख, ऐश्वर्य, धन और सौभाग्य प्राप्त किया जा सकता है।
पार्वती पंचक स्तोत्र का महत्व
पार्वती पंचक स्तोत्र रोजाना पढ़ने से जीवन में प्रेम बढ़ता है। यदि आपके संबंध सभी जगह खराब हो चुके हैं, तो आपको पार्वती पंचक स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। वैवाहिक जीवन में मधुरता, प्रेम विवाह में अड़चन या फिर शादी ही नहीं हो पाना जैसी समस्याओं का निराकरण पार्वती पंचक पढ़ने से तुरंत ही हो जाता है। पार्वती पंचक स्तोत्र से सभी लोगों का कल्याण तुरंत ही हो जाता है। जिन लोगों को मां की कृपा चाहिए, उन्हें इस स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए।
पार्वती पंचक के लाभ
पार्वती पंचक स्तोत्र से ना केवल पारिवारिक जीवन की समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि आर्थिक, सामाजिक क्षेत्र में भी उन्नति होती है। पार्वती पंचक स्तोत्र से ये लाभ मिलते हैं-
- 1. सुख-समृद्धि - पार्वती पंचक स्तोत्र से जीवन में सुख, समृद्धि, संपन्नता औ शांति की प्राप्ति होती है।
- 2. नकारात्मकता दूर- पार्वती पंचक स्तोत्र का गायन की तरह पाठ करने से एक विशेष कंपन उत्पन्न होता है। जो जीवन से नकारात्मकता को दूर कर देता है।
- 3. दरिद्रता दूर- पार्वती पंचक स्तोत्र से दरिद्रता दूर हो जाती है। यदि आप आर्थिक उन्नति प्राप्त करना चाहते हैं, तो लाल फूलों से मां की आराधना करने और पार्वती पंचक पाठ से लाभ मिलता है।
- 4. विवाह का योग- यदि किसी की आयु हो जाने के बाद भी अभी तक विवाह का योग नहीं बना है, तो पार्वती पंचक स्तोत्र के रोजाना पाठ से समस्त इच्छाएं पूरी होती है।
- 5.स्वास्थ्य - पार्वती पंचक स्तोत्र से माता का अभिषेक करने से अच्छा स्वास्थ्य मिलता है।
- 6. अच्छा ज्ञान - यदि पढ़ाई में कमजोर हैं या ज्ञान प्राप्ति में बाधा आ रही है, तो पार्वती पंचक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
आप सुन भी सकते हैं स्तोत्र
ये हैं पार्वती पंचक स्तोत्र
धराधरेन्द्र नन्दिनी शशंक मालि संगिनी,
सुरेश शक्ति वर्धिनी नितान्तकान्त कामिनी।
निशा चरेन्द्र मर्दिनी त्रिशूल शूल धारिणी,
मनोव्यथा विदारिणी शिव तनोतु पार्वती|

भुजंग तल्प शामिनी महोग्रकान्त भागिनी,
प्रकाश पुंज दायिनी विचित्र चित्र कारिणी।
प्रचण्ड शत्रु धर्षिणी दया प्रवाह वर्षिणी,
सदा सुभाग्य दायिनी शिव तनोतु पार्वती।
प्रकृष्ट सृष्टि कारिका प्रचण्ड नृत्य नर्तिका ,
पनाक पाणिधारिका गिरिश ऋग मालिका।
समस्त भक्त पालिका पीयूष पूर्ण वर्षिका,
कुभाग्य रेख मर्जिका शिव तनोतु पार्वती।
तपश्चरी कुमारिका जगत्परा प्रहेलिका,
विशुद्ध भाव साधिका सुधा सरित्प्रवाहिका।
प्रयत्न पक्ष पौसिका सदार्धि भाव तोषिका,
शनि ग्रहादि तर्जिका शिव तनोतु पार्वती।

शुभंकरी शिवंकरी विभाकरी निशाचरी,
नभश्चरी धराचरी समस्त सृष्टि संचरी।
तमोहरी मनोहरी मृगांक मालि सुन्दरी,
सदोगताप संचरी, शिवं तनोतु पार्वती।।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।