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कुंडली में दो ग्रहों की युति से कई बार अच्छे योग और कई बार दुर्योग बनते हैं। जब ये युति अच्छी नहीं होती है, तो उसे दोष कहते हैं। ज्योतिष में कई प्रकार के दोष होते हैं। उनमें से एक है पितृदोष। कुंडली में पितृदोष को बेहद खराब फल देने वाला दोष माना जाता है। पितृ दोष वाले व्यक्ति को भी कुंडली में कालसर्प दोष की तरह की नुकसान उठाना पड़ते हैं। जब भी कोई दोष बनता है, तो उसका निवारण करना जरूरी होता है। जानते हैं पितृ दोष क्या है, कैसे बनता है और इसके निवारण के उपाय क्या है।
पितृ दोष को एक शाप की तरह माना जा सकता है। इससे जीवन कई समस्याएं आने लगती है। कुंडली में कुछ ग्रहों की गलत स्थिति के कारण पितृ दोष बनता है। इन ग्रहों में सूर्य और राहु बहुत ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। पितृ दोष अक्सर पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। पितृ दोष के कारण सबसे अधिक कष्ट संतान को उठाना पड़ता है।
कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार जब हमारे पूर्वजों की आत्माएं तृप्त नहीं होती हैं। वे एक निश्चित जगह पर भटकती है। दरअसल इसके पीछे उनका ठीक से अंतिम संस्कार नहीं होना और मृत्यु के बादउनका श्राद्ध नहीं होना माना जाता है। ये नहीं होने पर ये आत्माएं परिवार के लोगों को कष्ट देतीं हैं।
जब किसी भी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य और राहु साथ होते हैं, तो पितृ दोष बनता है। इसके अलावा राहु की युति चंद्रमा या लग्नेश से होती है, तब भी कुंडली में पितृ दोष बनता है। गुरु और राहु कुंडली में एक साथ अष्टम भाव में होते हैं, तो पितृ दोष बनता है। राहु यदि केद्र या त्रिकोण में बैठा हो, तब भी कुंडली में पितृ दोष बनता है।
- पितृ दोष होने पर व्यक्ति के जीवन में नौकरी और बिजनेस में हानि होने लगती है।
- परिवार में अचानक से कलह होने लगता है और आपसी मतभेद बढ़ने लगते हैं।
- सफलता मिलते मिलते रूक जाती है।
- संतान गलत मार्ग पर भटकने लग जाती है।
- वंश आगे नहीं बढ़ता है।
- परिवार के सदस्यों को कोई बीमारी होने लगती है।
कुंडली में पितृ दोष होने पर पितृ दोष निवारण पूजा में जरूर भाग लेना चाहिए। यह पूजा आमतौर पर पवित्र नदियों के घाट पर हो जाती है। साथ ही गया, बद्रीनाथ, उज्जैन, हरिद्वार, नासिक जैसी जगहों पर भी पितृ दोष की पूजा की जाती है। इसके अलावा कुछ और उपाय निश्चित तौर पर किए जाने चाहिए।
- पितृों के निमित्त रोजाना गाय को रोटी देना चाहिए।
- घर में जहां मटका रखते हैं, वहां शाम के समय दीपक प्रज्वलित करना चाहिए।
- अपने पूर्वजों की तिथि पर जरूरतमंदों का रुपए और अन्य सामान दान करना चाहिए।
- प्रत्येक अमावस्या पर पितृ सुक्त का पाठ पढ़ें और उनके लिए मंदिर में कुछ सामान दान करें।
इस तरह कुछ सामान्य उपाय करके पितृ दोष से काफी हद तक बचा जा सकता है।
