
पितृपक्ष 2025 - तिथि, महत्व और श्राद्ध विधि

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पूजा
पितृपक्ष 2025 - तिथि, महत्व और श्राद्ध विधि
पितृपक्ष यानी श्राद्धपक्ष, हिंदू धर्म का वह महत्वपूर्ण त्यौहार है जब हम अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह समय पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए समर्पित है। साल 2025 में पितृपक्ष 17 सितंबर, बुधवार से शुरू होकर 2 अक्टूबर, गुरुवार तक चलेगा।
पितृपक्ष का महत्व
गरुड़ पुराण और अग्नि पुराण सहित कई धर्म ग्रंथों में पितृपक्ष के महत्व का वर्णन किया गया है। मान्यता है कि इन 16 दिनों की अवधि में पितृ लोक से हमारे पूर्वज पृथ्वी पर अपने परिजनों के पास आते हैं। इस दौरान विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यदि श्राद्ध कर्म न किए जाएं तो पितृ दोष लग सकता है, जिससे जीवन में कई तरह की बाधाएं आ सकती हैं।
साल 2025 में पितृपक्ष की तिथियां
पितृपक्ष की तिथियां चंद्र पंचांग के अनुसार निर्धारित होती हैं, और प्रत्येक तिथि किसी विशेष पूर्वज के श्राद्ध के लिए होती है, जिनकी मृत्यु उस तिथि पर हुई हो। यहां 2025 के पितृपक्ष की मुख्य तिथियां दी गई हैं:
- पूर्णिमा श्राद्ध: 7 सितंबर 2025, रविवार
- प्रतिपदा श्राद्ध: 8 सितंबर 2025, सोमवार
- द्वितीया श्राद्ध: 9 सितंबर 2025, मंगलवार
- तृतीया श्राद्ध: 10 सितंबर 2025, बुधवार
- चतुर्थी श्राद्ध: 10 सितंबर 2025, बुधवार
- पंचमी श्राद्ध: 11 सितंबर 2025, गुरुवार
- षष्ठी श्राद्ध: 12 सितंबर 2025, शुक्रवार
- सप्तमी श्राद्ध: 13 सितंबर 2025, शनिवार
- अष्टमी श्राद्ध: 14 सितंबर 2025, रविवार
- नवमी श्राद्ध (मातृ नवमी): 15 सितंबर 2025, सोमवार
- दशमी श्राद्ध: 16 सितंबर 2025, मंगलवार
- एकादशी श्राद्ध: 17 सितंबर 2025, बुधवार
- द्वादशी श्राद्ध (संन्यासी श्राद्ध): 18 सितंबर 2025, गुरुवार
- त्रयोदशी श्राद्ध: 19 सितंबर 2025, शुक्रवार
- चतुर्दशी श्राद्ध (शस्त्र-घात): 20 सितंबर 2025, शनिवार
- सर्वपितृ अमावस्या: 21 सितंबर 2025, रविवार
श्राद्ध विधि और अनुष्ठान
पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
- पार्वण श्राद्ध: यह पितृपक्ष के दौरान किया जाने वाला मुख्य श्राद्ध है, जिसमें ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है।
- एकादश श्राद्ध: यह किसी की मृत्यु के ग्यारहवें दिन किया जाता है।
- सपिंडन श्राद्ध: यह मृत्यु के एक वर्ष बाद किया जाता है।
पितृपक्ष के दौरान कुछ सामान्य अनुष्ठान और क्रियाएं इस प्रकार हैं:
- तर्पण: जल, तिल, जौ और कुशा से पितरों को तर्पण दिया जाता है। यह क्रिया पितरों को तृप्त करने के लिए की जाती है।
- पिंडदान: चावल, जौ, दूध और तिल से बने पिंड पितरों को अर्पित किए जाते हैं। यह उनके भोजन का प्रतीक है।
- ब्राह्मण भोजन: पितरों की संतुष्टि के लिए ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है। इसके बाद उन्हें वस्त्र और दक्षिणा भी दी जाती है।
- कौए, गाय और कुत्ते को भोजन: मान्यता है कि कौए पितरों का रूप होते हैं, और गाय व कुत्ते को भोजन कराने से पितरों तक वह भोजन पहुंचता है।
- दान: इस दौरान गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- सात्विक जीवन: पितृपक्ष के दौरान मांस-मदिरा का सेवन, तामसिक भोजन और किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्य से बचना चाहिए।
पितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
- अपने पूर्वजों का स्मरण करें और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।
- अपने पितरों के निमित्त तर्पण, पिंड दान और ब्राह्मण भोजन कराएं।
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें।
- पितृस्तोत्र का पाठ करें।
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पितरों का ध्यान करें।
क्या न करें:
- पितृपक्ष में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि न करें।
नए वस्त्र या कोई नई वस्तु न खरीदें।
दाढ़ी, बाल या नाखून न कटवाएं।
मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
घर में क्लेश न करें और किसी का अपमान न करें।
पितृपक्ष हमें अपने पूर्वजों से जुड़े रहने और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है। इन 16 दिनों में श्रद्धापूर्वक किए गए कर्म हमारे जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर देते हैं।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।
प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।