18 वर्ष की होती है राहु की महादशा, कर देती है बुरा हाल

18 वर्ष की होती है राहु की महादशा, कर देती है बुरा हाल

18 वर्ष की होती है राहु की महादशा, कर देती है बुरा हाल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस नक्षत्र में आप पैदा होते हैं, उस नक्षत्र के स्वामी से आपके जीवन की दशा शुरू होती है। ऐसे में सभी के जीवन में कुछ ग्रहों की दशा निश्चित तौर पर आती है। इन दशाओं का निश्चित समय होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु की महादशा 18 साल की होती है। यह 18 साल किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद चैलेजिंग होते हैं। कई बार व्यक्ति इस स्तर तक प्रभावित होता है कि उसका सबकुछ खत्म हो जाता है। हालांकि पूरे 18 साल ही ऐसे गुजरे यह जरूरी नहीं है, लेकिन राहु की महादशा में कई तरह की बुरी घटनाएं होतीं हैं।

क्या-क्या होता है राहु की महादशा में


राहु को चालाकी का ग्रह माना जाता है। हालांकि राहु की महादशा में राहु के फल इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि राहु आपकी कुंडली में कहां बैठा है। फिर राहु को नकारात्मक ग्रह ही माना जाता है। ऐसे में राहु महादशा का फल कुछ इस प्रकार होता है- 

- अचानक से आपकी बोली खराब हो जाती है और आप अपशब्दों का प्रयोग करने लगते हैं।
- आप शराब या मांस का सेवन भी करने लग जाते हैं।
- बार-बार अनावश्यक यात्राएं होने लगती है।
- जीवन में स्थिरता नहीं आती है।
- आप अक्सर गलत निर्णय ले लेते हैं, जो आपके लिए अच्छे नहीं होते हैं।
- ससुराल पक्ष से संबंध बिगड़ने लगते हैं।
- रात को नींद नहीं आती है और मन अशांत रहता है।
- कोर्ट केस होने की आशंका बनी रहती है।
- जीवनसाथी के साथ बार-बार मतभेद होते हैं।
- आप लोगों को शंका भरी निगाहों से देखने लगते हैं।
- झूठ बोलने की आदत आपको लग जाती है, जिससे की आपको कई जगह नुकसान उठाना पड़ता है।
- आपके बिजनेस में नुकसान होता है।
- बार-बार आपको नौकरी बदलने का मन करता है।
- पढ़ाई या करियर बदलना आपकी मजबूरी बन जाता है।

ये हैं राहु की महादशा के उपाय

यदि आपको राहु की महदशा के विपरित परिणाम मिल रहे हैं, तो आपको कुछ ये उपाय जरूर करना चाहिए।
- आप प्रतिदिन भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र का जाप करें।
- राहु के बीज और तंत्रोक्त मंत्र का पूरी महादशा के दौरान हर साल 18 हजार जाप करें। दशांश हवन करें।
- गरीबों को दो रंग के कंबल दान करें।
- पक्षियों को जौ सहित अन्य अनाज खिलाएं।
- काली गाय और काले कुत्ते को मीठा खिलाएं।
- भगवान भैरव और दुर्गा की पूजा करें।


लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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