कुंडली में राज योग - देखें आपकी कुंडली का हाल

कुंडली में राज योग - देखें आपकी कुंडली का हाल

कुंडली में राज योग - देखें आपकी कुंडली का हाल

कुंडली में 9वें और 10वें स्थान का बड़ा महत्त्व होता है। जन्म कुंडली में नवां स्थान भाग्य का और दसवां कर्म का स्थान होता है। कोई भी व्यक्ति इन दोनों भाव से ही सबसे ज्यादा भाग्यवान माना जाता है। नवां भाव भाग्य भाव और दसवां भाव कर्म भाव है। यदि कर्म को भाग्य का साथम मिल जाता है, तो व्यक्ति का जीवन सुख-सुविधाओं से भरपूर रहता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में राजयोग रहता है, उस व्यक्ति को हर प्रकार की सुख-सुविधा और लाभ भी प्राप्त होते हैं। जानते हैं अलग-अलग - मेष लग्न - मेष लग्न में नवम या दशम भाव में गुरु और मंगल जैसे ग्रह हों, तो राजयोग बनता है। ऐसे लोग धर्म कर्म में रुचि रखते हैं और आत्मविश्वास के साथ काम करते हैं। वृषभ लग्न - वृषभ लग्न में यदि दशम भाव में शनि आता है, शश योग बनाता है। ऐसा जातक कॅरियर में काफी उन्नति पाता है। कई बार ऐसे जातक को पिता की संपत्ति का हिस्सा भी मिलता है। मिथुन लग्न - मिथुन लग्न में यदि गुरु और शनि की युति नवम या दशम भाव में बन जाती है, तो यह युति राजयोग का काम करती है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में समस्त सुख और वैभव प्राप्त होते हैं। कर्क लग्न - कर्क लग्न में यदि नवम भाव में गुरु हों, तो यह बहुत ही पावरफुल राजयोग है। ऐसे जातक को पिता का साथ मिलता है और उनके आशीर्वाद से वह काफी यश और समृद्धि प्राप्त करता है। सिंह लग्न - सिंह लग्न के जातकों की कुंडली में पांचवें भाव गुरु और पहले या दसवें या 11वें भाव में सूर्य होता है, तो व्यक्ति की कुंडली बेहद अच्छी होती है। उसका जीवन राजाओं जैसा होता है। कन्या लग्न - कन्या लग्न में बुध और शुक्र अगर भाग्य स्थान या दशम भाव में एक साथ आ जाते हैं तो व्यक्ति को जीवन में किसी काम की कमी नहीं होती है। तुला लग्न - तुला लग्न वालों की कुंडली में यदि छठे भाव में शुक्र मीन राशि में बैठा हो, तब भी व्यक्ति के लिए कई तरह के संघर्ष को समाप्त कर देता है। यदि इनकी कुंडली में नवम भाव में बुध हो, तो व्यक्ति काफी सफल होता है। वृश्चिक लग्न - इस लग्न वालों को मंगल या चंद्रमा भाग्य स्थान यानी नवम स्थान में हों या दशम भाव में सूर्य हों, तो व्यक्ति के लिए राजयोग कारक होता है। इससे जीवन में उच्च सफलता मिलती है। धनु लग्न - धनु लग्न के लिए राजयोग कारक ग्रह बृहस्पति है। यदि बृहस्पति पहले या चौथे घर में हो, तो निश्चित तौर पर यह काफी लाभप्रद रहता है। वहीं यदि सूर्य नवम भाव में स्वराशि का हो, तो यह भी एक विशेष राजयोग बनता है। मकर लग्न - मकर लग्न वाली की कुंडली में अगर शनि और बुध की युति भाग्य या कर्म स्थान पर मौजूद होती है तो राजयोग बन जाता है। वहीं इस लग्न के लिए सूर्य यदि चतुर्थ भाव में आ जाता है, तो विशेष सफलता दिलाता है। कुंभ लग्न - कुंभ लग्न वालों की कुंडली में यदि नवम भाव में शनि हों, तो यह पिता से लाभ दिलाने वाला होता है। वहीं कुंभ लग्न की कुंडली में शुक्र यदि दूसरे भाव में हों, तो व्यक्ति काफी धनवान बनता है। मीन लग्न - मीन लग्न वालों में यदि गुरु पहले भाव में हों, तो व्यक्ति के लिए राजयोग कारक बनता है। वहीं गुरु दशमेश भी हों, तो काफी उन्नति देता है। मंगल का नवम भाव में बैठना भी राजयोग कारक बनता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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